72 नदियों के जल से होगा तिरुपति का अभिषेक

avdesh shrivastava

Publish: Apr, 21 2017 01:45:00 (IST)

Gwalior, Madhya Pradesh, India
72 नदियों के जल से होगा तिरुपति का अभिषेक

महाराजपुरा रोड स्थित भगवान तिरुपति बालाजी के मंदिर में तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव की शुरुआत 21 अप्रैल से होगी। वार्षिकोत्सव में भगवान के अभिषेक के लिए श्रद्धालु 72 नदियों का जल अपने साथ लेकर आते हैं। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, पुष्कर, चंबल, कावेरी, कृष्णा, गोदावरी, क्षिप्रा, सतलज, सिंधु, नर्मदा, व्यास, मानसरोवर आदि सहित दूसरे देशों की नदियों का जल भी अभिषेक के लिए लाया जाएगा।

ग्वालियर. महाराजपुरा रोड स्थित भगवान तिरुपति बालाजी के मंदिर में तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव की शुरुआत 21 अप्रैल से होगी। वार्षिकोत्सव में भगवान के अभिषेक के लिए श्रद्धालु 72 नदियों का जल अपने साथ लेकर आते हैं। गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, पुष्कर, चंबल, कावेरी, कृष्णा, गोदावरी, क्षिप्रा, सतलज, सिंधु, नर्मदा, व्यास, मानसरोवर आदि सहित दूसरे देशों की नदियों का जल भी अभिषेक के लिए लाया जाएगा। इस दौरान दक्षित भारत से लाई गई एक किलो चांदी की शठगोपम भी बालाजी को समर्पित की जाएगी। आंध्रप्रदेश में बने विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर बनाए गए इस मंदिर में दक्षिण स्थापत्य कला की विशेष झलक देखने को मिलती है।
छह फीट के हैं तिरुपति बालाजी

दक्षिण भारत से मंदिर की देखरेख करने आए पंडित रामाचार्य ने बताया ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन के पास इस मंदिर का निर्माण 1990 में एयर कमांडर डी.कीलर ने कराया था। भिंड रोड पर इस मंदिर का भव्य प्रवेश द्वार अपने आप मेें अनूठा है। मंदिर मेें तिरुमला से लाई गई भगवान तिरुपति बालाजी की छ: फुट ऊंची काले पत्थर की प्रतिमा स्थापित है। बालाजी मंदिर के पृष्ठ भाग की दीवार पर एक ओर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार व वामन अवतार की प्रतिमाएं हैं, वहीं दूसरी ओर परशुराम और राम अवतार की प्रतिमाएं हैं। मध्यभाग में तिरूपति बालाजी अपनी पत्नियों अलमेलू और पद्मावती के साथ आशीर्वाद मुद्रा में हैं।
मंदिर से जुड़ी खास बातें

- तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रति शनिवार को मेला लगता है, जिसमें एयरफोर्स अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित शहर के श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।
- बालाजी मंदिर परिसर में विराजे भगवान कार्तिकेय का मंदिर वर्ष भर खुला रहता है। यहां विष्णु पुत्री वरूली एवं इंद्र की पुत्री देवयानी के साथ भगवान कार्तिकेय शोभायमान हैं।

- मंदिर के ठीक सामने पीतल का गरूड़ स्तंभ स्थापित है। उत्तर भारतीय मंदिरों पर जिस प्रकार धर्म ध्वजा लगाते हैं, ठीक उसी प्रकार दक्षिण भारतीय मंदिर में गरूड़ स्तंभ लगा होना जरूरी माना जाता है। गरूड़ स्तंभ पर कार्तिक मास में मटके में दीपक लटकाकर उपासना की जाती है।
ये भी हैं यहां

बालाजी मंदिर के दाईं ओर रामलीला एवं बाईं ओर कृष्णलीला के मनमोहक दृश्य हैं। इनमें कृष्ण जन्म, माखनचोरी, कंस वध, कालिया मर्दन, गीता उपदेश से लेकर कृष्ण-सुदामा के प्रेम को कलाकारों ने जीवंत सा उकेरा है। रामायण के दृश्य भी मंदिर को उत्तर-दक्षिण संस्कृति का आस्था केंद्र निरूपित करते हैं। मंदिर के अग्र भाग के शीर्ष पर बालाजी के ससुर आकाशराज, वकुलमाता, शंकर-पार्वती, नारद एवं कुबेर भगवान की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
वार्षिकोत्सव पर ये होंगे कार्यक्रम

21 अप्रैल - सुबह 5 बजे प्रभात फेरी, शाम 6 बजे विश्वकेसन पूजा
22 अप्रैल - सुबह 5 बजे प्रभात फेरी, सुप्रभातम, सर्पदोष पूजा, सुबह 10.30 से 12 बजे तक पंचामृत अभिषेक, सुदर्शन हवन, चांदी के चरण समर्पण, आरती, शाम 6 बजे विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, छप्पनभोग, रथयात्रा, संगीतमय कल्याण उत्सव एवं आरती

23 अप्रैल - सुबह 5 बजे प्रभात फेरी, सुप्रभातम, सुबह 9 बजे कौन बनेगा तिरुपति यात्रा वासी, दोपहर 12 बजे आरती एवं भंडारा 

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