मुगल बादशाहों की पसंद हुआ करते थे यहां के पान, पाकिस्तान में भी इसके दिवाने लोग

Gwalior, Madhya Pradesh, India
  मुगल बादशाहों की पसंद हुआ करते थे यहां के पान, पाकिस्तान में भी इसके दिवाने लोग

मुगल सम्राटों की पसंद रहे बिलौआ और बरई के पान का स्वाद अभी भी दिल्ली और आगरा में  उतना ही पसंद किया जाता है।

ग्वालियर। मुगल सम्राटों की पसंद रहे बिलौआ और बरई के पान का स्वाद अभी भी दिल्ली और आगरा में  उतना ही पसंद किया जाता है। दरअसल 500 साल बाद भी बरकरार है ग्वालियर के देशी पत्ते के  पान का स्वाद। जहां तक वर्तमान स्थिति का सवाल है, 10 हजार से अधिक पान के पत्ते दिल्ली,आगरा और लखनऊ में भेजे जा रहे हैं।
 
ग्वालियर के पान की वैरायटी एक दम खास है। इसे देशी पत्ता कहा जाता है। बिल्कुल कंच हरा। वयस्क हथैली और दिल की तरह आकार लिए। मुंह में जाय तो अंतिम घूंट तक उसकी खुशबू और रसीलेपन का अहसास से दूर हो जाना मुश्किल हो जाता है। देशी पान की इस  ठसक की वजह से मुगलिया सल्तनत  में एक बड़ा जुमला प्रसिद्ध रहा था।






जब मुगल सल्तनत का अफसर किसी की बात का जबाब न दे तो इसका मतलब निकाला जाता था कि या तो वह आपसे सहमत नहीं है या बिलौआ का पान मुंह में लिए है। वह,नाहक ही बोलकर अपने मुंह का मजा किरकिरा नहीं करना चाहता। 

दिलचस्प बात ये है कि  आजादी के बाद पाकिस्तान के रॉयल खानदानों में ग्वालियर के पान की बड़ी मांग थी। इसके बाद दोनों देशों के बदलते रिश्तों ने पान का निर्यात बंद कर दिया। फिलहाल ग्वालियर जिले में देशी पान के पत्ते की खेती ग्वालियर के आधा दर्जन गांवों में होती है। ये समूची खेती चौरसिया समाज के हाथों में है। अधिकतर परिवारों की खेती को पांच सौ साल हो गए हैं। अपने पूर्वजों की पगड़ी को वे संभालकर रहे हैं।

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