कहीं आप जहरीली सब्जी तो नहीं खा रहे? 

Gwalior, Madhya Pradesh, India
कहीं आप जहरीली सब्जी तो नहीं खा रहे? 

उफन रहे नालों के पानी से पैदा हो रहीं सब्जियां बेचना प्रतिबंधित हैं। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सिटी हॉर्टीकल्चर के नाम पर बोयी जा रही सब्जियां एक तरह से शहर के स्वास्थ्य के साथ खतरनाक खिलवाड़ है। जिसको लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन दोनों ही उनींदे बने हुए हैं।

ग्वालियर. उफन रहे नालों के पानी से पैदा हो रहीं सब्जियां बेचना प्रतिबंधित हैं। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सिटी हॉर्टीकल्चर के नाम पर बोयी जा रही सब्जियां एक तरह से शहर के स्वास्थ्य के साथ खतरनाक खिलवाड़ है। जिसको लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन दोनों ही उनींदे बने हुए हैं। नगर निगम का स्वास्थ्य प्रकोष्ठ ने तमाम वैज्ञानिक चेतावनियों को अनसुना कर ऐसी फसलों को और प्रोत्साहित कर रहा है। आधिकारिक जानकारी मुताबिक स्वर्ण रेखा और उससे जुड़े करीब 22 नालों के किनारे सब्जियां उगाई जा रही हैं, जबकि ये सभी  नाले गंदगी से अटे पड़े हैं।
गंदे पानी की सब्जियों से यह पड़ता है असर
 गंदे पानी से ऊगाई जाने वाली सब्जियों से संक्रमण और गंभीर बीमारियां होती हैं।
 नाले के गंदे पानी में फैक्ट्रियों से निकलने वाले कैमिकल युक्त पानी में बैक्टिरिया और कैमिकल मिलकर आते है, जिसका हानिकारक असर शरीर पर पड़ता है।  इसकी वैज्ञानिक रिपोर्ट कई बार आ चुकी हैं, जिन्हें अनदेखा किया गया है। 
 सब्जियों को जल्दबाजी में बड़ा करने के लिए डंठल पर लगाए जाने वाले ऑक्सीटोसिन के प्रभाव से शरीर में ऊर्जा की कमी होती है्। जो बीमारियों का मुख्य कारण होती हैं। 

प्रतिबंध के बावजूद भी नाले के पानी से की जा रही सब्जियों की सिंचाई 
नाले और सीवर के पानी से सिंचाई किए जाना पूरी तरह से प्रतिबंध  है। पिछले माह ही तात्कालीन कलेक्टर ने इसके लिए विधिवत आदेश जारी किए थे कि जहां पर भी नाले की पानी से सिंचाई होती मिली तो संबंधित के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जेल भेजे जाने की कार्रवाई की जाए। इन सब के बावजूद स्थानीय प्रशासन आंखें बंद किए हुए है। जानकारी के अनुसार शहर की स्वर्ण रेखा से सटे क्षेत्र के सब्जी उत्पादकों के अलावा विजया नगर, बहोड़ापुर, मऊ- जमाहर में भी सब्जी उत्पादकों द्वारा काफी समय से खेतों में सीवर और हानिकारक कैमिकल युक्त पानी का उपयोग कर सिंचाई की जा रही है। कुछ माह पहले सब्जियों में चमक के लिए कैमिकल मिला पानी डालने ओर गंदे पानी से सिंचाई के कारण लोगों के स्वास्थ पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव की शिकायतें प्रशासन तक पहुंची थीं। 

कैमिकल से लाई जा रही चमक 
इन शिकायतों को आधार बनाकर प्रशासन ने जांच कर कई चौंकाने वाले खुलासे भी किए थे। इसी दौरान यह भी पता चला था कि सिंघाडों में भी तेजाब का पुट मिलाकर चमक पैदा की जाती है। जिसकी रिपोर्ट मिलने पर तत्काल प्रतिबंध लगाते हुए संबंंधितों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। हालांकि ये कार्रवाई औपचारिक साबित हुई।  कुछ दिन सीवेज से सिंचाई बंद रही, उसके बाद फिर शुरू हो गई। अब खुले आम हो रही है। 

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