इस शानदार कोठी में हुई थी लूट, डकैती में इनका नाम सुन चौंक उठे थे शहरवासी

Gaurav Sen

Publish: Jan, 13 2017 07:57:00 (IST)

Gwalior, Madhya Pradesh, India
 इस शानदार कोठी में हुई थी लूट, डकैती में इनका नाम सुन चौंक उठे थे शहरवासी

इस खानदान की एक सदस्य ऐसा भी है जिस पर एक कोठी में डकैती डालने का केस लगा हुआ है..

ग्वालियर। ग्वालियर के सिंधिया परिवार के पास धन की कोई कमी नहीं है। सिंधिया रॉयल फैमली जयविलास पैलेस जैसे शानदरा महल की मालिक है। जिसमें बने कमरों में सोने की परत चढ़ी हुई है। पैलेस की भव्यता ऐसी है कि दुनिया भर से टूरिस्ट पैलेस को देखने आते हैं।

राजशाही खत्म होने के बाद सिंधिया खानदान राजनीति में सक्रिय है। वर्तमान में सिंधिया खानदान के ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से सांसद हैं, उनकी दोनों बुआ यशोधरा राजे सिंधिया और वसुंधरा राजे सिंधिया भी राजनीति में एक्टिव हैं। वसुंधरा राजे राजस्थान की चीफ मिनिस्टर हैं और यशोधरा राजे म.प्र सरकार में खेल मंत्री हैं। इस खानदान की एक सदस्य ऐसा भी है जिस पर एक कोठी में डकैती डालने का केस लगा हुआ है..

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जयविलास महल परिसर इलाके में हिरण वन कोठी बनी हुई है। दरअसल यह कोठी सिंधिया राजवंश से जुड़े रहे सरदार संभाजीराव आंग्रे का निवास थी। संपत्ति विवाद के चलते वर्ष 1983 में यह मामला सामने आया। सरदार आंग्रे की पुत्री चित्रलेखा ने ग्वालियर के झांसी रोड थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि माधवराव सिंधिया के साथ उनके डेढ़ दर्जन से ज्यादा समर्थकों ने हिरण वन कोठी पर रात के समय हमला बोला और वहां तैनात कुत्तों की हत्या करके कोठी में रखा माल लूट लिया। इसके बाद माधवराव सिंधिया ने कोठी में ताले लगा दिए। पुलिस ने स्व. माधवराव सहित अन्य लोगों पर डकैती अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

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11 साल बाद फिर शुरू हुआ ट्रायल
इस मामले का कोर्ट में ट्रायल 2004 से इसलिए रुका हुआ था, क्योंकि आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपील करके एफआईआर को चुनौती दी गई। अब वहां से राहत नहीं मिली, जिसके कारण ग्वालियर की विशेष अदालत में इसका ट्रायल शुरू हो गया है।

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ये थे इस मामले में आरोपी
स्व. माधवराव सिंधिया के साथ चंद्रकांत मांढरे, महेन्द्र प्रताप सिंह, उदयवीर सिंह, नरेन्द्र सिंह, शरद शुक्ला, विलास राव लाड़, रमेश शर्मा, मुन्ना शर्मा, राजेन्द्र सिंह तोमर, बाल खांडे, एम राजे भोंसले, रविन्द्र सिंह भदौरिया, अरुण सिंह तोमर, अशोक व केपी सिंह आरोपी थे। इमसें से स्व. माधवराव सिंधिया के साथ शरद शुक्ला और एमपी सिंह का निधन हो चुका है।

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