सड़क पर सजे बाजार, रेंगते रहे वाहन

Gwalior, Madhya Pradesh, India
 सड़क पर सजे बाजार, रेंगते रहे वाहन

दीपावली का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, बाजारों की हालत और ज्यादा बिगड़ती जा रही है। शाम को आलम यह होता है कि सड़क घेरे खड़े ठेले, फुटपाथी दुकानदार और सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्वालियर।  दीपावली का त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, बाजारों की हालत और ज्यादा बिगड़ती जा रही है। शाम को आलम यह होता है कि सड़क घेरे खड़े ठेले, फुटपाथी दुकानदार और सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। 

पत्रिका टीम बुधवार शाम शहर के लश्कर के सराफा बाजार, मुरार के सदर बाजार और उपनगर ग्वालियर के हजीरा बाजार का जायजा लिया। करवा चौथ की वजह से बाजार भीड़ से भरे पड़े थे। हर बाजार में लोग जाम से परेशान थे। वाहन रेंगते हुए चल रहे थे। व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी मौजूद थे, पर कोई बातों में तो कोई मोबाइल पर  गेम खेल रहा था। किसी को व्यवस्था नियंत्रित करने का समय नहीं था।

सदर बाजार
बाजार में भीड़ तो थी, लेकिन दुकानों तक ग्राहक नहीं पहुंच पा रहे थे। क्योंकि दुकान को घेरे खड़े हाथ ठेले और वाहनों की पार्किंग से ग्राहकों को दुकान तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं मिल रहा था, इस कारण ग्राहक आगे बढ़ जाते। दुकानदार ठेला हटाने को कहता तो ठेलेवालों लडऩे को तैयार रहता। आलम यह था कि दुकानदार ग्राहकों की राह देख रहे थे, लेकिन ग्राहक ठेलों पर थोड़ी बहुत खरीदारी करके लौट रहे थे।


कुछ ग्राहक दुकानों में आना चाहते थे, लेकिन टै्रफिक जाम में फंसकर उन्होंने लौटने में ही अपनी भलाई समझी।  व्यापारी सोनू दुलानी का कहना है कि हर साल बाजार के यही हालात रहते हैं। ठेले और वाहनों से रास्ता जाम हो जाता है। ग्राहक चाहकर भी दुकानों पर नहीं आते। कई बार निगम और पुलिस से शिकायतें की पर नतीजा नहीं निकल सका।


हजीरा बाजार
यहां तो स्थिति और ज्यादा खराब थी। दो दिन पहले ही नगर निगम और पुलिस ने कार्रवाई कर ठेलों को हटवाकर सड़क अतिक्रमण से मुक्त कराई थी, लेकिन नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए ठेलों को फिर से सड़क पर खड़ा करवा दिया। इससे पूरी सड़क ठेलों और वाहनों से पटी हुई थी। 


दुपहिया वाहन जाम में फंसकर रेंग-रेंग कर आगे बढ़ रहे थे। मौके पर पुलिस थी, लेकिन वे बातों में मशगुल दिखे। उन्हें जाम खुलवाने या ठेलों को किनारे खड़ा करवाने में कोई रूचि नहीं थी।


सराफा व्यापारी आलोक जैन का कहना है कि ठेले और विक्रम से बाजार की यातायात व्यवस्था खराब होती है। इन दोनों पर नगर निगम और पुलिस प्रशासन ध्यान दे तो समस्या से निजात मिल सकता है। यहां बाजार की स्थिति तो यह है कि दिन में कई बार जाम लगता है।

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