एक ऐसी लैब जहां 14 साल में नहीं हुई एक भी जांच!

Gwalior, Madhya Pradesh, India
एक ऐसी लैब जहां 14 साल में नहीं हुई एक भी जांच!

आयुष विभाग 14 साल में भी ड्रग टेस्टिंग लैब शुरू नहीं कर सका। ऐसी स्थिति में दवा निर्माता या निजी लेबोरेट्री की जांच पर भरोसा कर दवाएं दी जा रही हैं।

ग्वालियर। आयुर्वेद दवाओं की जांच का कोई पैमाना नहीं है, इसलिए आप जो दवा खा रहे हैं कहीं वह बोगस तो नहीं। यह शंका इसलिए है, क्योंकि आयुष विभाग 14 साल में भी ड्रग टेस्टिंग लैब शुरू नहीं कर सका। ऐसी स्थिति में दवा निर्माता या निजी लेबोरेट्री की जांच पर भरोसा कर दवाएं दी जा रही हैं।

तेजी से फैल रहे बोगस आयुर्वेद दवाओं के कारोबार को देखते हुए प्रदेश के दवा निर्माता भी परेशान हैं। वे भी दवाओं की गुणवत्ता परखने के लिए मानक स्तर की लेबोरेट्री बनाने की मांग कर चुके हैं। इधर वर्ष 2002 में ग्वालियर के आयुर्वेद कॉलेज में लैब बन चुकी है, पर इन 14 साल में यहां एक भी जांच नहीं हो सकी।

मशीनों की पैकिंग तक नहीं खुली
आयुर्वेद इलाज के प्रति लोगों में बढ़ते विश्वास को देखते हुए वर्ष 2002 में 4 करोड़ की लागत से ग्वालियर में आधुनिक लैब तैयार हुई, लेकिन सरकार के लचर रवैए के चलते लैब में आई करोड़ों रुपए की मशीनों की पैकिंग तक नहीं खुल पाई।



शक्ति बढ़ाने के नाम पर बिक रहे उत्पाद
गोरा करने, बाल उगाने और पौरुष शक्ति बढ़ाने के नाम पर बाजार में बिक रहे उत्पादों में क्या मिलाया जा रहा है। इसे सिर्फ दवा बनाने वाला ही जानता है। इनकी जांच न होने के चलते दवा के नाम पर स्टेरॉयड और केमिकल के उत्पाद बेचे जा रहे हैं।




सामने आ चुका है साइड इफैक्ट  का मामला
आयुर्वेद दवा से साइड इफैक्ट का एक मामला भी सामने आ चुका है। शहर के चार युवाओं के एक वैध की दवा खाने के बाद कमर के कू ल्हे खराब हो चुके हैं। इसकी शिकायत वे सीएमएचओ और पुलिस को कर चुके हैं। विशेषज्ञ बताते हैं इस तरह के साइड इफैक्ट दवा में स्टेरॉयड के चलते होते हैं।



'पदों की पूर्ति न होने से लैब शुरू नहीं हो सकी। हमने विभाग को कई बार पत्र लिखे हैं। हम लैब का ताला खुलवाकर सफाई करा देते हैं।'
- डॉ. महेश शर्मा, डीन, आयुर्वेद महाविद्यालय, ग्वालियर

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