चंबल नदी में कितने जलीय जीव, जानिए 

Gwalior, Madhya Pradesh, India
चंबल नदी में कितने जलीय जीव, जानिए 

हजारों फीट गहरी चंबल नदी की कोख में कितने जलीय जीव हैं। यह जानने के लिए देश के जाने-माने विशेषज्ञ चंबल की गहराई को खंगाल रहे हैं।  435 किलोमीटर लंबे चम्बल अभयारण्य में जलीय जीवों की गणना चरम पर है। 

ग्वालियर. हजारों फीट गहरी चंबल नदी की कोख में कितने जलीय जीव हैं। यह जानने के लिए देश के जाने-माने विशेषज्ञ चंबल की गहराई को खंगाल रहे हैं।  435 किलोमीटर लंबे चम्बल अभयारण्य में जलीय जीवों की गणना चरम पर है। राष्ट्रीय महत्व की इस गणना में तीन राज्यों मसलन मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश की नोडल एजेंसी और करीब आधा दर्जन जलीय जीवों के अध्ययन से जुड़े राष्ट्रीय संस्थानों के एक्सपर्ट शामिल हैं। केन्द्र सरकार ने इस कार्य में गोवा के कुल करीब बीस से अधिक एक्सपर्ट इन दिनों चम्बल में जलीय जीवों की पहचान कर रहे हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट को भी शामिल किया गया है। ९ फरवरी से चल रही गणना 18 फरवरी को खत्म हो जाएगी।

इन जलीय जीवों की हो रही गणना
गणना में खास तौर पर घडिय़ाल, मगरमच्छ, कछुआ, मछलियां और तमाम जलीय पक्षी पहचाने जा रहे है। गणना का ये कार्य हर साल होता है। चम्बल सेंचुरी के अधीक्षक एसके प्रजापति ने बताया कि ये काम चल रहा है। समूची रिपोर्ट आने के बाद ही इसमें कुछ बताया जा सकेगा। प्रजापति के मुताबिक इसमें सभी एक्सपर्ट बाहरी हैं।

चम्बल के पानी की गुणवत्ता असाधारण
स्थानीय और केन्द्रीय पोल्यूशन बोर्ड की रिपोर्ट बताती है कि चम्बल के पानी को बिना ट्रीटमेंट के भी पीया जा सकता है। बरसात में भी इसे साधरण क्लोरीनेशन करके इसे आसानी से पीया जा सकता है। लिहाजा केन्द्रीय जल आयोग ने चम्बल नदी को ए केटेगरी में शामिल कर लिया है। चम्बल नदी का पानी एकदम साफ, रंगहीन और पारदर्शी है। केवल बरसात में इन नदियों का पानी दो माह के लिए मटमैला हो जाता है।

चम्बल अभयारण्य की पहचान
साफ पानी में रहने वाली समूचे जलीय जीवों का ये नदी पालना रहा है। इसी नदी के पानी का कमाल है कि यहां घडि़याल, मगरमच्छ तकरीबन सभी प्रकार के कछुए और डाल्फिन मौजूद हैं। जिन्हें यहां बड़ी आसानी से देखा जा सकता है।

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