अपने परिवार की तलाश में 16 साल का लड़का, याद बस इतना की मां मुझे गोपाल बुलाती थी

Gaurav Sen

Publish: Apr, 21 2017 11:51:00 (IST)

Gwalior, Madhya Pradesh, India
 अपने परिवार की तलाश में 16 साल का लड़का, याद बस इतना की मां मुझे गोपाल बुलाती थी

याद रहा तो बस इतना कि मां बाप उसे गोपाल कहकर बुलाते थे और पिता का नाम शंकर था, जो किसी श्योपुर के सांई बाबा मंदिर पर काम किया करते थे।

ग्वालियर/श्योपुर।  स्टेशन पर जब वह अपने परिजनों से बिछड़ा तब वो अबोध बालक था। जिसमें इतनी समझ नहीं थी कि वह अपना सरनेम और गांव के साथ प्रदेश और देश का नाम याद रख सके। याद रहा तो बस इतना कि मां बाप उसे गोपाल कहकर बुलाते थे और पिता का नाम शंकर था, जो किसी श्योपुर के सांई बाबा मंदिर पर काम किया करते थे। छह से सोलह बरस का हुआ ये बालक अब अपने माता पिता को ढूंढ रहा है।



दिल्ली पुलिस के जरिए देश के दो से अधिक श्योपुर नाम के शहरों में  घूमकर अब मप्र के श्योपुर जिले में पहुंचा है और यहां पर बाल कल्याण समिति की देखरेख में चाइल्ड लाइन के पास रहकर यहां भी माता पिता के होने की स्थितियों का पता करने का प्रयास कर रहा है। मामले के अनुसार गुरुवार को दिल्ली पुलिस गोपाल नाम के 16 वर्षीय बालक को लेकर श्योपुर पहुंची और उसके छह बरस की आयु में किसी स्टेशन पर परिजनों से गुम हो जाने की बात बताई। बाल कल्याण समिति के सुपुर्द बालक को करते हुए उसके परिजनों की तलाश में सहयोग मांगा, बाल कल्याण समिति के द्वारा बालक को चाइल्ड लाइन टीम को सौंप दिया गया। जो अब बालक को अपने साथ रखकर उसके परिजनों की तलाश का प्रयास कर रही है।





चाइल्ड लाइन के विप्लव के बताए अनुसार बालक चार साल से दिल्ली के शेल्टर होम में रह रहा है, जहां पर इस बालक ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि वह स्टेशन पर परिजनों से बिछड़ा था। तब उसकी उम्र महज 6 साल के करीब होगी। जहां से वह किसी तरह हरियाणा पहुंच गया और वहां उसे एक परिवार ने रखा और उससे मवेशी चरवाए व उसने होटल पर भी काम किया। चार साल वहां रहने के बाद बालक किसी तरह भाग कर दिल्ली पहुंचा। जहां चाइल्ड लाइन टीम ने उसे दिल्ली में बाल कल्याण समिति के प्रस्तुत किया। जहां उसे बाल गृह रखते हुए पुलिस द्वारा उसके परिजनों की तलाश शुरु की गई।



बालक द्वारा उसके श्योपुर के होने की बात बताने पर दिल्ली पुलिस द्वारा उसके संबंध में श्योपुर नाम के कस्बे और शहरों में पता करना शुरू किया गया और गुरुवार को इसी क्रम में उसे लेकर यहां श्योपुर पहुंची है। छह बरसे से सोलह बरस का हुआ गोपाल अब अपने दिमांग पर काफी जोर डालकर याद करने का प्रयास भी करता है, मगर तमाम प्रयास के बाद भी उसे ऐसा कुछ याद नहीं आ पा रहा है। जिससे वह अपने परिजनों की तलाश कर सके।

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