रानी लक्ष्मीबाई पर ये कविता हुई सोशल मीडिया में वायरल, जानिए रानी से जुड़े फैक्ट्स

Gwalior, Madhya Pradesh, India
 रानी लक्ष्मीबाई पर ये कविता हुई सोशल मीडिया में वायरल, जानिए रानी से जुड़े फैक्ट्स

रानी लक्ष्मीबाई पर बलवीर सिंह करुण की कविता सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। कविता आपको भी काफी प्रभावित करेगी। कविता सुनने के लिए वीडियो देखें।

ग्वालियर। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई विश्व भर में सिर्फ महिलाओं की प्रेरणा स्त्रोत नहीं है, बल्कि  वीरता, साहस और शौर्य  का प्रतीक हैं। उन पर कई कविताएं लिखी गईं, जिसमें सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता काफी मश्हूर है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बहादुरी के चर्चे फिर भी आम होने लगे है।






ऐसा हुआ एक कविता के कारण, जिसका पाठ बलवीर सिंह करुण ने गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में किया। ये कविता सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। ऐसे में हम भी आपको उस कवि सम्मेलन की झलकी दिखा रहे हैं, जिससे आप भी रानी की बहादुरी की गाथा को सुनकर गौरान्वित हो सकें।





कविता को सुनने के लिए यहां क्लिक करें-



ये है वो कविता

बलवीर सिंह करुण
ओ घोड़े समर भवानी के लक्ष्मी बाई मर्दानी के 
तू चूक गया लिखते लिखते कुछ पन्ने अमर कहानी के
तू एक उछला हुमक भरता नाले के पार उतर जाता
घोड़े बस इतना कर जाता चाहे अपने पर मर जाता
क्या उस दिन तेरी काठी पर अस्वार सिर्फ महरानी थी
क्या अपना बेटा लिए पीठ पर केवल झांसी की रानी थी
घोड़े तू शायद भूल गया भावी इतिहास पीठ पर था
हे अश्व कााश समझा होता भारत का भाग्य पीठ पर था
साकार क्रांति सचमुच उस दिन तुझ पर कर रही सवारी थी
हे अश्व काश समझा होता वो घड़ी युगों पर भारी थी
तेरे थोड़े से साहस से भारत का भाग्य संवर जाता
हे घोड़े काश इतना कर जाता नाले के पार उतर जाता
हे अश्व काश उस दिन तूने चेतक को याद किया होता
नाले पर ठिठके पांवों में थोड़ा उन्माद भरा होता
चेतक भी यूं ही ठिठका था राणाा सरदार पीठ पर था
था लहूलुहान थका हारा मेवाडी ताज पीठ पर था
पर, नाले के पार कूदने तक चेतक ने सांस नहीं तोड़ी
और स्वामी का साथ नहीं छोड़ा मेवाडी आन नहीं तोडी
भूचाल चाल में भर चेता कर अपना नाम अमर जाता
घोड़े तू इतना कर जाता नाले के पार
जो होना था हो गया मगर वो कसक आजतक मन में है
तेरी उस झिझकन, ठिठकन की वो चुभन आज तक मन में है
हे नाले तू ही कुछ करता, निज पानी सोख लिया होता
और रानी को मार्ग दिया होता पल भर को रोक लिया होता
तो तुझको गंगा मान आज हम तेरा ही पूजन करते
तेरे जल के छीटे के लेकर अपने तन को पावन करते
तेरे उस एक फैसले से भावी का भाग्य बदल जाता। 


रानी की शहादत का गवाह है ये शहर
ग्वालियर का संबध रानी लक्ष्मीबाई से गहरा है। सिंधिया रियासत के पास झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की शहादत का गवाह है ये शहर। 18 जून को1858 को रानी लक्ष्मी बाई ग्वालियर में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ती हुई शहीद हुईं थी। कर्नल ह्यूरोज की गोली का शिकार बनी रानी ने अंतिम सांस यहीं ली। शहर फूलबाग इलाके में रानी की समाधि आज भी उस शहादत की याद दिलाती है।





बनारस के पास हुआ था रानी लक्ष्मीबाई का जन्म
रानी लक्ष्मीबाई का जन्म बनारस के पास एक गांव के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम मणिज़्निज़्का था। रानी को प्यार से लोग मनु कहते थे। मनु जब 4 साल की ही थी कि उनकी मां का निधन हो गया। उनकी शिक्षा और शस्त्र का ज्ञान उन्होंने यहीं से प्राप्त किया।

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