समरो-समरोचित विरचित...

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समरो-समरोचित विरचित...

सिंधिया कन्या विद्यालय में चल रहे श्रीमंत माधव राव सिंधिया धरोहर फेस्ट के दूसरे दिन विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें कुम्हार कामा में प्रतिभागियों ने मिट्टी से तुलसी चौरा, मोमबत्ती स्टैंड आदि बनाए।


ग्वालियर.सिंधिया कन्या विद्यालयमें चल रहे श्रीमंत माधव रावसिंधिया धरोहर फेस्ट के दूसरेदिन विभिन्न प्रतियोगिताओंका आयोजन किया गया, जिसमेंकुम्हार कामा में प्रतिभागियोंने मिट्टी से तुलसी चौरा,मोमबत्ती स्टैंड आदिबनाए। सौरा चित्रकारी में पार्टिसिपेंट्स ने सौरा जातिद्वारा दीवारों पर बनाई जानेवाली पेंटिंग को लकड़ी केबोर्ड पर प्रदर्शित किया।इसके बाद टसरपट्टा प्रतियोगितामें पार्टिसिपेंट्स ने सिल्कके कपड़ों पर ओडिशा की संस्कृतिको दिखाया। वहीं शाम को गीतगोविंदक्लासिकल भजन प्रतियोगितारखी गई । इस दौरान प्राचार्यानिशी मिश्रा, उपप्राचार्या नैना ढिल्लन,शामिनी अग्रवाल,संजीता लूथरा, अल्काभार्गव, मयंक मधुकरआदि मौजूद रहे।

क्लासिकलभजन की दी प्रस्तुति

शाम कोप्रतिभागियों के बीच गीतगोविंदक्लासिकल भजन का आयोजन कियागया। इसमें निर्णायक के रूपमें रंजना टोणपे, सुधाभौमिक व तपन चद्र रहे। प्रतियोगितामें एसकेवी की मुस्कान जैन,समरत कौर, मुस्कानकौशिक व श्रेयांशी तिवारी नेराधा का विरह गीत समरो-समरोचित विरचित... पेशकिया। इसके बाद एमजेडी सेहिमानकिनी मिश्रा व मनोरमापांडे ने राधा-कृष्णाके प्रेम भरे मतभेद को दिखाया।जिसके बोल थे पश्यति दिशि दिशिरहसि भवन्तम.., ऑलसेंट कॉलेज की नंदिनी बुद्धिराजाऔर वृंदा चतुर्वेदी ने चंदनचरचित नील कलेवर .., राजमाताकृष्णकृमारी की प्रियदर्शिनीभाटी, दिशा आदिद्वारा हरि रिह मुग्ध वधुनिकरे...एवं विद्या देवी जिंदलस्कूल ने साविरेह तनदिना...भजन प्रस्तुत किया।

किसी नेबनाया तुलसी चौरा तो किसी नेकोणार्क टेम्पल

कुम्हारकामा प्रतियोगिता में एमजेडीजयुपर की सृष्टि शर्मा नेकैंडल स्टैंड बनाया, जिसमेंश्रीगणेश और गजराज को दिखाया।राजमता कृष्णकुमारी की तवारिताचौहान व भाव्या गहलोत ने तुलसीचौरा बनाया। इसके एक ओर सूर्य,दूसरी ओर चांद, एकपौधा और स्वास्तिक का चिन्हबनाया। एसकेवी की प्रियांशीव मुस्कान जैन ने कोणार्कटेम्पल के आकार में तुलसी चौराबनाया। विद्या देवी जिंदलस्कूल की साक्षी अग्रवाल वअनुरिमा ने जगन्नाथ रथ के शेपमें तुलसी चौरा बनाया। इसकेबाद पार्टिसिपेंट्स ने सौराचित्र बनाया। जिसमें ओडिशाकी संस्कृत और कला को पेंटिंगके माध्यम से दिखाया।

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