हड़ताल ने डाली खतरे में नवजातों की जान, महंगा इलाज कराने को मजबूर परिजन

rishi jaiswal

Publish: Feb, 17 2017 02:11:00 (IST)

Gwalior, Madhya Pradesh, India
हड़ताल ने डाली खतरे में नवजातों की जान, महंगा इलाज कराने को मजबूर परिजन

विभिन्न मांगों को लेकर नेशनल हेल्थ मिशन के संविदा कर्मियों कीअनिश्चित कालीन हड़ताल ने नवजातों की जान खतरे में डाल दी है। दरअसल, बीते तीन दिन से हड़ताल के कारण जिला अस्पताल में एसएनसीयू में इलाज ठप पड़ा है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार नवजातों के परिजन न चाहते हुए भी निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। 

ग्वालियर. विभिन्न मांगों को लेकर नेशनल हेल्थ मिशन के संविदा कर्मियों कीअनिश्चित कालीन हड़ताल ने नवजातों की जान खतरे में डाल दी है। दरअसल, बीते तीन दिन से हड़ताल के कारण जिला अस्पताल में एसएनसीयू में इलाज ठप पड़ा है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार नवजातों के परिजन न चाहते हुए भी निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। वहीं कुछ नवजात आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित हो रहे हैं।

अस्पताल में नवजातों के इलाज के लिए 20 बेड की एसएनसीयू यूनिट है। एसएनसीयू में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ही 19 स्टाफ नर्स व दो डॉक्टर तैनात हैं। हड़ताल शुरू होने के बाद से यहां नवजातों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। इस कारण गंभीर बीमार बच्चों के परिजन को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराना पड़ रहा है।

यह है अप्रैजल
क्षेत्र के स्वास्थ्य केन्द्रों में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती होने के बाद वह केन्द्रों में अपने कार्य का निर्वहन करते हैं, लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा अप्रैजल प्रक्रिया बनाई गई है, जिसके तहत स्वास्थ्य केन्द्रों में पदस्थ्य संविदा कर्मचारियों की हर वर्ष लिखित परीक्षा, साक्षात्कार व स्किल टेस्ट जैसे कई मापदंड रखे जाएंगे, जिसमें उत्तीर्ण होने के लिए कर्मचारियों को 65 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे और जिस कर्मचारी के 65 प्रतिशत से कम अंक आएंगे तो उसे पद से निष्कासित कर दिया जाएगा।
- वार्ता विफल होने के बाद सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। जो कर्मचारी काम कर रहे हैं उन्हें खोजा जा रहा है। मांग पूरी न होने तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
 -धर्मवीर शुक्ला, जिला उपाध्यक्ष, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

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