ईसी बैठक के दौरान बीपी हाई होने से रजिस्ट्रार हुए पसीना-पसीना, यह है मामला

Gwalior, Madhya Pradesh, India
ईसी बैठक के दौरान बीपी हाई होने से रजिस्ट्रार हुए पसीना-पसीना, यह है मामला

जीवाजी यूनिवर्सिटी  (जेयू) में हुई कार्यपरिषद (ईसी) की बैठक में जमकर हुआ हंगामा। ईसी मेंबर्स से कुलसचिव बोले आप मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दो, मैं दूसरा दर्शन सिंह बनने के लिए तैयार हूं।

ग्वालियर। जीवाजी यूनिवर्सिटी  (जेयू) में मंगलवार को हुई कार्यपरिषद (ईसी) की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। स्थाई रजिस्ट्रार को लेकर जेयू कुलसचिव डॉ. आनंद मिश्रा व ईसी मेंबरों में तीखी बहस हुई। काफी देर तक अफसरों व ईसी मेंबरों में नोकझोंक चलती रही। इस दौरान कई एेसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जो अशोभनीय था। 

बहसबाजी के बीच  रजिस्ट्रार डॉ. मिश्रा ने ईसी मेंबरों से कहा कि आप मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दो, मैं दूसरा दर्शन सिंह बनने के लिए तैयार हूं। नोकझोंक के दौरान कई बार डॉ. मिश्रा का ब्लडप्रेशर हाई हो गया। वे पसीना-पसीना होते नजर आए। माहौल गरमाता देख कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने हस्तक्षेप कर कर किसी तरह मामले को शांत कराया। 



दरअसल, ईसी बैठक में जैसे ही स्थाई रजिस्ट्रार के मुद्दा उठा, वैसे ही कुलसचिव डॉ. आनंद मिश्रा ने हस्तक्षेप कर मामले को न उठाने की मांग की। उनका कहना था कि मामला अभी कोर्ट में चल रहा है, इसलिए इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की जा सकती। साथ ही मिश्रा ने उस लेटर का हवाला दिया, जिसमें राज्य शासन द्वारा इस मुददे पर चर्चा न करने की बात कहीं गई है। लेकिन ईसी मेंबर हुकूम सिंह यादव, आरपी सिंह, डीपी सिंह ने उनकी मांग को दरकिनार कर इस मुद्दे को बैठक में जोर-शोर से उठाया। उनका कहना था कि जेयू में स्थाई रजिस्ट्रार ही होना चाहिए।
 इसका समर्थन अन्य कई ईसी मेंबरों ने भी किया। सूत्रों की मानें तो जेयू में स्थाई रजिस्ट्रार का मुद्दा मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच चुका है। वहीं, अब ईसी मेंबर भी इस मुद्दे को लेकर लामबंद होते नजर आ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इस मामले को जल्द ही राजभवन तक पहुंचाया जाएगा, ताकि जेयू में स्थाई रजिस्ट्रार की नियुक्ति की जा सके।



नियमितीकरण के लिए बनाई कमेटी 
बैठक के प्रारंभ में ईसी मेम्बर आरपी सिंह ने कॉलेजों की संबद्धता के साथ निरीक्षण कमेटियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। जिनका जवाब डीसीडीसी प्रो.डीडी अग्रवाल ने दिया। बाद में उन्होंने दैनिक वेतन भोगियों के नियमितीकरण करने के लिए जेयू प्रबंधन पर दबाव डाला। 



उनका कहना था कि 2007 से पहले काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाना चाहिए। साथ ही वरिष्ठता सूची के आधार पर कर्मचारियों को नियमित किया जाए। उनका कहना था कि यह काम शासन का नहीं वरन जेयू प्रबंधन का है। इस मामले को लेकर कुलपति प्रो.शुक्ला ने कमेटी बना दी है,जो एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रबंधन को देगी।  



ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दे दिया 16 लाख का टेंडर 
जेयू में कार्यपरिषद (ईसी) की बैठक में टेंडरों में हुई गड़बडिय़ों पर ईसी मेम्बरों ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। वहीं वित्त विभाग को जमकर फटकार लगाई। इससे पूर्व ईसी मिनिट्स के बिन्दु क्रमांक पांच पर मप्र राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ मर्यादित भोपाल से 200 कुर्सी खरीदी गई, जिसके भुगतान 15,99,707 के लिए जैसे ही अनुमति लेने का सवाल आया, ईसी मेंबर सुनीता बराहदीया ने फर्म पर सवाल उठा दिए। 



उनका कहना था कि यह फर्म ब्लैक लिस्टेड हो चुकी है, फिर किस नियम के तहत इसका भुगतान किया जा रहा है। इस मामले का समर्थन ईसी मेंबर हुकुम सिंह यादव, आरपी सिंह और एड.डीपी सिंह ने किया। उन्होंने जब वित्त विभाग से दस्तावेज मांगे तो पता चला कि उसमें गोदरेज कंपनी को भुगतान किया जा रहा है। इस मामले पर करीब आधा घंटे बहस के बाद कंपनी का भुगतान रोकने का फैसला लेकर मामले की जांच के आदेश दिए गए। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की।

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