सरकारी अस्पतालों में हो रही अवैध वसूली, 'गलत काम' में चाहिए 'सही नोट'!

Kaushlendra Singh

Publish: Dec, 02 2016 01:21:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
 सरकारी अस्पतालों में हो रही अवैध वसूली, 'गलत काम' में चाहिए 'सही नोट'!

सरकारी अस्पताल ही लगा रहे सरकारी योजनाओं को पलीता, इन दिनों बढ़ गई है अवैध वसूली

राठ। सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिये सरकार द्वारा अनेक योजनायें संचालित की जा रही हैं। आना फ्री, जाना फ्री, उपचार के साथ ही खाना भी फ्री की तर्ज पर शासन द्वारा पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। जहां प्रसूता को उसके घर से लाने ले जाने के लिये निशुल्क एम्बूलेंस की व्यवस्था है वहीं निशुल्क प्रसव और दवाएं स्वास्थ्य केन्द्र से ही उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रसव के बाद प्रसूता को नाश्ता और भोजन देने के भी निर्देश शासन द्वारा सभी अस्पताल प्रशासन को हैं। इतना ही नहीं सुरक्षित प्रसव को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने वाली प्रसूताओं और उन्हें समझाकर अस्पताल लाने वाली आशाओं को सरकार द्वारा नगद प्रोत्साहन राशि देने की भी व्यवस्था है।

सरकारी अस्पतालों में होती है वसूली

शासन की इस मंशा पर स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की नर्सें और कर्मचारी पानी फेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। बताया जाता है कि सीएचसी में प्रसव के लिये आने वाली प्रसूताओं से सुविधा शुल्क के नाम पर खासी रकम वसूली जाती है। ऐसा ही एक मामला उस समय प्रकाश में आया जब प्रसव उपरान्त नर्स को देने के लिये पांच सौ रूपये के खुल्ले पैसे न होने पर एक प्रसूता के साथ आई उसकी जेठानी सीएचसी के बाहर रो पड़ी।

नर्स ने मांगे खुल्ले तीन सौ

नगर के मुहाल बजरिया निवासी पोखन पत्नी स्व. जयकरन ने बताया कि उसकी देवरानी कमलेश पत्नी स्व. जयराम को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया। जहां गुरूवार सुबह उसने एक पुत्री को जन्म दिया। बताया कि प्रसव के बाद अस्पताल में तैनात एक नर्स ने उससे तीन सौ रूपयों की मांग की। उसके पास केवल पांच सौ रूपये का एक ही नोट था जिसे लेने से इनकार कर दिया गया। बताया कि वह पांच सौ रूपये के खुल्ले कराने के लिये काफी भटकती रही किन्तु किसी ने पुराने नोट के बदले में खुल्ले रूपये नहीं दिये।

मीडिया के पहुंचते ही वापस किए पैसे


महिला वापस नर्स के पास पहुंची जिस पर नर्स ने उक्त पांच सौ का नोट रख लिया। किन्तु तभी वहां पर मीडिया कर्मियों के पहुंच जाने पर तुरन्त उसके पैसे वापस कर दिये गये। जब पीड़िता द्वारा मीडिया को आप बीती बताई गई तो नर्स ने अपने परिजनों के उच्च पद पर होने का रौब दिखाकर पीड़िता को दबाव में लेने की कोशिश की। मामले की जानकारी मिलने पर सीएचसी अधीक्षक डा. आरपी वर्मा अस्पताल पहुंचे तथा पीड़िता व नर्स के बयान दर्ज किये।

इन दिनों बढ़ गई है वसूली

ऐसा नहीं है कि प्रसव के नाम पर वसूली का यह कोई पहला मामला हो। बताया जाता है कि प्रसव कराने वाली स्टाफ नर्स प्रति प्रसूता 5 सौ से लेकर 1 हजार रूपये तक वसूलतीं हैं। अनेक बार तीमारदारों ने बवाल भी किये हैं किन्तु शायद इस वसूली के धन में सभी की संलिप्तता के चलते मामला दबा दिया जाता है। लोगों का आरोप है कि नवागंतुक अधीक्षक के चार्ज संभालने के बाद अवैध वसूली में कई गुना बढ़ोत्तरी हो गई है।

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