सावन माह का दूसरा सोमवार आज, कांवरियों के निकल रहे जत्थे 

Lucknow, Uttar Pradesh, India
 सावन माह का दूसरा सोमवार आज, कांवरियों के निकल रहे जत्थे 

विधि विधान से पूजन करने वालों को निश्चित मिलता है फल।

हरदोई। मान्यता है कि सावन माह में भगवान भोले नाथ की आराधना पूजा करना काफी शुभफलदायी होती है। भगवान भोलेनाथ की कृपा होते ही सारे काम बन जाते है। कहते है कि सावन में यदि कोई भक्त पूरे माह भूखों को भोजन कराता रहे तो उसे आजीवन कभी अन्न की कमी नहीं होगी।  भोले भंडारी अपने भक्तों को कभी भी निराश नहीं करते, वह हमेशा उनकी मनोकामना को पूरी करने में तत्पर रहते हैं। भगवान भोले नाथ का अभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में कांवरिए शिवालयों की ओर रविवार को रवाना हुए। गोला गोकरनाथ और सकाहा जाने के लिए आज बड़ी संख्या में कांवरिए जत्थे के रूप में शहर से निकले। सावन माह के दूसरा  सोमवार के अवसर पर 17 जुलाई को शिवालयों में खासी भीड़ रहेगी। 



आर्चाय अशोक मिश्रा शास्त्री  कहना है कि सावन मास भर यदि भगवान की कृपा पानी हो और अपने कष्टों का निवारण करना हो तो रोज सुबह जल्दी उठे, समीप के मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करें। काले तिल अर्पित करें। इसके बाद मंदिर में बैठकर कुछ देर ऊं नम शिवाय का जाप अवश्य करें। शास्त्री का कहना है कि यही नहीं कि यदि किसी के विवाह मेेंं को ई अड़चन आ रही  है तो इसको लेकर शिव पुराणों में बताए गए हैं जिनमें बताया गया कि भगवान की शिवलिंग पर पर केसर मिलाकर दूध चढ़ाएं। विवाह के योग जल्दी बनेगें। रोज किसी नदी या तालाब जाकर आटे की गोलियां मछलियों को खिलाए। धन की प्राप्ति के अवसर अवश्य प्राप्त होंगे। इसी क्रम में यदि सावन मास में रोज नंदी यानी बैल को हरा चारा खिलाए तो घर मेें सुख समृद्वि व वैभव आएगा। 

इसी क्रम में उनके द्वारा बताया गया कि पूरे सावन माह यदि रोज गरीबों को भोजन कराते रहे तो इससे आपके घर में कभी भी अन्न की कमी नहीं आएगी। प्रतिदिन २१ बेलपत्र पर चंदन से ऊं नम शिवाय लिखकर चढ़ाने वाले की मनोकामनाएं पूर्ण होना व उनके कष्टो का निवारण होना बताया जाता है।  उधर  सावन माह में भगवान शिव की एक झलक पाने के लिए जिले भर के शिव मंदिरों में श्रद्वालुओं का आना जाना लगा हुआ है। सोमवार के दिन तो सुबह से लेकर देर शाम श्रद्वालु कतार में लगे ही नजर आते हैं। जिले के सकाहा स्थित मंदिर, सुनासीरनाथ मंदिर, विश्रनाथ मंदिर, तुंरत नाथ मंदिर, शिव भोले मंदिर आदि जगहों पर भोले बाबा की एक झलक पाने के लिए लोगों की कतारें लगी नजर आती हैं। 


आस्था  का प्रतीक है सकाहा स्थित संकट हरण शिवालय

आस्था के प्रतीक संकट हरण शिवालय के बारे में कहा जाता है कि सच्चे मन से जिस भक्त ने बाबा के दरबार मे मत्था टेका और मन में ही अपने दुखों को बताते हुए मन्नत मांगी तो वह कभी मायूस नहीं लौटा। ऐसे तो पूरे बरस इनकी ख्याति रहती है लेकिन सावान मास में इनके दर्शन मात्र को जनपद से नहीं आस पास के जिलों के भक्तों का मेला सा लगा रहता है। कहना गलत न होगा कि आज भी भक्त अपने साथ दुखों का पहाड़ लेकर इनके दरबार पहुंचता है लेकिन वहां से बाबा का आर्शीवाद के साथ समस्याओं का निवारण लेकर ही लौटता है।

सैकड़ों साल पुराने मंदिर की भब्यता आज भी वहीं है। सावन भर यहां मेला लगता है।  जिला मुख्यालय से १८ किलोमीटर दूर हरदोई शाहजहांपुर मार्ग स्थित ग्राम सकाहा प्रसिद्व शिवालय की वजह से आस्था का प्रतीक बना हुआ है। भोले बाबा के दरबार में पहुंचने वाला कोई भी भक्त आज तक निराश नहीं हुआ। यही कारण है कि आस पास जिलों तक के भक्त यहां पर कांवर लेकर भोले बाबा की कृपा पाने को आते हैं। 


मंदिरों में जारी है बम बम भोले

हरदोई। श्रावण मास में रविवार के दिन भी जिले भर के मंदिरों में तो बम बम भोले की ही आवाजे सुनाई देती ही रही इसके अलावा शहर की सड़कों पर भी कांवरियों के बम बम भोले के गुणगान होता रहा। इधर कांवरियों के जत्थों का शहर से गुजरने का क्रम जारी रहा। शहर एवं शहर के बाहरी जिलों में भी भोले बाबा के मंदिरों में जाकर उनका अभिषेक करने के लिए गाते बजाते नंगे पैर कावंरियों के जत्थे शहर से होकर गुजरते रहे।   

आस्था का प्रतीक है बाबटमऊ स्थित शिवमंदिर 

हरदोई।  कन्नौज मार्गं स्थित ग्राम बाबटमऊ में भगवान शिव का मंदिर श्री सिद्धेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है । उन्होंने बताया कि यह मंदिर करीब ३०७ वर्ष पुराना है। तीन सौ सात वर्ष पुराने इस मंदिर का निर्माण सन १७०७ में कराई गई थी।  यहां श्रद्धा भक्ति भाव से भोलेनाथ की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती है। 

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