सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर लिखेंगे बस जेनरिक दवाएं, मिलेगा सस्ता इलाज

Shribabu Gupta

Publish: Apr, 21 2017 06:41:00 (IST)

Hazaribagh, Jharkhand, India
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर लिखेंगे बस जेनरिक दवाएं, मिलेगा सस्ता इलाज

राज्य सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर जेनरिक दवाएं ही लिखेंगे...

हजारीबाग। राज्य सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर जेनरिक दवाएं ही लिखेंगे। इससे इलाज करीब दस गुना सस्ता हो जाएगा। इस फैसले के बाद राज्य में रहने वाले रहवासियों को काफी हद तक आराम मिलेगा।

लेकिन समस्या ये है कि ये नियम पहले से ही है लेकिन कमीशन के चक्कर में डॉक्टर जेनरिक दवाएं नहीं लिखते। झारखंड का सबसे विकसित शहर होने के बावजूद जमशेदपुर में कहीं पर भी जेनरिक दवा केंद्र नहीं खोला गया है। और तो और इक्का-दुक्का को छोड़कर शहर के किसी भी मेडिकल स्टोर में जेनरिक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

शहर के सरकारी अस्पतालों में दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) बेधड़क घूम रहे हैं। चौंकाने वाली बात तो ये है कि ये एमआर ओपीडी के समय में भी डॉक्टरों के चैंबर में बैठे दिखाई देते हैं। ऐसे में भला जेनरिक दवाओं का प्रचलन कैसे शुरू हो सकता है?

एमआर द्वारा डॉक्टरों को मरीजों के लिए मंहगी दवाएं लिखने के लिए मोटा कमीशन व गिफ्ट का प्रलोभन दिया जाता है। ऐसे में डॉक्टरों द्वारा भी महंगी दवाएं लिखी जाती हैं। इसका कारण ये है कि दस गुना सस्ती जेनरिक दवाएं मरीजों तक नहीं पहुंचतीं।

एक दवा व्यापारी ने बताया कि सभी दवा कंपनियों को जेनरिक दवाएं भी बनानी पड़ती हैं। पर जेनरिक दवाओं का मूल्य काफी कम होने के कारण इन पर काफी कम मुनाफा प्राप्त होता है। इससे दुकानदार जेनरिक दवाओं का स्टॉक नहीं रखता।

सरकारी तौर पर जेनरिक दवा केन्द्र खोलने की घोषणा चार वर्ष पूर्व हुई थी। हेमंत सोरेन की सरकार के समय इस दिशा में कुछ पहल भी हुई थी। जिले में दो स्थानों पर जेनरिक दवा केंद्र खोले जाने थे। सदर अस्पताल और एमजीएम अस्पताल में जेनरिक दवा केन्द्र के लिए पहल हुई थी।

एमजीएम अस्पताल में तत्कालीन अधीक्षक स्वर्गीय डॉ. एसएस प्रसाद ने ओपीडी भवन में एक कमरा भी तैयार कराया। बोर्ड लगवाया। पर दवाओं के लिए राशि आवंटित नहीं हुई और योजना अधर में रह गई। समस्या ये है कि सामाजिक संगठन भी इस मुद्दे पर चुप हैं।

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