सरकार का मूल सिद्धांत "सबका साथ, सबका विकास" : राष्ट्रपति

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सरकार का मूल सिद्धांत

मुखर्जी ने अभिभाषण में गिनाई सरकार की तमाम योजनाएं, सांसदों को स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ने को कहा

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि सरकार का मूल सिद्धांत सभी का विकास करना है। ष्बजट सत्र की शुरूआत पर संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने स्मार्ट सिटी, कौशल विकास, व्यवसाय को सरल बनाने और मानव संसाधन का उचित इस्तेमाल करने सहित विभिन्न पहलें की हैं। उन्होंने कहा, सरकार का मूल सिद्धांत सबका साथ, सबका विकास है।


समावेशी विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकता
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सबका विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और यह रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कृतसंकल्प है। अत्यधिक गरीबों के साथ सभी का विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों के समयबद्ध भुगतान के लिए उनके लिए मौजूद छात्रवृत्ति योजना को सरल बना रही है।

प्रणब ने कहा कि सरकार रोजगार का सृजन करने और श्रम संबंधित नियामकों को लागू करने की दिशा में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


15 अगस्त से पहले हर स्कूल में शौचालय
मोदी सरकार इस वर्ष 15 अगस्त से पहले देश के हर सरकारी स्कूलों में शौचालयों का निर्माण करने के लिए कटिबद्ध है। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में यह बात कही। उन्होंने सभी सांसदों से सांसद निधि का कम से कम 50 प्रतिशत स्वच्छ भारत मीशन पर खर्च करने की अपील की।

उन्होंने बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने स्वच्छ विद्यालय कार्यक्रम शुरू किया है और वह 15 अगस्त से पहले हर स्कूल में शौचालय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।



बजट सत्र से पूर्व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने रविवार को विपक्ष से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री एम. वेंकैया नायडू ने इस सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। संसद का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। बजट सत्र के प्रस्तावित 44 विषयों की सरकारी कार्यसूची में वित्तीय, विधायी और गैर- विधायी विषय शामिल हैं।

नायडू ने सुबह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और बाद में दोपहर के भोजन पर विपक्षी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात की और संसद के सुचारू संचालन में सहयोग मांगा। सर्वदलीय बैठक में भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर विपक्षी पार्टियों ने अपनी चिंताएं जाहिर की। सरकार ने अब तक इसमें बदलाव की कोई बात नहीं की है, लेकिन संभव है इस पर पुनर्विचार किया जाए।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कुछ किसान प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक किसानों के प्रतिनिधियों ने कहा था कि सरकार ने बिना सलाह-मशविरा किए कई क दम उठाए हैं। प्रतिनिधियों ने कहा था कि अध्यादेश की जगह संसद में विधेयक पेश करने से पहले उनके विचारों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

नायडू ने सोनिया से कहा कि सभी राज्यों और घटकों से पर्याप्त विचार विमर्श करने के बाद अध्यादेश लाया गया था। इस बीच सर्वदलीय बैठक में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसदीय कार्यवाही संचालित करना सभी पार्टियों की जिम्मेदारी है। बैठक के बाद नायडू ने संवाददाताओं से कहा कि यह काफी सफल रही।

उन्होंने कहा, सभी पार्टियों ने संसद के सुचारू संचालन पर सहमति जताई। आम राय यही रही कि संसद का कामकाज सही रूप से चलना चाहिए। चूंकि यह संसद का बजट सत्र है, लिहाजा इस सत्र में वित्तीय मामलों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

नायडू ने कहा, छह में से चार या पांच अध्यादेशों पर व्यापक सहमति है, लेकिन विपक्षी पार्टियों ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर सवाल खड़े किए हैं। इस अध्यादेश पर उनकी विस्तृत चर्चा की मांग है। विपक्षी पार्टियां तमिल मछुआरों, गिरजाघरों पर हमले और पाकिस्तान द्वारा सीमा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा चाहती हैं।

कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस आम जनता को लाभ पहुंचाने वाले सभी विधेयकों और अध्यादेशों पर सरकार को सहयोग करेगी, लेकिन जनविरोधी विधेयकों व अध्यादेशों का हरगिज समर्थन नहीं किया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी सदन के सुचारू संचालन के लिए सदन में सभी पार्टियों के नेताओं की बैठक बुलाई है।

बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण 23 फरवरी से शुरू होकर 20 मार्च, 2015 तक चलेगा और दूसरा चरण 20 अप्रैल से शुरू होकर आठ मई, 2015 तक चलेगा। पहले चरण में 20 कार्यदिवस और दूसरे चरण में 13 कार्यदिवस होंगे। दोनों चरणों के बीच के उन दिनों में जब संसद की बैठक नहीं होगी, स्थायी समितियां विभिन्न विभागों और मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर विस्तृत जांच करेंगी।

संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के साथ बजट सत्र प्रारंभ होगा। वित्तीय कामकाज (11 विषयों) में 2015-16 के आम और रेल बजट को प्रस्तुत किया जाना और उन पर चर्चा, 2015-16 के रेल और आम बजट दोनों के लिए अनुदान मांगों पर चर्चा और मत विभाजन, 2014-15 के लिए पूरक अनुदान मांगों और यदि 2013-14 के लिए कोई अतिरिक्त मांग हो तो संबंधित विषय शामिल हैं।

26 फरवरी को रेल बजट, 27 फरवरी को आर्थिक सर्वेक्षण और 28 फरवरी, 2015 को आम बजट पेश किया जाएगा। विधायी कार्यसूची के तहत 10 नए विधेयक सदन में पेश किए जाने हैं। लोकसभा में लंबित तीन विधेयक पारित कराना है और राज्यसभा में सात विधेयक पारित कराना है।

लोकसभा में लंबित विधेयकों में शामिल हैं- वस्तु एवं सेवा कर लागू करने से संबंधित संविधान (122वां संशोधन) विधेयक 2014, लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक। लोकसभा द्वारा इन्हें पारित करने के बाद इन पर राज्यसभा द्वारा विचार किया जाना आवश्यक है।

राज्यसभा में लंबित चार विधेयक पहले ही लोकसभा ने पारित कर दिए हैं। ये हैं- कंपनी (संशोधन) विधेयक 2014, सार्वजनिक भवन (अनधिकृत रूप से रह रहे लोगों की बेदखली) संशोधन विधेयक 2014, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (संशोधन) विधेयक 2014। अन्य लंबित विधेयक हैं- भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) विधेयक 2013 और संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (संशोधन) विधेयक 2014।

पेश किए जाने वाले नए विधेयकों में शामिल हैं- राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भंडारण निगम, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन, मध्यस्थता और सुलह-सफाई, विनियोजन अधिनियमों के निरस्त क रने, जन्म और मृत्यु पंजीकरण, व्हिसल ब्लोअर संरक्षण, भारतीय प्रबंधन संस्थानों, राष्ट्रीय शैक्षणिक कोष और अनुसूचित जातियों की पहचान से संबंधित विधेयक।

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