पूछा बैंक खाते का एटीएम नंबर और चंद घंटों में लगा दी 50 हजार रुपए की चपत

Amit Billore

Publish: Jul, 17 2017 07:41:00 (IST)

Hoshangabad, Madhya Pradesh, India


पूछा बैंक खाते का एटीएम नंबर और चंद घंटों में लगा दी 50 हजार रुपए की चपत

साईबर क्राइम का एक और अपराध, पुलिस में की पीडि़त ने शिकायत

सोहागपुर।

मोबाइल पर काल कर बैंक खाते का एटीएम नंबर पूछकर हजारों रुपए की चपत लगाना नई बात नहीं बची है। यह क्राईम लोगों की जानकारी में है, इसके बाद भी जरा सी चूक के चलते घटनांए हो रही हैं। इसी प्रकार की घटना सोहागपुर में 12 जुलाई को हुई, जिसमें चंद घंटों में बैंक एटीएम कार्ड नंबर पूछकर एक नागरिक को 49 हजार 996 रुपए की चपत साईबर क्रिमिनल्स द्वारा लगाई गई है।

मामले में पीडि़त महेंद्र कुमार मीना पुत्र ओमकार प्रसाद मीना निवासी सरदार वार्ड रेलवे में कर्मचारी हैं। तथा उनका एसबीआई सोहागपुर में खाता है। 12 जुलाई 2017 को पौने 11 से सवा 11 के बीच उनके मोबाइन पर नंबर 9709447374 से कॉल आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को बैंक अधिकारी बताकर मीना से उनके एसबीआई खाते का एटीएम नंबर पूछा। एटीएम नंबर बताए जाने के बाद जब मीना उनकी पुत्री राजकुमारी ने बैंक डिटेल्स देखी तो समझ आया कि खाते से कुल 49 हजार 996 रुपए कुछ ही घंटों में निकाल लिए गए हैें।

जिसकी जानकारी मीना उनकी पुत्री द्वारा एसबीआई प्रबंधन को भी दी गई तथा एटीएम कार्ड लॉक करने का आग्रह किया गया। इसके बाद दूसरे दिन सोहागपुर थाने में धोखाधड़ी के चलते आवेदन देकर जांच धोखे से पैसे निकालने वालों को पकडऩे की मांग भी की गई है। मामले में एसबीआई प्रबंधन का कहना है कि इस प्रकार के कॉल कभी बैंक द्वारा नहीं किए जाते हैं कि एटीएम कार्ड बंद हो गया है या फिर लॉक हो गया है तो उसे ठीक करने के लिए खातेदार से उसका एटीएम का पिन नंबर पूछा जाए।

थोड़े श्रम से पकड़े जा सकते हैं

साईबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रकरण तत्काल साईबर सेल में टं्रासफर कर जिस मोबाइल सिम से फोन लगाकर उपभोक्ता से धोखाधड़ी की गई है, उसके मोबाइल की लोकेशन प्राप्त की जा सकती है। या जानकारी निकाली जा सकती है कि सिम किस डीलर से ली गई है। ताकि साईबर क्रिमिनल्स का रिकार्ड प्राप्त किया जा सके।

इसके अलावा यदि बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की गई है तो उसकी मुख्य ब्रांच का पता लगाया जा सकता है और स्वाईप मशीन से यदि घटना को अंजाम दिया गया हो तो उस मशीन का रजिट्रेशन नंबर प्राप्त कर आगे कार्रवाई की जा सकती है। बशर्ते के पीडि़त उपभोक्ता जांच के लिए अड़ा रहे और पुलिस भी गंभीरता से जांच आगे बढ़ाए।

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