EC ने 'साइकल' पर रिजर्व रखा फैसला, SP में सस्पेंस बरकरार

Lucknow, Uttar Pradesh, India
EC ने 'साइकल' पर रिजर्व रखा फैसला, SP में सस्पेंस बरकरार

चुनाव आयोग ने चार घंटे तक दोनों ही पक्षों का बात सुनने के बाद फैसला रिजर्व रखा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के नाम और चुनाव चिह्न ‘साइकल’ पर पार्टी के दोनों गुटों के दावों पर चुनाव आयोग ने शुक्रवार को सुनवाई पूरी कर ली और अपना फैसला सोमवार को सुनाएगा। अखिलेश गुट के वकील कपिल सिब्बल ने लगभग पांच घंटे तक चली सुनवाई के बाद यहां निर्वाचन सदन के बाहर संवाददाताओं को बताया कि सुनवाई पूरी हो गयी है और इस पर चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुरक्षा रख लिया है। आयोग सोमवार को अपना निर्णय देगा।

उन्होंने कहा कि दोनों गुटों ने आयोग को उसका फैसला स्वीकार करने का आश्वासन दिया है। उनके अनुसार सुनवाई के दौरान अखिलेश गुट ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के 90 प्रतिशत से अधिक सांसद, विधायक और पदाधिकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ हैं इसलिए पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह ‘साइकल’ उन्हें ही मिलना चाहिए।

अखिलेश गुट ने आयोग के पास 200 से अधिक विधायकों, सांसदों और विधान परिषद सदस्यों के हलफनामे सौंपे है। इसके अलावा पार्टी के विभिन्न स्तर के छह हजार से अधिक पदाधिकारियों के हलफनामे भी आयोग को दिए गए हैं। सुनवाई के बाद मुलायम गुट के एक वकील गौरी नेवलेकर ने कहा कि आयोग को उनकी ओर से बताया गया कि मुलायम सिंह यादव पार्टी के अध्यक्ष हैं और वही इसके सर्वोच्च नेता है। 

उनके अनुसार मुलायम सिंह यादव ने कहा कि जिस सम्मेलन में उन्हें अध्यक्ष पद से हटाया गया था, वह असंवैधानिक और गैर कानूनी था। इसलिए पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के असली हकदार वही है। मुलायम गुट के वकीलों का नेतृत्व मोहन पारासरण और हरिहरन कर रहे थे।

इस बीच वरिष्ठ समाजवादी नेता राजेंद्र चौधरी ने कहा, यूपी की जनता चाहती है कि अखिलेश दोबारा सीएम बनें। बता दें कि समाजवादी पार्टी के दोनों गुट ने खुद को असली समाजवादी पार्टी बताते हुए साइकल सिंबल पर अपना दावा ठोंका है। अखिलेश कैंप दोपहर 12 बजे के करीब चुनाव आयोग पहुंच गया। सूत्रों के मुताबिक, पहले नरम दिखा रहा मुलायम खेमा अब साइकल चिह्न पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है।

EC के पास क्या है ऑप्शन
चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जा चुका है। कम वक्त होने के कारण चुनाव चिह्न पर जल्द फैसला करना चुनाव आयोग की मजबूरी है। दोनों गुटों द्वारा अपने दावे पेश करने के बाद हो सकता है कि चुनाव आयोग कोई फैसला दे दे। लेकिन चुनाव आयोग के द्वारा आज ही फैसला दिया जाय, इस पर संदेह है। 

ऐसा भी संभव है कि दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह आवंटित हो जिस पर वह अभी चुनाव लड़ेंगे। चुनाव आयोग के सामने तीसरा विकल्प तब होगा अगर कोई गुट अपना दावा वापस ले लेता है। इस स्थिति में विवाद खत्म हो जाएगा और आयोग कुछ नहीं करेगा। अगर साइकल सिंबल पर दावा छोड़कर कोई गुट अपनी पार्टी बनाता है तब भी आयोग के लिए फैसला करना आसान होगा।

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