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चलती ठसाठस फिर भी घाटा

शहर में संचालित लो-फ्लोर बसों की कमाई पर ग्रहण लगा हुआ है।

अजमेर

Published: February 02, 2015 02:38:18 pm

अजमेर. शहर में संचालित लो-फ्लोर बसों की कमाई पर ग्रहण लगा हुआ है। बसों में बैठने की जगह नहीं मिलती लेकिन इसके बावजूद इनका संचालन रोडवेज के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसका मुख्य कारण लो-फ्लोर बसों का शहरी क्षेत्र में चैकिंग नहीं होना बताया जा रहा है। इसके चलते बस के चालक-परिचालक जमकर चांदी कूट रहे हैं।

हालांकि रोडवेज प्रशासन का दावा है कि लो-फ्लोर बसों की उड़नदस्ता चैकिंग करता है। जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत अजमेर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (एसीटीएसएल) सेवा के तहत 35 लो-फ्लोर बसें संचालित की जा रही हैं। रोडवेज के माध्यम से संचालित हो रही लो-फ्लोर बसों में यात्रीभार सौ फीसदी से अधिक रहता है।

बसों में यात्री मुख्यद्वार तक लटके रहते हंैं। इसके बावजूद सरकारी आंकड़ों में यह घाटे का सौदा साबित हो रही हैं। जानकारों की मानें तो इसका मुख्य कारण शहरी क्षेत्र में लो-फ्लोर बसों की चैकिंग नहीं होना है। हालांकि निगम के अधिकारी इस बात से इन्कार कर रहे हैं।

10. 70 करोड़ घाटे में

गौरतलब है कि बसों के संचालन से रोडवेज पर लगातार आर्थिक भार बढ़ने से अप्रेल 13 से दिसम्बर 14 तक इसकी घाटा राशि करीब 10 करोड़ 70 लाख पहुंच गई है। एक अप्रेल से लो फ्लोर बसों की कमान महापौर के पास होगी।

यहां नहीं होती है चैकिंग!

सूत्रों के अनुसार रोडवेज का उड़न दस्ता ग्रामीण क्षेत्रों में रोडवेज बसों की ही चैकिंग करता है, जबकि शहर में इनकी चैकिंग नहीं होती। किशनगढ़ से पुष्कर के बीच चलने वाली बसों की आरटीओ कार्यालय से लेकर रीजनल कॉलेज के बीच चैकिंग नहीं होती।

नसीराबाद से पुष्कर के बीच चलने वाली बसों की पॉलीटेक्निक से रीजनल कॉलेज चौराहा तक, श्रीनगर से पुष्कर के बीच चलने वाली बस की राजा साइकिल से रीजनल कॉलेज चौराहा एवं किशनगढ़ से मांगलियावास के बीच संचालित बसों की आरटीओ कार्यालय से जीसीए चौराहा आदि शहरी क्षेत्र के मुख्यमार्गो पर लो-फ्लोर बसों की चैकिंग नहीं होने की बात सामने आई है।

बसों में सवार कुछ यात्री निर्धारित किराये के बदले कम राशि देकर परिचालक से टिकट नहीं लेते। इससे यह राशि परिचालक की जेब में जाती है।

लाइट से चलता है इशारा

बसों की चैकिंग होने की स्थिति में लो-फ्लोर बसों के चालक सामने से आने वाली बसों को लाइट से इशारा देते हैं। इससे बसों में बिना टिकट यात्री होने की स्थिति में परिचालक उन्हें तुरंत टिकट उपलब्ध करा देते हैं। ऎसे में उड़नदस्ते को बस में सवार सभी सवारियों के पास टिकट मिलते हैं।

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