निगम के बकायादारों में १.४४ अरब के साथ आईडीए शीर्ष पर

Indore, Madhya Pradesh, India
निगम के बकायादारों में १.४४ अरब के साथ आईडीए शीर्ष पर

 अकेले इंदौर विकास प्राधिकरण पर ही  निगम का १.४४ अरब रुपया बकाया है। 


नितेश पाल @ इंदौर। शहर के निजी संपत्ति मालिकों और संस्थानों से संपत्तिकर वसूली की मुहिम में जुटा नगर निगम बड़े सरकारी बकाएदारों से वसूली की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। हाल में निगम ने बड़े अस्पतालों, बिल्डिंगों की नपती कर संपत्तिकर चोरी पकडऩे के साथ पेनल्टी सहित वसूली की है। बकाया नहीं चुकाने वाले कई लोगों के मकान, दुकान व फ्लैट सील किए हैं। वहीं सरकारी विभागों की भारी-भरकम संपत्ति से कर वसूलने के नाम पर वसूली टीम रास्ता भटक रही है। अकेले इंदौर विकास प्राधिकरण पर ही  निगम का १.४४ अरब रुपया बकाया है। सरकारी विभागों पर ही लगभग १.५७ अरब बकाया है। इनसे वसूली के नाम पर पत्र लिखकर ही राशि जमा करने की गुहार लगाई जा रही है।

निगम में जिन सरकारी विभागों के संपत्तिकर के खाते हैं, उनमें केवल बिजली कंपनी ही एकमात्र ऐसा विभाग है जो पूरा पैसा चुका रहा है। बिजली कंपनी के पूरे शहर में ९९ संपत्तियों के खाते हैं।


आधा कर, फिर भी नहीं देते
राज्य सरकार के नियमानुसार सभी सरकारी विभागों को संपत्तिकर में छूट मिलती है। आम आदमी से नगर निगम संपत्तिकर के साथ छह अन्य टैक्स शिक्षा उपकर, जल अभिकर, जलमल निकास कर, नगरीय विकास उपकर, समेकित कर, सेवा शुल्क वसूलता है। सरकारी विभागों से संपत्तिकर नहीं लिया जाता है, शेष छह टैक्स देना होते हैं, जो कि कुल कर का आधा ही होते हैं।

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बजट में प्रावधान नहीं करते
बकाया संपत्तिकर सरकारी विभाग हर बार यह कहकर टाल देता हैं कि बजट में प्रावधान नहीं है। आप लिखित में दीजिए, प्रावधान करवाकर चुकाने की कोशिश करेंगे। पुलिस भी बड़े बकाएदारों में है। पुलिस के निगम में १०० से ज्यादा खाते हैं, जिनमें १ करोड़ से ज्यादा का बकाया  है। अफसर दबी जुबान से मानते है कि निगम की कार्रवाई में पुलिस का सहयोग लगता है, ऐसे में पुलिस को फिलहाल छोड़ा जा रहा है।


खत्म हो सकता है बकाया
दिलचस्प यह है कि जो बिजली कंपनी निगम को बराबर संपत्तिकर चुका रही है, उसी का निगम पर फिलहाल २५० करोड़ का बिल बकाया है। इस पर हर माह सरचार्ज जुड़ता जा रहा है। यदि इन बकाएदार सरकारी विभागों से राशि वसूल कर ली जाए तो निगम इस बकाया का बड़ा हिस्सा चुकता कर सकता है। वहीं शहर में चल रहे विकास कामों को करने वाले ठेकेदारों का ही  १२० करोड़ से ज्यादा का बकाया है। 

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