सावन में हरी चूडिय़ां पहनने से होगा भाग्योदय, सलामत रहेगा सुहाग 

Indore, Madhya Pradesh, India
सावन में हरी चूडिय़ां पहनने से होगा भाग्योदय, सलामत रहेगा सुहाग 

सौभाग्यशाली स्त्रियोंं के लिए भी ये रंग शुभ माना गया है। हरी चूडिय़ां कलाई पर हो तो हाथ सुंदर तो लगते ही है साथ ही भाग्योदय भी होता है।  

इंदौर. सावन का महीना आते ही आपने महिलाओं को चूडियां पहनते देखा होगा। दरअसल, इसका धार्मिक महत्व है। इस महीने में हरा रंग उपयोग करने और पहनने से भाग्य प्रभावित होता है। हरियाली के इस महीने में प्रकृति का सौंदर्य चरम पर होता है । सौभाग्यशाली स्त्रियोंं के लिए भी ये रंग शुभ माना गया है। हरी चूडिय़ां कलाई पर हो तो हाथ सुंदर तो लगते ही है साथ ही भाग्योदय भी होता है।  


क्यों पहनते हैं हरा रंग
हरा रंग सौभाग्य का रंग होता है। सावन आते ही हर तरफ हरियाली आ जाती है। यह पूरा महीना प्रकृति से खुद को जोडऩे का खास महीना होता है। इसलिए शिव पर जल अर्पित कर भी हम खुद को प्रकृति से जोड़ते हैं। इसी तरह इस महीने हरा रंग पहनकर भक्तजन खुद को प्रकृति से जोड़ते हैं, जिसका असर उनके भाग्य पर भी होता है।


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सुहाग की सलामती
शास्त्रों में भी प्रकृति को ईश्वर का रूप माना गया है और इसलिए उसकी पूजा भी की जाती है। इस पूरे महीने हरा पहनने वाले लोगों पर प्रकृति की विशेष कृपा होती है। महिलाएं हरे रंग की चूडिय़ां और सुहाग की चीजें पहनकर प्रकृति से खुद को जोड़ती हैं और इस तरह उनके सुहाग की सलामती का उन्हें आर्शीवाद मिलता है।

करियर और संपन्नता
हरा रंग बुध ग्रह का प्रतीक होता है। बुध ग्रह करियर और व्यापार से जुड़ा हुआ है। ऐसे में हरा रंग पहनने से बुध प्रसन्न होते हैं और सुहागिनों के घर में संपन्नता और धन-धान्य बढ़ाते हैं। 

सावन का महीना आते ही आपने महिलाओं को चूडियां पहनते देखा होगा। दरअसल, इसका धार्मिक महत्व है। इस महीने में हरा रंग उपयोग करने और पहनने से भाग्य प्रभावित होता है।


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सावन के चार मंगलवार भी है खास
सावन  के महीने में सोमवार की तरह मंगलवार का भी बहुत महत्व है। इस दिन भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की पूजा बहुत ही शुभ मानी गई है।इस बार सावन में चार मंगलवार है। मंगलवार को गौरी की पूजा होने के कारण इसे मंगला गौरी व्रत कहते है।सुहागनों के लिए ये व्रत बहुत ही शुभ माना गया है। 

शास्त्रों में इस व्रत के नियम बताते हुए कहा गया है कि विवाह के बाद पहले श्रावण मास में पीहर में रहकर तथा अन्य चार वर्षों में पति के घर में रहकर ये व्रत किया जाता है। मंगल गौरी की पूजा में सौलह प्रकार के फूल,सोलह वृक्षों के पत्ते, सोलह दुर्वा,सोलह पत्ते धतूरे के, सोलह प्रकार के अनाज, सोलह पानपत्ते, सोलह सुपारी, इलायची सहित चढ़ाए। परिवार की सबसे वृद्ध महिला जो सुहागन हो उनके चरण स्पर्श कर सोलह लड्डूओं का बयाना दें। 

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