शहर में होगा दक्षिण एशियाई देशों का सम्मेलन, 7 देशों के संसद तैयार करेंगे रणनीति

Shruti Agrawal

Publish: Feb, 16 2017 05:46:00 (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India
शहर में होगा दक्षिण एशियाई देशों का सम्मेलन, 7 देशों के संसद तैयार करेंगे रणनीति

शहर में आगामी दो दिन 18-19 फरवरी को दक्षिण एशियाई देशों के स्पीकर्स का शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इसमें शामिल होने के लिए 7 देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारी इंदौर आ रहे हैं। 


इंदौर.शहर में आगामी दो दिन 18-19 फरवरी को दक्षिण एशियाई देशों के स्पीकर्स का शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इसमें शामिल होने के लिए 7 देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारी इंदौर आ रहे हैं। सम्मेलन में सतत विकास लक्ष्य प्राप्ति के लिए दक्षिण एशियाई देशों के बीच आपसी सहयोग की रणनीति तैयार की जाएगी। इस बाद सभी देशों के स्पीकर्स क्लाईमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने के उपायों और महिला-पुरूष समानता जैसे अहम विषय पर चर्चा करेंगे और इंदौर घोषणा पत्र तैयार करेंगे। सम्मेलन से पाकिस्तान ने अपने आप को अलग रखा है। जबकि म्यानमान के अध्यक्ष बजट सत्र होने के कारण शामिल नहीं हो रहा है।

यह जानकारी लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन होटल रेडीसन में होगा। शुभारंभ सत्र में अंतरसंसदीय संघ के अध्यक्ष साबेर चौधरी मौजूद रहेंगे। सम्मेलन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, देश की नीति निर्धारण में संसद की बड़ी भूमिका होती है। सभी देश की संसद के पीठासीन अधिकारियों का दायित्व होता है, सांसदों के समक्ष अच्छी बहस के विषय प्रस्तुत करें। इसी को देखते हुए सतत विकास लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संसद सदस्यों के साथ सहयोग के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने सतत विकास लक्ष्यों को स्वीकार किया था। इसके तहत वर्ष-2030 तक 17 लक्ष्य तय करके इन पर कार्य करने का निर्णय लिया था। 

अध्यक्ष महाजन ने बताया, इस संबंध में बड़े स्तर पर तो कार्य चल ही रहा है। दक्षिण एशिया के देशों की ओर से सोचा गया, इन कार्यों के लिए संसद देश में क्या सहयोग कर सकता है, इस पर आपसी सहयोग किस तरह से किया जा सकता है, इन पर विचार करना चाहिए। पहला सम्मेलन ढाका में आयोजित किया गया था। इस बार की मेजबानी देश को मिली है। उन्होंने बताया कि, प्रधानमंत्री की मंशा के अनुसार यह आयोजन दिल्ली में नहीं कराते हुए प्रदेश स्तर पर किया जा रहा है। इसका एक ही उदेश्य है, दूसरे देश के प्रमुख राजनेता अपने देश की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू हो सकें। दो दिवसीय सम्मेलन के बाद तीसरे दिन सभी को शहर के लालबाग और एतिहासिक स्थल मांडू की सैर कराएंगे। उनके सम्मान में आयोजित किए जा रहे भोज के साथ उन्हें आदिवासी, मालवी व निमाड़ी लोक कला से भी रूबरू कराया जाएगा।

50 से अधिक डेलीगेट्स आएंगे
इस सम्मेलन में भारत की लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा से पीजे कुरियन, अफगानिस्तान से अब्दुल रउफ इब्राहिमी, बांग्लादेश से शिरिन शार्मिन चौधरी, भूटान से जिगमें जांगपो, शेयरिंग दौरजी, मालद्वीप से अब्दुल्ला मसीह मोहम्मद, श्रीलंका से कारू जयसूर्या व नेपाल के सदनों के अध्यक्ष व प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान के दोनों सदनों के प्रतिनिधि को बुलाया गया था, लेकिन उसने शामिल होने से इंकार कर दिया।

इस संबंध में कुछ नहीं कहना
लोकसभा अध्यक्ष से जब पाकिस्तान के नहीं आने के सबंध में पूछा गया तो, अध्यक्ष महाजन ने बताया, पाकिस्तान को आमंत्रित किया गया था। पहले भी अनके स्थानों पर वहां से प्रतिनिधि हिस्सा लेने आए हैं। भारत में क्यों नहीं आ रहे हैं? इस संबंध में कोई कारण नहीं बताया गया है। यह उनका अपना निर्णय है। इस पर मेरा बोलना उचित नहीं होगा।

इन विषयों पर होगी चर्चा

- सम्मेलन में दक्षिण एशिया में सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन के लिए संसाधनों को चिन्हिंत करने के लिए संसदीय सहयोग के अवसर।
- सतत विकास लक्ष्यों के महत्वपूर्ण कारक महिला-पुरूष समानता।

- जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती के साथ प्रभावी तरीकें से निपटने के लिए क्षेत्रीय व संसदीय सहयोग की संभावनाएं।

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