महिला प्रोफेसर ने सुसाइड नोट में लिखा - सहन नहीं होता दर्द, इसलिए दे रही हूं जान

Narendra Hazare

Publish: Oct, 19 2016 11:22:00 (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India
महिला प्रोफेसर ने सुसाइड नोट में लिखा - सहन नहीं होता दर्द, इसलिए दे रही हूं जान

सहन नहीं होता दर्द "मैं चार साल से माइग्रेन के चलते काफी दर्द सहन कर रही हूं। अब दर्द सहन नहीं होता है। मैं अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रही हूं। इसके लिए परिवार के किसी भी व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं माना जाए."


इंदौर. माइग्रेन का दर्द को असहनीय बताते हुए एक शहर में एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने आत्महत्या कर ली। मामला कनाडिय़ा में रहने वाली देवी अहिल्ला विश्वविद्यायल के फार्मेसी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुपमा पराते का है।

कनाडिय़ा इलाके की संघवी पैराडाइज कॉलोनी में डॉ.अनुपमा (35) पिता आकांक्ष पराते ने बुधवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दोपहर दो बजे जब नौकरानी सुंदरबाई काम करने के लिए घर आई तो अनुपमा को फांसी पर लटका देखा। नौकरानी ने आसपास के लोगों को इस बारे में बताया। पड़ोसियों ने महिला के पति आकांक्ष को घटना की जानकारी दी। वो आयशर कंपनी में कार्यरत है। आकांश के परिवार के लोग अलग रहते है। महिला की बेटी व बेटा घटना के समय स्कूल गए हुए थे। कनाडिय़ा पुलिस ने महिला को एमवाय अस्पताल भिजवाया। वहां महिला का पोस्टमॉर्टम हुआ। कनाडिय़ा पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त किया है। परिवार के लोगों के बयान नहीं हो पाए है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की है।


होनहार प्रोफेसर
अनुपमा, देवी अहिल्ला विश्वविधायल के स्कूल ऑफ फार्मेसी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में जुलाई 2009 से काम कर रही थी। इसके पहले वो एसजीएसआईटीएस कॉलेज इंदौर, वीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी भोपाल में लेक्चरर रह चुकी है। करीब तीन साल तक वो यूजीसी में भी सीनियर रिसर्च फैलो के रूप में काम कर चुकी हंै। अनुपमा काफी होनहार थी। अनुपमा काफी हंसमुख स्वभाव की थी। विभाग में परीक्षा व अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वो ही संभालती थी। अनुपमा ने 1999 में राजीव गांधी तकनीकी विश्वविद्यालय भोपाल से मास्टर ऑफ फार्मेसी किया था, जिसमें वो गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी है। इतना ही नहीं वर्ष 2007 में उन्हें कनाड़ा में कामनवेल्थ फैलोशिप अवॉर्ड भी मिल चुका है। अनुपमा कई एसोसिएशन से भी जुड़ी हुई थीं।

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