माता-पिता साथ थे और दोस्तों के सहारे से मारी बाजी, पीएससी में हुए सिलेक्ट

Narendra Hazare

Publish: Nov, 29 2016 03:02:00 (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India
माता-पिता साथ थे और दोस्तों के सहारे से मारी बाजी, पीएससी में हुए सिलेक्ट

एमपी पीएससी के रिजल्ट में चयनित इंदौर के छात्रों ने सुनाई अपनी सफलता की कहानी।

(शिशिर के साथ आशुतोष (काले कोट में))

इंदौर। एमपी पीएससी के रविवार को जारी राज्य सेवा परीक्षा 2014 के परिणाम में इंदौर के छात्रों ने भी बाजी मारी। आमतौर पर छात्र मां-पिता, शिक्षक को सफलता का श्रेय देते हैं, लेकिन इस बार बाजी मारने वाले स्थानीय छात्रों ने सफलता में दोस्तों को भी शामिल किया है।

दोस्त की मेहनत ने दिलाई सफलता

आशुतोष द्विवेदी ने बताया, 'शहडोल से 6 साल पहले इंदौर में इंजीनियर बनने आया था। यहां पढ़ाई के दौरान विष्णुपुरी के होस्टल में कमरा लेकर रहने लगा। चार साल इंजीनिरिंग की पढ़ाई के बाद पीएससी की तैयारी की। रविवार को रिजल्ट आने पर डीएसपी पद के लिए 12वीं रैंक बनने की जितनी खुशी मुझे है, उससे ज्यादा दोस्त शिशिर कुमार निगम को है। मेरी सफलता के माता-पिता और शिक्षकों के आशीर्वाद के साथ शिशिर का त्याग भी है। शिशिर मेरी पढ़ाई के लिए रूम से बाहर निकल जाता था। मेरा खाना, छोटे-मोटे काम, कमरे की साफ-सफाई वह खुद करता और मुझे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देने का कहता था।'

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(मां इंदिरा के साथ अक्षय।)

छोटी उम्र में ही देख लिया था बड़े पद का ख्वाब

सुदामानगर निवासी अक्षय सिंह मरकाम (डीएसपी-9वीं रैंक) ने कहा, 'बहुत कम उम्र में प्रशासनिक पद पाने का बड़ा ख्वाब देख लिया था। सपने को पूरा करने के लिए मां इंदिरा से प्रेरणा मिली। वे आरटीओ में पदस्थ हैं। 7 साल पहले पिता के देहांत के बाद उन्होंने मुझे पढ़ाया। मैंने 20 साल की उम्र में पीएससी का फॉर्म भरा था। फिलहाल मैं 22 साल का हूं। इसी वजह से मेरा सिलेक्शन डिप्टी कलेक्टर के लिए नहीं हो पाया, क्योंकि इस पोस्ट के लिए फॉर्म भरने के दौरान उम्र कम से कम 22 साल होना जरूरी है। पढ़ाई के दौरान दोस्त भी पूरा सहयोग देते थे। यहां तक कि खाने-पीने का इंतजाम भी वे ही करते थे।'

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