पीएससी 2015 से प्रदेश को मिले 410 नए अफसर

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पीएससी 2015 से प्रदेश को मिले 410 नए अफसर

2012 की परीक्षा में आबकारी अधिकारी चुनी गई अंकिता बनी टॉपर, आबकारी अधिकारी की ट्रेनिंग के दौरान ही पूरा हुआ डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना

 इंदौर. मप्र लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2015 के परिणामों के साथ चयन सूची भी जारी कर दी गई है। इसमें पुलिस, आबकारी, प्रशासन, वित्त, सहकारी विभाग सहित कई विभागों में 410 अफसरों के नाम फायनल हो गए हैं। जल्द ही इनकी ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी। इस परीक्षा में 1066 अंक के साथ अंकिता ने टॉप किया है। अंकिता को पीएससी 2012 व 2013 में भी सफलता मिली है।

राज्य सेवा परीक्षा 2015 के जरिए 19 डिप्टी कलेक्टर, 50 डीएसपी, 128 कोषालय अधिकारी/लेखाधिकारी, 2 जिला आबकारी अधिकारी, 2 जिला पंजीयक, 6 स्थानीय निधि संपरीक्षा के सहायक संचालक, 13 सहायक आयुक्त, 2 जिला जेल अधीक्षक, 1 जिला संयोजक, 9 सहायक संचालक, 1 रोजगार अधिकारी, 5 जिला सेनानी होमगार्ड, 12 मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत), 1 क्षेत्र संयोजक, 19 बाल विकास परियोजना अधिकारी, 23 आबकारी उपनिरीक्षक, 16 मुख्य नगर पालिका अधिकारी, 43 नायब तहसीलदार, 40 वाणिज्यिककर निरीक्षक, 18 सहकारिता निरीक्षक के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया की गई है। पीएससी ने अंतिम नतीजों के साथ चयन सूची भी जारी कर दी है। 2 अभ्यर्थियों के परिणाम कोर्ट प्रकरण के कारण रोके है। चयन सूची में शामिल अभ्यर्थी में से कई पहले भी पीएससी में सफलता हासिल कर चुके हैं।

भाई की एनर्जी ने किया प्रेरित

psc 2015 selected

2015 की टॉपर अंकिता 2012 से पीएससी की परीक्षा दे रही हैं। पहली बार में वे जिला आबकारी अधिकारी के लिए चुनी गई, जबकि 2013 में उन्हें ट्रेजरी ऑफिसर बनने का मौका मिला। अंकिता के पापा भारत भूषण त्रिपाठी स्टेट माइनिंग डिपार्टमेंट में डीजीएम है। एसजीएसआईटीएस से कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन करने वाली अंकिता ने बताया, कॉलेज में एडमिशन लेने के बाद मैंने सिविल सर्विसेस को लक्ष्य बना लिया था। इस कारण मैंने कैंपस प्लेसमेंट में हिस्सा नहीं लिया। पांच साल की मेहनत के बाद आत्मविश्वास बढ़ा, मगर इस बार छोटे भाई ललित नारायण त्रिपाठी की एनर्जी ने मुझे ज्यादा प्रेरित किया। ललित और मैं पूरे समय साथ मिलकर पढ़ाई करते थे। पहले अटैम्प्ट में ललित भी नायब तहसीलदार चुना गया है। अभी मैं आबकारी अधिकारी की ट्रेनिंग में जुटी हूं।

सरकारी स्कूल से पढ़कर पाई मंजिल
किसान परिवार के त्रिलोचन गौर ने 2015 की मुख्य परीक्षा में सबसे ज्यादा 959 अंक हासिल किए। मेरिट में दूसरे स्थान पर रहने के साथ वे डिप्टी कलेक्टर चुने गए हैं। त्रिलोचन अभी नायब तहसीलदार के पद पर राघवगढ़ में सेवा दे रहे हैं। त्रिलोचन ने बताया, एनआईटी इलाहाबाद से डिग्री करने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज में जॉब की। मगर सिविल सॢवसेस से लगाव होने के कारण इसकी तैयारी में जुट गया। 2012 में मैं नायब तहसीलदार, 2013 में महिला सशक्तिकरण अधिकारी, 2014 में डीएसपी चुना गया। मैंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। हिंदी माध्यम से होने को मैंने खुद की ताकत माना।

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मेरिट में आरक्षण पर असंतोष
इंदौर. राज्य सेवा परीक्षा की चयन सूची के साथ कई अभ्यर्थी मेरिट में आरक्षण पर असंतोष जता रहे हैं। पीएससी ने अच्छे अंक पाने वाली महिला अभ्यर्थियों को भी सामान्य के बजाय महिला कोटे से चुना है। अभ्यर्थियों का कहना है, जो उम्मीदवार आरक्षण के बगैर मेरिट से चयन होने की पात्रता रख रहे हैं उन्हें सामान्य श्रेणी से ही शामिल किया जाना चाहिए था। पीएससी सचिव रेणु पंत ने गड़बड़ी की आशंका से इनकार किया है। पीएससी चेयरमैन डॉ. बिपिन ब्यौहार ने कहा, रिजल्ट नियमानुसार ही तैयार किए हैं।

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एक अन्य टॉपर का इंटरव्यू

विशा माधवानी पीएससी 2012 में जिला संयोजक, 2013 में महिला सशक्तिकरण अधिकारी व 2014 में जिला पंजीयक चुनी जा चुकी है। वे उज्जैन में जिला संयोजक के पद पर पदस्थ है। विशा ने बताया, कई साल की लगातार मेहनत के कारण मुझे यह सफलता मिली है।

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