महिला कमांडो के शरीर पर एक बार में तोड़ी 8 ट्यूबलाइट

Indore, Madhya Pradesh, India
महिला कमांडो के शरीर पर एक बार में तोड़ी 8 ट्यूबलाइट

 ट्रेनिंग के दौरान एक महिला ने अपने शरीर पर एक नहीं आठ ट्यूबलाइट एक साथ फोड़ दी गईं। फिर भी महिला हिली तक नहीं।

इंदौर. महिलाएं सिर्फ सुंदरता के लिए ही नहीं जानी जाती बल्कि महिला सशक्तिकरण के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। ऐसे ही एक उदाहरण है महिला कॉन्स्टेबल की ट्रेनिंग के दौरान एक महिला की का है। ट्रेनिंग के दौरान एक महिला ने अपने शरीर पर एक नहीं आठ ट्यूबलाइट एक साथ फोड़ दी गईं। फिर भी महिला हिली तक नहीं। यही नहीं पेट पर रखकर पत्थर तोड़े गए और रस्सी के सहारे दीवारों पर चढ़वाया गया। असल में यह सब किसी आर्मी ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं बल्कि बल्कि महिला कॉन्स्टेबल की ट्रेनिंग का है।
- 600 महिलाओं को इंदौर के पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में कड़ी से कड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रदेश में पहली बार विमन कॉन्स्टेबल कमांडों टे्रनिंग हो रही है।
- वन मिनट ड्रिल ट्रेनिंग कमांडो ट्रेनिंग का हिस्सा है, महिलाओं को यहां खासकर इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- बिना देखे आंख पर पट्टी बांध एक मिनट में ये लड़कियां एसएलआर और इन्सास जैसे वेपंस इन्स्टॉल करती हैं। बिना देखे हाथों से महसूस करके अलग अलग तरह की बुलेट्स की पहचान करती हैं, अपने महबूत हाथों से ईंटें तोड़ती हैं, रस्सी के सहारे दीवारों पर चढ़ती उतरती हैं।
मुश्किल में ये भी काम करें
एसपी (पीटीसी) मनीषा पाठक सोनी के अनुसार अब तक वुमन कॉन्सटेबल को फॉर्मल ट्रेनिंग ही करना होती थी। क्योंकि उन्हें गेट, क्वॉर्टर और नाइट गार्ड ड्यूटी नहीं करवाई जाती थी। टफ वर्क होने की वजह से यह सिक्योरिटी वर्क पुरुष के लिए ही रहा है। किसी भी पुलिस कार्यालय, थाने या संस्थान पर यह ड्यूटी करने वाले संतरी होते हैं। लेकिन अब विमन कॉन्सटेबल को भी मजबूत बना रहे हैं। ताकि वे पत्थरबाजी, भीड़ और टेंशन की स्थिति कंट्रोल कर सकें। वह भी ख़ुद को सुरक्षित रखते हुए।
इसलिए जरूरत पड़ी ट्रेनिंग की
भोपाल में सिमी टेररिस्ट के जेल तोड़कर निकल जाने के बाद महिला प्रहरियों को भी ट्रेनिंग की जरूरत महसूस हुई। पीटीसी में 400 नई भर्तियों को 2 महीने की ट्रेनिंग दी गई।

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