जियो अन्य कंपनियों के लिए विध्वंसक साबित होगा : जेफरीज

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जियो अन्य कंपनियों के लिए विध्वंसक साबित होगा : जेफरीज

पिछले सप्ताह जियो ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुफ्त सेवा पाने वाले 10 करोड़ ग्राहकों में से 7.2 करोड़ ग्राहकों ने जियो प्राइम मेंबरशिप ली है

नई दिल्ली। वैश्विक निवेश बैंकिंग कंपनी जेफरीज ने बुधवार को कहा कि 31 मार्च तक 7.2 करोड़ ग्राहकों के प्राइम मेंबरशिप लेने के साथ ही रिलायंस जियो अन्य कंपनियों के लिए आगे भी विध्वंसकारी साबित होता रहेगा।

पिछले सप्ताह जियो ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुफ्त सेवा पाने वाले 10 करोड़ ग्राहकों में से 7.2 करोड़ ग्राहकों ने जियो प्राइम मेंबरशिप ली है। 99 रुपये में एक साल के लिए प्राइम मेंबरशिप लेने के बाद ग्राहकों को मासिक 303 रुपये में अनलिमिटेड डेटा मिलेगा।

जेफरीज ने कहा, बाजार को तहस-नहस करने की क्षमता रिलायंस जियो की 50 फीसदी बाजार शेयर को हासिल करने की आकांक्षा से पता चलता है। रिलायंस जियो पांच गुना अधिक डेटा का सृजन कर रही है तथा बाजार पर कब्जे के लिए कम कीमतों की रणनीति का भी इस्तेमाल कर रही है।


खुलासाः JIO सिम वालों के साथ बड़ा धोखा, आतंकी गतिविधियों में हो सकता है इस्तेमाल

इंदौर. जियो सिम एक्टिवेट करने के लिए आधार कार्ड जरूरी है, लेकिन शहर में एक ऐसा गिरोह भी सक्रिय था, जो बगैर दस्तावेज लिए हजार रुपए में जियो की चालू सिम बेच देता था।

दरअसल, यह आरोपित कंपनी के ही सेल्समेन हैं और दूसरों के आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। 6 सेल्समेन को फर्जी तरीके से जियो सिम बेचते हुए इंदौर क्राइम ब्रांच ने पकड़ा है। यह सभी आरोपित बगैर आधार कार्ड लिए फर्जी नाम से सिम 1000 रुपए लेकर बेच रहे थे। क्राइम ब्रांच के कर्मचारी को भी दो सिम क्रमश: एक हजार रुपए व तीन सौ रुपए में आरोपितों ने बेची, तब इन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया।

एटीएस ने भोपाल में जासूसी का फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ा तो क्राइम ब्रांच भी सक्रिय हो गई। अफसरों को पता चला कि रिलायंस की फ्री जियो सिम बेची जा रही हैं। खास बात यह है कि जिसे बेची जा रही है, उसका कोई दस्तावेज वेरिफिकेशन नहीं होता है, जो देश के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति दूसरे के नाम से मोबाइल सिम लेकर धमकाने, जासूसी करने जैसे काम कर सकता है।

IS के लिए इस्तेमाल हो सकती है आपकी सिम
सूत्रों का यह भी मानना है कि ढ्ढस्ढ्ढ के जासूस आपके नाम से सिम लेकर गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।हाल ही में भोपाल में पकड़े गए ढ्ढस्ढ्ढ के जासूसों से खुलासे में यह बात सामने आई थी कि एक सिम बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर ने गलत आईडी के जरिए पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वालों को सिम बेच दी थी।

ऐसे कसा शिकंजा
जेल रोड पर दुकानों के बाहर लगने वाले केनोपी से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था। एएसपी अमरेंद्रसिंह चौहान के मुताबिक, सूचना के आधार पर दो कर्मचारियों को भेजा। केनोपी पर तैनात सेल्समेन ने कर्मचारी के दस्तावेज, आधार कार्ड नंबर अथवा फोटो लिए बिना ही उसे जियो सिम दे दी। एक सिम एक हजार रुपए में तो दूसरी तीन सौ रुपए में खरीदी गई।

इन्हें किया गिरफ्तार

चौहान के मुताबिक, फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद टीम ने राम पिता मोहनलाल हेमनानी निवासी प्रजापति नगर, नीरज पिता मुकेश ननदवाल निवासी गौतमपुरा, दीप पिता अमरसिंह वाधवानी निवासी एलआईजी कॉलोनी, सुनील पिता लक्ष्मीनारायण चौहान निवासी पालदा, रंजीतसिंह पिता राजू सिंह भाटी निवासी नगीन नगर तथा प्रवीण पिता धन्नालाल राठौर निवासी राजनगर को गिरफ्तार किया। टीआई नलिन बुधोलिया के मुताबिक, राम ने क्राइम ब्रांच के कर्मचारी को सिम बेची थी। यह सिम वह सुनील से लाया था।

इसलिए करते थे फर्जीवाड़ा
सुनील डिस्ट्रीब्यूटर की तरह काम करता है जबकि अन्य सेल्समैन है। कर्मचारियों को कंपनी 10 हजार रुपए महीना वेतन देती है। एक सिम बेचने पर 2-3 रुपए का इंसेंटिव मिलता था। साथ ही कंपनी एक दिन में 50 सिम एक्टिवेट करने का टारगेट देती है, जिसे पूरा करने के लिए इन लोगों ने फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया।

ऐसे की गड़बड़ी
नियमानुसार जियो सिम लेने के लिए व्यक्ति को आधार कार्ड नंबर बताने के साथ ही थंब इंम्प्रेशन देना होता है। कंपनी एक आधार कार्ड नंबर पर छह सिम अलाट करती है। कोई व्यक्ति का थंब इम्प्रेशन एक बार लेने के बाद प्रक्रिया निरस्त होने का झांसा देकर फिर से थंब इम्प्रेशन लेकर उसके नाम से 2-3 सिम एक्टिवेट कर लेते है। बाद में कोई व्यक्ति बिना दस्तावेज दिए सिम की मांग करता है तो उसे 100 रुपए से एक हजार रुपए में दूसरे के नाम सिम बेचकर पूरी व्यवस्था से खिलवाड़ करते है। चौहान के मुताबिक, कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर व अफसरों से भी पूछताछ होगी। मामले में धोखाधड़ी व आईटी एक्ट का केस दर्ज किया है।

अपना खाता भी जांच लें

लोगों ने फ्री के चक्कर में जियो सिम ली है। लोगों को पता भी नहीं चलता और उनके नाम से एक से ज्यादा सिम एक्टिवेट हो जाती है। कंपनी की वेबसाइट पर जाकर अपना अकाउंट बनाकर आधार नंबर के आधार पर चेक कर सकते है कि आपके नाम से कितनी सिम जारी हुई है। साथ ही पुलिस ने लोगों से भी आग्रह किया है कि कहीं भी सिम लेने के लिए अपने दस्तावेज की फोटोकॉपी दें तो उस पर लिख दें कि यह मोबाइल कनेक्शन के लिए है व मोबाइल नंबर लिख दें, ताकि फोटोकॉपी का इस्तेमाल फिर से न हो पाए।

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