यहां नर्मदा तट पर हैं स्वयंसिद्ध 12 शिवलिंग, जानिए इनका रहस्य

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
यहां नर्मदा तट पर हैं स्वयंसिद्ध 12 शिवलिंग, जानिए इनका रहस्य

नर्मदा तट पर 10 करोड़ तीर्थ हैं, जिनका जिक्र मत्स्य पुराण में किया गया है। 

जबलपुर। मध्यप्रदेश की जीवन दायिनी नर्मदा के तट पर 10 करोड़ तीर्थ हैं। मत्स्य पुराण, पद्म पुराण, कूर्म पुराण ने नर्मदा की महत्ता एवं उसके तीर्थों का वर्णन किया गया है। मत्स्य पुराण एवं पद्म पुराण में बताया गया है कि अमरकंटक में नर्मदा के उद्गम से खंभात की खाड़ी तक 10 करोड़ तीर्थ हैं। इन्हीं तीर्थों में से त्रिुपरी तीर्थ में 12 स्वयंसिद्ध शिवलिंग हैं। 

स्कंद पुराण, नर्मदा पुराण, शिव पुराण, वामन पुराण तथा उपनिषद, वशिष्ट संहिता में इन स्वयंसिद्ध शिवलिंगों का उल्लेख है। कहा जाता है कि यहां पूजन करने से मनुष्य को कष्टों से मुक्ति मिलती है। भगवान शिव की उपासना से उसकी मनोकामना पूरी होती है। यहां हम नर्मदा तट पर स्थित 12 स्वयंसिद्ध शिवलिंगों के बारे में बताने जा रहे हैं।


पिप्पलेश्वर महादेव-  हनुमानगढ़ी के पास स्थित पिप्पलेश्वर महादेव का शिवलिंग है। महर्षि पिपलाद ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। यह स्वयंसिद्ध शिवलिंग है, जिसकी उपासना से सभी कष्ट दूर होते हैं।

तिलादेश्वर महादेव- नर्मदा के दक्षिणी तट पर तिलादेश्वर महादेव का मंदिर है। कहा जाता है जाबालि ऋषि ने तिल से भगवान शिव का अभिषेक किया था, इसलिए इन्हें तिलादेश्वर महादेव कहा जाने लगा। तिलवाराघाट पर स्थित यह शिवलिंग अति प्राचीन शिवलिंगों में से एक है।

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गुप्तेश्वर महादेव- नर्मदा तट से कुछ दूरी पर स्थित यह शिवलिंग अति प्राचीन माना जाता है। गुप्तेश्वर में स्थित इस शिवलिंग को गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। इसे रामेश्वरम ज्योर्तिलिंग का उपलिंग भी कहा जाता है। यहां अति प्राचीन गुफा में भगवान शिव विराजमान हैं।


ब्रह्मेश महादेव- ब्रह्मेश महादेव का मंदिर अति प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहां पूजन करने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग पहुंचते हैं। कहा जाता है कि इस शिविलंग का अभिषेक करने से मनोकामना पूर्ण होती है।

आदित्येश्वर महादेव- लम्हेटाघाट के उत्तर तट भगवाान आदित्येश्वर महादेव स्थित हैं। यह अति प्राचीन शिवलिंग है। शिवरात्रि के अवसर पर यहां अभिषेक करने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। कहा जाता है कि यहां किए गए पूजन ने शारीरिक कष्ट दूर होते हैं।

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पशुपतिनाथ मंदिर- गोकलपुर में भगवान पशुपतिनाथ का अति प्राचीन मंदिर है। यहा विराजमान शिविलंग की स्थापना राजा बलि के पुत्र ने कराई थी। श्रीयंत्र वाले इस मंदिर की मान्यता है कि यहां किए गए पूजन से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

नागेश्वर शिवलिंग- तिलवाराघाट के पास नागेश्वर शिवलिंग की स्थापना की गई है। कहा जाता है कि वासुकी नाग ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इस मंदिर में कालसर्प दोष की पूजा की जाती है। नर्मदा का यह तट कालसर्प योग की पूजा के लिए प्रसिद्ध है।


भूतेश्वर शिवलिंग- भूतनाथ की पहाड़ी पर भूतेश्वर शिवलिंग की स्थापना की गई है। पहाड़ी के नाम पर ही शिविलिंग का नाम रखा गया है। यहां भगवान शिव की भस्म आरती की जाती है। ऐसे करने से मनुष्य का उद्धार होता है।

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सिद्धेश्वर शिवलिंग- सिद्धघाट में सिद्धदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की गई है। जिसका जिक्र स्कंद पुराण में भी किया गया है। भगवान शिव के नाम पर ही इस घाट का नाम सिद्धघाट पड़ा है। 

गैबीनाथ शिवलिंग- गैबी ऋषि ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इसलिए इसे गैबीनाथ महादेव के नाम जाना जाता है। गढ़ा पुरवा की पहाडिय़ों में बना यह प्राचीन मंदिर दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।


नंदीकेश्वर महादेव- बरगी बांध के पास पहाड़ी पर बना यह मंदिर ज्यादा पुराना नहीं है। यहां स्थापित शिवलिंग काफी प्राचीन है। कहा जाता है कि शिव के गण नंदी के नाम पर इस मंदिर का नाम रखा गया है।

कुम्भेश्वर शिव- ग्राम ल्हेटी में भगवान शिव का प्राचीन शिवलिंग स्थापित किया गया है। एक जिलहरी में दो शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर को कुम्भेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां भगवान श्री राम ने भी पूजन किया था।

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