इस गाय के मुंह से चौबीसों घंटे निकलता है पानी, खुद देखें वीडियो

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
   इस गाय के मुंह से चौबीसों घंटे निकलता है पानी, खुद देखें वीडियो

कटनी जिले के रोहनिया गांव में प्रकृति की अनुपम छटा के बीच अनूठा स्थल, देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं लोग

बालमीक पाण्डेय @ कटनी/जबलपुर। वेदों में गाय को सबसे पवित्र प्राणी बताया गया है। इसे मां की तरह पूज्य स्थान हासिल है। यह इसकी अनेक विशेषताओं का ही परिणाम है। कटनी जिले में तो गाय का ऐसा मुख है जो सदियों से लोगों को पवित्र करता आ रहा है। बात हो रही है रोहनिया गांव के कुडिय़ाघाट की। दरअसल यहां एक प्राकृतिक गौमुख है, जिससे चौबीसों घंटे गुनगुना पानी बहता रहता है। यह पानी असाध्य रोगों के इलाज में भी काम आता है। नैसर्गिक सौंदर्य के बीच स्थित इस गौमुख के पास और भी कई प्राकृतिक धरोहरें हैं। इन्हें देखने के लिए देश के कोने-कोने से लोग कुडिय़ाघाट पहुंचते हैं। मकर संक्रांति पर यहां विशाल मेला भी लगता है। 

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ऐसे निकल रहा है पानी
कटनी से पूर्व दिशा में बड़वारा के समीप स्थित रोहनिया ग्राम के कुडिय़ाघाट में प्राचीन आश्रम है। यहां प्राकृतिक कुंड बने हुए हैं। कुंड के ऊपर ही शिला के रुप में एक गाय बनी है, जिसके मुंह से लगातार पानी निकलता रहता है। पानी की खासियत यह है कि यह एकदम शुद्ध और गुनगुना रहता है। गाय के मुंह से निकला यही पानी आगे जाकर नदी के रुप में परिवर्तित हो जाता है। रोहनिया निवासी मिथलेश दुबे, संजय शास्त्री ने बताया कि पता नहीं कितने वर्षों से गऊ मुख से पानी निकल रहा है। बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज बताते थे कि यहां पर 300 मीटर से अधिक गहराई तक जांच की गई लेकिन यह आज तक पता नहीं चल पाया कि पानी कहां से आ रहा है। 

24 hours out of the cow

असाध्य रोगों का इलाज
नीरू शास्त्री व सजल निगम ने बताया कि कलकल निंनाद के साथ बह रही इस नदी में इस गऊ मुख का पानी जाता है। गऊ मुख के जलपान से कई असाध्य रोगों से मुक्ति भी मिलती है। बड़वारा क्षेत्र का इकलौता ऐसा गांव है जो प्राकृतिक सौंदर्य को संजोऐ हुए हैं। यह न सिर्फ पर्यटन स्थल के नाम से प्रसिद्ध है बल्कि धार्मिक स्थल भी खास महत्व रखता है। प्राचीन शिव मंदिर और हनुमान मंदिर स्थल को और अधिक सुंदर बनाते हैं।

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यह भी है रहस्य
यह स्थान कई रहस्यों से भरा पड़ा है। इस स्थान की एक खास बात यह भी है कि नदी में सैकड़ों झरने लगे हुए हैं और कुआं यहां पर बना कुआं बूंद-बूंद पानी के लिए प्यासा है। प्रकृति के इस अजूबे को देखने के लिए न सिर्फ गांव, क्षेत्र, प्रदेश बल्कि देश के कोने-कोने से लोग यहां पहुंचते हैं और प्रकृति के इस सौंदर्य को निहारते हैं। पर्यटकों की सारी थकान नदी के तट का सौंदर्य पलक झपकते ही हर लेता है। 

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यह है पहुंच मार्ग
कटनी जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर बड़वारा शहर है। थाना के ठीक बगल से दक्षिण की ओर मार्ग ग्राम रोहनिया के लिए जाता है। गांव के पहले नदी का घाट चढ़ते ही बाएं साइट से एक मार्ग सांधी के लिए जाता है। 10 कदम की दूरी पर आंगनबाड़ी केंद्र के पास से मार्ग कुडिय़ा घाट के लिए जाता है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर 14 जनवरी से 16 जनवरी तक तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। जिसकी तैयारियां भी जोरों पर हैं।

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हर तरफ खूबसूरत नजारा 
रोहित निगम, मुकुंदी रावत ने बताया कि इस स्थान पर बारहों महीने लोगों का आना जाना लगा रहता है। यह है कि बड़वारा क्षेत्र का प्रमुख स्थान है। इन दिनों तो यहां का सौंदर्य देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी दूसरी दुनिया में आ गये हों। हर तरफ केवल हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना ही सामने नजर आता है। रविवार और त्यौहार में यहां पर पिकनिक सा माहौल रहता है।

विकास से अछूता है स्थान
रोहनिया निवासी दीपक दुबे, सुशील सिंह, दुर्गेश सोनी, नवीन गुप्ता, अंशुल असाटी, विनोद गुप्ता का कहना है कि इतना सुंदर स्थान प्रशासनिक उपेक्षा व उदासीनता का दंश झेल रहा है। इस स्थान को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना चाहिए। यहां सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं तो यह स्थान देशी-विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगा। 

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