सिर्फ इन खास दिनों में दिखाई देती है ये जंगल की आग, वेदों में भी उल्लेख

Abha Sen

Publish: Feb, 17 2017 04:29:00 (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
 सिर्फ इन खास दिनों में दिखाई देती है ये जंगल की आग, वेदों में भी उल्लेख

गहरे लाल और सफेद रंग के ये पुष्प जितने चटक रंग के होते हैं उतने ही फायदेमंद भी। प्राचीन काल से होली के रंग इसके फूलों से तैयार किये जाते रहे हैं। 

जबलपुर। वसंत माह और पलाश के फूल, मौसम के साथ ही वादियां पलाश के फूलों से भर गई हैं। गहरे लाल और सफेद रंग के ये पुष्प जितने चटक रंग के होते हैं उतने ही फायदेमंद भी। इसका हर एक पत्ता उपयोगी है। ना सिर्फ औषधिय रूप से बल्कि, धार्मिक रूप से भी...

पलाश (पलास, परसा, ढाक, टेसू, किंशुक, केसू) एक वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलों के कारण इसे जंगल की आग भी कहा जाता है। प्राचीन काल ही से होली के रंग इसके फूलों से तैयार किये जाते रहे हैं।  

पवित्र ग्रंथों में उल्लेलख
यह वृक्ष हिंदुओं के पवित्र माने हुए वृक्षों में से हैं। इसका उल्लेख वेदों तक में मिलता है। होली के लिए रंग बनाने के अलावा इसके फूलों को पीसकर चेहरे में लगाने से चमक बढ़ती है। पलाश की फलियां कृमिनाशक का काम तो करती ही है इसके उपयोग से बुढ़ापा भी दूर रहता है। पलाश फूलों के पानी से स्नान करने से ताजगी महसूस होती है और लू नहीं लगती साथ ही गर्मी का भी अहसास नहीं होता।



पलाश में ये है गुण
इसकी जड़ों में खुजली और एक्जीमा खत्म करने का गुण हैं। बीज में पाइल्स, सर्दी, खासी और जुकाम खत्म करने के गुण हैं। फूलों की पत्तियां डायबीटिज व त्वजा रोग खत्म करने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रिसर्च में इसमें औषधिय गुणों का होना पाया गया है। कई ऐसी बीमारियां हैं जिन्हें पलाश खत्म कर सकता हैं।

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