यहां मछली बनीं डॉक्टर, कर रहीं लाखों लोगों का इलाज, वीडियो के साथ जानिए रोचक रहस्य

balmeek pandey

Publish: Jul, 15 2017 01:41:00 (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
 यहां मछली बनीं डॉक्टर, कर रहीं लाखों लोगों का इलाज, वीडियो के साथ जानिए रोचक रहस्य

खतरनाक बीमारियों से कर रहीं बचाव

जबलपुर।/कटनी। इन दिनों जबलपुर-कटनी समेत अन्य शहरों में मछली डॉक्टर का काम कर रही है..., ये मछली लाखों लोगों का बकायदा ट्रीटमेंट भी करतीं हैं...। यह बात सुनने में जरुर अटपटी लग रही है, लेकिन हम आपको इसके बारे में एक ऐसी हकीकत बताने जा रहे हैं, जिससे आपको यकीन हो जाएगा कि, कैसे ये मछली चिकित्सक का काम कर रहीं हैं। पिछले दो-तीन सालों में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया नाम की घातक बीमारी ने ऐसा जोर पकड़ा कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया। स्वास्थ्य विभाग सहित चिकित्सक भी इस बीमारी को लेकर हैरानी में पड़ गए। लेकिन समय रहते एक ऐसे मछली की खोज की गई, जिसका भोजन ही वह बीमारी है, याने की जिस मच्छर के काटने से डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी होती है, उसके लार्वे को ही वह खत्म कर देती है। यह मछली डेंगू के लार्वा को खत्म करके लाखों लोगों को बीमारी से बचा रही है।


fish treating patients becoming a doctor

बीमारी से निबटने अभियान
कटनी जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस दिशा में विशेष पहल की जा रही है। जिला मलेरिया अधिकारी शालिनी नामदेव और मलेरिया इंस्पेक्टर पीके महान के नेतृत्व में मौसमी बीमारियों विशेष रूप से मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि पर प्रभावि नियंत्रण के लिए जल स्त्रातों में गम्बूसिया मछलियां डालने के साथ शहर व गांव के लोगों सहित स्कूल में बच्चों को इन बीमारियों से बचने के उपाय बताए जा रहे हैं। साथ ही मौसम की बीमारियों की स्थिति पर कड़ी नजर रखने, मौसमी बीमरियों की रोकथाम के लिए नियमित रूप से एन्टी लार्वा गतिविधियां करने एवं आवश्यकतानुसार फॉगिंग करवाने का काम चल रहा है।

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लार्वा को खा जाती है मछली
कटनी जिला मलेरिया अधिकारी शालिनी नामदेव के अनुसार यह मछली डेंगू के लार्वा को खाकर मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की आबादी पर रोक लगाने का कार्य काम करती है। हर साल सैकड़ों लोगों की मौत का सबब बनने वाली बीमारी मलेरिया, डेंगू, इंसेफेलाइटिस की जड़ें काटने के लिए अब गम्बूसिया मछलियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिले के अलग-अलग इलाकों में गड्ढों और पानी के ठहराव वाले अन्य स्थानों पर गम्बूसिया मछलियों को डालने का काम किया जा रहा है। 

ये है गम्बूशिया मछली
-स्थानीय भाषा में इसे गटर गप्पी कहते हैं। इस मछली को लोग कहीं भी किसी भी प्रकार के तालाब, गड्ढेे, नाली या गटर में डाल सकते हैं, जो मच्छर के लार्वा को खा जाएगी।
- इस मछली का मुख्य भोजन मच्छरों का लार्वा है।
-इस मछली की सबसे खास बात ये है कि यह अंडे नहीं देती, बल्कि बच्चे देती है। ये मछली तीन इंच तक लंबी होती है।
-इस मछली के बच्चे दो द्वंद होने पर भी मच्छरों के लार्वा को खाने लगते हैं।
-गप्पी मछली 16 से 28 दिनों के अंतराल पर बच्चे देती है। और 14 डिग्री सेल्सियस से 38 डिग्री तक बहुत ही आराम से रह जाती है।
-गप्पी का बच्चा हो या बड़ी मछली ये अपने कुल भार का 40 फीसदी लार्वा12 घंटे में खा सकती है।
-इस मछली की पहचान ब्रिटिश नाविक जेम्स कुक ने की थी। कुक का जन्म 7 नवंबर 1728 को इग्लैंड के एक गांव में हुआ था।
-कुक युवा काल में रॉयल ब्रिटिश नेवी में नौकरी की। यात्रा और भौगोलिक परिस्थियों के कारण अधिकतर जगहों पर मच्छरों का प्रकोप रहता था। इस समस्या का हल कुक ने गप्पी मछली से किया।

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खुद मछली पैदा कर चला रहे अभियान
जिला मलेरिया अधिकारी के नेतृत्व में मलेरिया इंस्पेक्टर कटनी में खुद मछली पैदाकर इस अभियान को चला रहे हैं। पीके महान से बताया कि पिछले वर्ष एक हजार गंबूसिया मछली खरीदी थी, जिसमें से जिला अस्पताल के गार्डन में एक कुंड में डालकर उनकी संख्या बढ़ाई गई। अब शहर सहित ढीमरखेड़ा, उमरियापान, बड़वारा, विजयराघवगढ़, रीठी आदि ब्लॉक मुख्यालय सहित गांवों में डालने का काम किया जा रहा है।

कर रहे जागरुक
जिले में गांव-गांव जाकर लोगों को इससे बचने के लिए जागरुक किया जा रहा है। इसके साथ ही स्कूलों में बच्चों को स्लाइड शो के माध्यम से डेंगू, डेंगू का लार्वा, उससे निबटने के उपाय सुझाए जा रहे हैं। इन घातक बीमारियों से बचने के लिए स्लोगन, पोस्टर, निबंध आदि प्रतियोगिता आयोजित कराई जा रही है। इसके साथ लोगों को घरों के आसपास, कबाड़ आदि में पानी जमा न होने की सलाह दी जा रही है।

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