ये हैं राजसी संक्रांति, आज इन उपायो से हमेशा के लिए प्रसंन्न होंगी लक्ष्मी

Premshankar Tiwari

Publish: Jan, 14 2017 11:56:00 (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
ये हैं राजसी संक्रांति, आज इन उपायो से हमेशा के लिए प्रसंन्न होंगी लक्ष्मी

पंचदेव की उपासना के साथ दान-पुण्य बढ़ाएगा समृद्धि, पिता-पित्र का होगा मिलाप

जबलपुर। नववर्ष के प्रथम त्यौहार मकर संक्रांति पर आज हर मंदिर और देवालयों में पूजन का क्रम जारी है। नदी, तीर्थों में स्नान और अघ्र्य कर पंचदेव की उपासना हो रही है। आज का दिन बड़ा ही पुण्यकारी है। पंडित नीरू शास्त्री के अनुसार नक्षत्र के आधार पर मकर संक्रांति का नाम राजसी है, जो लोगों के लिए बड़ी हितकारी है। संक्रांति का वाहन हाथी है तथा उपवाहन गधा है। जो जनता के लिए सुख समृद्धिकारक व लक्ष्मीकारक है। संंक्रांति का स्वरूप लाल वस्त्र पहने हैं तथा धनुष आयुध ले रखा है। हाथ में लोहे का पात्र है।  दूध का सेवन कर रही हंै। शरीर पर गोरोचन का लेप है। बिल्वपुष्प का मुकुट है। सफेद कंचुकी पहन रखी है। बैठी अवस्था में है और 15 मुहूर्त वाली है। जो विशेष फलदायक हैं।


यह करें उपाय
आचार्य मिथलेश द्विवेदी ने बताया कि आज के दिन तांबे के पात्र और सोना दान, अनाज, नारियल, बादाम, चावल मूंग दाल खिचड़ी, लकडी या धातु की सामग्री के दान का विशेष महत्व है। इसके साथ ही विष्णु, महेश, गणेश, आद्यशक्ति और सूर्य की आराधना एवं उपासना का पावन व्रत है, जो तन-मन-आत्मा को शक्ति प्रदान करता है। आज उपासना से प्राणी की आत्मा शुद्ध होती है। संकल्प शक्ति बढ़ती है। ज्ञान तंतु विकसित होते हैं। चेतना को विकसित करने वाला पर्व है।

यह है महत्व
नीरू शास्त्री ने बताया कि पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए जाते हैं, क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि है। यह दिन पिता-पुत्र के संबंधों में निकटता की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। इसलिए यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है। भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था।

ये दान बढ़ाएंगे पुण्य
विष्णु धर्मसूत्र में कहा गया है कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए एवं स्व स्वास्थ्यवर्धन तथा सर्वकल्याण के लिए तिल के छ: प्रयोग पुण्यदायक एवं फलदायक होते हैं।
- तिल जल से स्नान करना
- तिल दान करना
- तिल से बना भोजन करना 
- जल में तिल अर्पण करना
- तिल से आहुति देना।
- तिल का उबटन लगाना।

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