सावधान- शहर के अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
सावधान- शहर के अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं

एसएनसीयू में शार्ट सर्किट के बाद भी नहीं चेते जिम्मेदार  

जबलपुर। मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में शार्ट-सर्किट के बाद भी जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी है। जानकारों के अनुसार लापरवाही से यहां भी भुवनेश्वर अस्पताल जैसा हादसा हो सकता है। पत्रिका ने शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। मेडिकल कॉलेज सहित दोनों मुख्य सरकारी अस्पताल में कर्मियों को अग्निशमन यंत्र तक चलाने की जानकारी नहीं है। कई अग्निशमन यंत्रों में महीनों से रिफलिंग नहीं हुई।
मेडिकल कॉलेज के आईसीयू के सामने टांगे गए अग्निशमन यंत्र में 16 फरवरी 2016 तारीख लिखी है। अधीक्षक कार्यालय और लिफ्ट के सामने लगे अग्निशमन यंत्र पर कोई पर्ची ही नहीं थी। अग्निशमन यंत्र में भरी गैस की वैधता छह माह होती है। प्रशासन का दावा है कि  फुल फायर फाइटिंग सिस्टम के लिए इन्दौर की एजेंसी को प्लान भेजा गया है। हॉस्पिटल में जल्द ही रिफिलिंग की जाएगी। मेडिकल कॉलेज में हर समय 15 सौ मरीज और उनके परिजन मौजूद रहते हैं। एल्गिन और विक्टोरिया अस्पताल में भी सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हैं। शहर के निजी अस्पतालों की हालत और भी खराब है। कई निजी अस्पतालों के आईसीयू तक सुरक्षित नहीं हैं। प्राइवेट नर्सिंग होम और हॉस्पिटलों की जांच-पड़ताल तक नहीं होती। वर्ष 2012 से भोपाल की टीम द्वारा फायर सिस्टम की एनओसी दी जा रही है। कई हॉस्पिटल तो बिना एनओसी के चल रहे हैं।
हॉस्पिटल को एनओसी देने के लिए उनके पास भवन के प्रवेश और निकास पर्याप्त होनी चाहिए। हॉस्पिटल में अलग-अलग दिशाओं में चौड़ी सीढ़ी और रैम्प होना चाहिए। कई हॉस्पिटलों में अग्निशमन यंत्रों में गैस नहीं है, सिर्फ पर्ची चस्पा की गई है। 
 ये हैं मानक
फायर हाइड्रेंट सिस्टम- यह ओवरहेड टैंक या नीचे की पानी टंकी से सीधा जुड़ा होता है। आग लगने पर बिजली कट जाती है। इस कारण इसका जॉकी पम्प और कनेक्शन भी अलग होता है। नजदीकी प्वाइंट से आग बुझा लेते हैं।
स्मोक डिटेक्टर या फायर स्प्रिींकलर- धुआं निकलने या आग लगने पर पैनल में जानकारी हो जाती है। स्प्रींकलर वाल्ब रहते हैं, जो हिट होने पर ब्लॉस्ट होते हैं। उतने एरिया पानी की फुहारे पडऩे लगती है।
फायर इंस्टीग्यूसर-  एरिया के अनुसार निर्धारित दूरी पर फायर इंस्टीग्यूसर लगाया जाता है। बिना प्रशिक्षण का इसका बेहतर उपयोग संभव नहीं है। इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रानिक, जनरल और पेट्रोलियम आग में किसे पानी से बुझाना है और कहां गैस का इस्तेमाल, इसका प्रशिक्षण आवश्यक है।
होजरील सिस्टम- ओवरहेड टैंक - से जुड़ा रहता है। सेंटर में 30 मीटर की पाइप होती है। 12 मीटर से ऊंची बिल्डिंग में ये उपयोगी होता है। 

बिल्डिंग में फायर सिस्टम की एनओसी भोपाल से दी जाती है, इस कारण स्थानीय स्तर पर जांच नहीं की जाती है। कितने हॉस्पिटल बिना एनओसी के चल रहे हैं, इसकी जानकारी भी नहीं है। 
संदीप जायसवाल, प्रभारी अग्निशमन विभाग

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