सहकारी बैंकों से नोट बदलने की सुविधा वापस लेने को हाईकोर्ट में चुनौती

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
  सहकारी बैंकों से नोट बदलने की सुविधा वापस लेने को हाईकोर्ट में चुनौती

याचिका में आरबीआई द्वारा जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों में नोट बदलने की सुविधा बहाल करने की मांग

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में  जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से एक हजार और 500 रुपए के नोट बदलने  सुविधा वापस लेने को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष सुनने के बाद असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल को निर्देशित किया है कि वे भारत सरकार व आरबीआई से दिशा-निर्देश प्राप्त करें। कोर्ट ने याचिका की एक प्रति असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता जय रेवाखण्ड के प्रदेश महामंत्री ब्रजेश दुबे और मिहीलाल राय की ओर से  कहा गया कि नोटबंदी के फैसले के बाद सहकारी बैंकों को पुराने नोट बदलने का अधिकार दिया गया था, परंतु   आरबीआई ने 14 नवम्बर को निर्देश जारी करके सहकारी बैंकों को अप्रचलित नोटों को बदलने से वंचित कर दिया। संसद द्वारा बैंकिंग रैग्युलेशन अधिनियम की धारा 22 एवं 56 में संशोधन किए बिना रिजर्व बैंक द्वारा जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों से बैंकिंग कंपनी का दर्जा समाप्त कर दिया गया।  जिसे याचिकाकर्ता की ओर से असंवैधानिक बताया गया है।


नोट बदलने की सुविधा हो बाहाल

याचिका में  रिजर्व बैंक के निर्देश को खारिज करके सहकारी बैंकों को नोट बदलने की सुविधा बहाल करने के निर्देश अनावेदक पक्षों को देने की मांग की गई। याचिका में केन्द्र सरकार के वित्त सचिव, आरबीआई के मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड के महाप्रबंधक, मप्र सरकार के सहकारी विभाग के सचिव सहित सहकारी समितियों के कमिश्नर को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्शमुनि त्रिवेदी, अधिवक्ता प्रशान्त अवस्थी, असीम त्रिवेदी ने पैरवी की।

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