इस मंत्र के 24 अक्षरों में छिपी हैं गुप्त शक्तियां, अचूक है इसका जाप

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
 इस मंत्र के 24 अक्षरों में छिपी हैं गुप्त शक्तियां, अचूक है इसका जाप

24 अत्यन्त ही महत्वपूर्ण शिक्षाओं के प्रतीक हैं, वेद, शास्त्र, पुराण, स्मृति, उपनिषद् आदि में जो शिक्षाएं मनुष्य जाति को दी गई हैं वे इस मंत्र का अंश मात्र

जबलपुर। ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सविर्तुवरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियोयोन: प्रचोदयात्.... गायत्री सनातन एवं अनादि मंत्र है। पुराणों में कहा गया है कि 'ब्रह्मा को आकाशवाणी द्वारा गायत्री मंत्र प्राप्त हुआ था, इसी गायत्री की साधना करके उन्हें सृष्टि निर्माण की शक्ति प्राप्त हुई। गायत्री के चार चरणों की व्याख्या स्वरूप ही ब्रह्माजी ने चार मुखों से चार वेदों का वर्णन किया। गायत्री को वेदमाता कहते हैं। चारों वेद, गायत्री की व्याख्या मात्र हैं।' गायत्री माता को जानने वाला वेदों को ज्ञान लाभ प्राप्त करता है।


गायत्री मंत्र के 24 अक्षर,24 अत्यन्त ही महत्वपूर्ण शिक्षाओं के प्रतीक हैं। वेद, शास्त्र, पुराण, स्मृति, उपनिषद् आदि में जो शिक्षाएं मनुष्य जाति को दी गई हैं, उन सबका सार इन 24 अक्षरों में मौजूद है। इन्हें अपनाकर मनुष्य प्राणी व्यक्तिगत तथा सामाजिक सुख-शान्ति को पूर्ण रूप से प्राप्त कर सकता है। गायत्री गीता, गंगा और गौ यह भारतीय संस्कृति की चार आधारशिलायें हैं, इन सबमें गायत्री का स्थान सर्व प्रथम है। जिसने गायत्री के छिपे हुए रहस्यों को जान लिया, उसके लिए और कुछ जानना शेष नहीं रहता।


गीता में भगवान ने कहा मैं हूं गायत्री मंत्र
गायत्री उपासक एवं गायत्री परिवार के सदस्य देवेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार समस्त धर्म ग्रन्थों में गायत्री की महिमा एक स्वर से कही गई। समस्त ऋषि-मुनि मुक्त कण्ठ से गायत्री का गुण-गान करते हैं। शास्त्रों में गायत्री की महिमा बताने वाला साहित्य भरा पड़ा है। उसका संग्रह किया जाय, तो एक बड़ा ग्रंथ ही बन सकता है। गीता में भगवान् ने स्वयं कहा है 'गायत्री छन्दसामहम्' अर्थात् गायत्री मंत्र मैं स्वयं ही हूं। गायत्री उपासना के साथ-साथ अन्य कोई उपासना करते रहने में कोई हानि नहीं। सच तो यह है कि अन्य किसी भी मंत्र का जाप करने में या देवता की उपासना में तभी सफलता मिलती है, जब पहले गायत्री द्वारा उस मंत्र या देवता को जाग्रत कर लिया जाए।


श्रीवास्तव के अनुसार समस्त धर्म ग्रंथों में गायत्री की महिमा एक स्वर से कही गई है। अथर्ववेद में गायत्री को आयु, विद्या, संतान, कीर्ति, धन और बह्मतेज प्रदान करने वाली कहा गया है। विश्वामित्र ऋषि का कथन है-'गायत्री के समान चारों वेदों में कोई मंत्र नहीं है। सम्पूर्ण वेद, यज्ञ, दान, तप गायत्री की एक कला के समान भी नहीं है।' 


ज्ञान-विज्ञान छिपे
गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में अनेक ज्ञान-विज्ञान छिपे हुए हैं। अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र, सोना आदि बहुमूल्य धातुओं का बनाना, अमूल्य औषधियां, रसायन, दिव्य यंत्र अनेक रिद्धी-सिद्धियां, श्राप, वरदान के प्रयोग, नाना प्रयोजनों के लिए नाना प्रकार के उपचार, परोक्ष विद्या, अंर्तदृष्टि, प्राण विद्या, वेधक, प्रक्रिया, शूल शाल्य, वाममार्गी तंत्र विद्या, कुण्डलिनी, चक्र, दश, महाविद्या, महामातृका, जीवन, निर्मोक्ष, रूपांतरण, अक्षात, सेवन, अदृश्य, दर्शन, शब्द परव्यूह, सूक्ष्म संभाषण आदि अनेक लुप्त प्राय: महान् विद्याओं के रहस्य बीज और संकेत गायत्री मंत्र में मौजूद हैं। 

  
इन विद्याओं के कारण एक समय हम जगत्गुरु, चक्रवर्ती शासक और स्वर्ग संपदाओं के स्वामी बने हुए थे, आज इन विद्याओं को भूलकर हम सब प्रकार दीन- हीन बने हुए हैं। गायत्री में सन्निहित उन विद्याओं का यदि फिर प्रकटीकरण हो जाए, तो हम अपना प्राचीन गौरव प्राप्त कर सकते हैं।


84 योग साधनाओं का उद्भव
प्राचीन काल में ऋषियों ने बड़ी-बड़ी तपस्यायें और योग्य साधनायें करके अणिमा, महिमा आदि चमत्कारी रिद्धी-सिद्धियां प्राप्त की थीं। उनके शाप और वरदान सफल होते थे तथा वे कितने ही अद्भुत एवं चमत्कारी सामथ्योज़्ं से भरे पूरे थे, इनका वर्णन इतिहास, पुराणों में भरा पड़ा है। वह तपस्यायें और योग -साधनायें गायत्री के आधार पर ही होती थीं। गायत्री महाविद्या से ही 84 प्रकार की महान् योग साधनाओं का उद्भव हुआ है।

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