शरीर में हलचल हुई और अचानक जीवित हो उठी लड़की, फिर रख लिया यह रूप

Premshankar Tiwari

Publish: Apr, 21 2017 06:36:00 (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
 शरीर में हलचल हुई और अचानक जीवित हो उठी लड़की, फिर रख लिया यह रूप

अनूठी है इस युवती की कहानी, नर्मदा के तट पर डाला डेरा, नाम ही हो गया नर्मदेश्वरी

जबलपुर। नर्मदा की लहरों के किनारे ध्यान मग्न युवती..। तन पर  सफेद साड़ी..। चेहरे पर अलग ही तेज और नर्मदा के प्रति समर्पण का अद्भुत भाव...। यह विवरण है उस नर्मदेश्वरी (युवती) का जो नर्मदा तीर्थ ग्वारीघाट में एक पहचान बन चुकी है। नर्मदा के प्रति उसके समर्पण की कहानी भी अजीब व रोचक है। पांच साल की उम्र में नर्मदा की लहरों से ही उसे जीवन दान मिला। फिर क्या था, इसके अपना भी सर्वस्व नर्मदा को न्यौछावर कर दिया।




बस नर्मदा का ध्यान
नर्मदा ग्वारीघाट में रविवार को तट किनारे एक युवती ध्यान मग्न अवस्था में बैठी थी। उसके क्रिया-कलाप सामान्य युवतियों से कुछ हटकर नजर आ रहे थे। वह इस तरह मग्न थी कि आसपास से गुजरने वालों की आवाजों और व्यधान का उस पर कोई फर्क नजर नहीं आ रहा था। समीप ही खड़ी एक वृद्धा ने बताया कि वो (नर्मदेश्वरी) कुछ ऐसी ही है। किसी के आने-जाने से उसे कोई फर्क पड़ता। वह तो अपनी धुन में रहती है। वृद्धा इस युवती की मां है। उसने नर्मदेश्वरी की जो हकीकत बताई वह चौंकाने वाली है। 


Girl survived after death


ये है अजब कहानी
युवती की मां लल्ली बाई ने बताया कि वह डिंडौरी जिले के समनापुर की रहने वाली हैं। करीब 19 साल पहले हमारे घर में कन्या का जन्म हुआ। वह जन्म से ही बीमार थी। वह तो ज्यादा हिलती-डुलती थी और न ही रोती या फिर कुछ बोलती थी। उसका शरीर मृत प्राय था। इसका कई जगह इलाज कराया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। एक दिन निराश होकर लल्ली उसे नर्मदा के किनारे ले आई और उसे पानी के किनारे लेटा दिया। जैसे ही नर्मदा के पानी ने इस बालिका को स्पर्श किया, उसके शरीर में हलचल होने लगी। वह रो पड़ी। जन्म के बाद यह पहला मौका था जब वह रोई। यह देखकर लल्ली आश्चर्य चकित रह गई। उसने बच्ची का नाम ही नर्मदा रख दिया। अब लोग इसे नर्मदेश्वरी कहकर भी पुकारने लगे हैं। 




जब मां ने की परिक्रमा 
निर्जीव जैसी हो चुकी बेटी के शरीर में हलचल देखकर लल्ली भी आंखें छलछला आईं। उसने संकल्प कर लिया कि वह अपनी बेटी के साथ नर्मदा की परिक्रमा करेगी। यहीं से परिवार को छोड़कर उसने बेटी को गोद में लिया और पैदल नर्मदा परिक्रमा पर निकल पड़ी। तीन साल 3 माह और 13 में उसने परिक्रमा पूरी की। परिक्रमा के दौरान ही बेटी में उसे कुछ रहस्यमय चीजें नजर आयीं, इसके कारण उसने परिक्रमा के बाद बेटी को ग्वारीघाट में एक आश्रम में छोड़ दिया और उसी के रहने लगी।




रोज करती थी सफाई 
ग्वारीघाट निवासी उमा देवी ने बताया कि नर्मदा में कुछ विलक्षण चीजें हैं, तभी तो पूरा क्षेत्र उसे नर्मदेश्वरी कहकर पुकारने लगा है। नर्मदा जब पांच साल की थी, तभी से वह नर्मदा के किनारे पड़ी पन्नियां बीनती और तट पर सफाई करती थी। उसे देखकर क्षेत्रीय लोग भी नर्मदा की सफाई के लिए खड़े हुए। तट की स्वच्छता के संदेश को आत्मसात कर लिया।




मैं तो यहीं रहूंगी
नर्मदा अब उन्नीस साल की हो गई है, लेकिन उसका नियम नहीं बदला..। वह रोज तट पर जाकर सफाई करती है। ध्यान और पूजन के साथ जरूरतमंदों की मदद भी करती है। उसने यही कहा कि मेरा जीवन मां नर्मदा का दिया हुआ है। अब में यहीं रहूंगी। आजीवन ब्रम्हचर्य का पालन करते हुए मां नर्मदा की सेवा करूंगी। नर्मदा के इन्हीं भावों ने ही उसे लोगों के बीच श्रद्धा का पात्र बना दिया है।

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