विश्व के अनूठे डॉक्टर: मौत के बाद भी करते रहेंगे मरीजों का इलाज

balmeek pandey

Publish: Jul, 17 2017 12:42:00 (IST)

Jabalpur, Madhya Pradesh, India
विश्व के अनूठे डॉक्टर: मौत के बाद भी करते रहेंगे मरीजों का इलाज

भविष्य के डॉक्टरों को पढऩे में न आए शरीर की कमी, शहर के चार लोगों ने लिया देहदान का संकल्प 

कटनी। जिले में रक्तदान करने वालों की संख्या भले ही ज्यादा हो लेकिन लोग देहदान करने में पीछे नहीं हैं। जिले से अब तक चार लोग देहदान का संकल्प ले चुके हैं। इन लोगों की ख्वाहिश  भी यहीं है कि मरने के बाद भी इनकी माटी वतन के काम आए। यानि भविष्य के डॉक्टरों को पढ़ाई के लिए इनका शरीर उपलब्ध हो सके। देहदान में मेडिकल कॉलेजों में उसी व्यक्ति का शरीर लिया जाता है, जिसकी मृत्यु साधारण हुई हो। बीमारी या एक्सीडेंट में मृत हुए लोगों का शरीर नहीं लिया जाता है। मरने के बाद स्वयं के खर्चे पर मृत शरीर को उस जगह पर पहुंचाया जाता है। 


डॉ. उमा निगम-संजय निगम- साल 2013
नई बस्ती निवासी डॉ. उमा निगम-डॉ. संजय निगम। दोनों पति-पत्नी है और डॉक्टर भी हैं। देहदान को लेकर डॉ. निगम ने बताया कि जब हम लोग मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे तो मनुष्य की हड्डियां नहीं मिल पाती थीं। इस वजह हम लोगों को प्लास्टिक के बने ढांचे से पढ़ाई करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक के ढांचे और शरीर के असली ढांचे से पढ़ाई करने में काफी फर्क आता है। भविष्य के डॉक्टर को बड़ी आसानी से हड्डियां उपलब्ध हो सकें इसलिए हम दोनों ने साल 2013 में देहदान करने का निर्णय लिया। मेरा ऐसा मानना है कि अन्य लोगों को भी अपनी देहदान का संकल्प लेना चाहिए।


डॉ. उमेश नामदेव
जिला अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. उमेश नामदेव ने भी अपनी देह को दान करने का निर्णय लिया है। देहदान करने के लिए वे इसका फार्म भी भर चुके हंै। उनका कहना है कि मरने के बाद शरीर मिट्टी में मिल जाता है। कुछ दिन तक ही वह व्यक्ति लोगों को याद आता है लेकिन देहदान करने के बाद वह अमर हो जाता है क्योंकि वह जब तक मेडिकल कॉलेजों में रहेगा, तब तक उसका मृत शरीर तैयार हो रहे हजारों डॉक्टरों के काम आएगा। 

मदन कुमार
तीन चिकित्सकों के साथ ही वंशस्वरूप वार्ड के भट्टा मोहल्ला निवासी मदन कुमार नामदेव का भी मानना है। उन्होंने भी साल 2016 में अपनी देहदान करने का निर्णय। उनका कहना है कि मरने के बाद ये शरीर मिट्टी में ही मिल जाना है। यदि देहदान से किसी को जीवन मिल सकता है तो समझो ये जन्म सार्थक हो गया।

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