पांच का फेल अब 15 करोड़ का प्रस्ताव हालात कह रहे टैंकर से काम चलाओ

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Dec, 02 2016 02:13:00 (IST)

korba
पांच का फेल अब 15 करोड़ का प्रस्ताव हालात कह रहे टैंकर से काम चलाओ

जिला मुख्यालय जांजगीर के घरों में पानी सप्लाई करने के लिए 18 वर्ष पहले जल आवर्धन योजना के तहत चार करोड़ खर्च कर इंटकवेल, फिल्टर प्लांट बनाया गया था

जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय जांजगीर के घरों में पानी सप्लाई करने के लिए 18 वर्ष पहले जल आवर्धन योजना के तहत चार करोड़ खर्च कर इंटकवेल, फिल्टर प्लांट बनाया गया था,

जिसमें डेढ़ करोड़ अतिरिक्त खर्च करने के बाद भी शहरवासियों को पीने का पानी नहीं मिल पाया। अब पालिका द्वारा पीएचई के माध्यम से साढ़े पांच करोड़ को भूल शासन को 15 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसे स्वीकृति भी मिल गई है।

नगर पालिका परिषद जांजगीर-नैला और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने इंटकवेल निर्माण के लिए जगह का चयन कर लिया है। चांपा बिरगहनी के पास ग्राम देवरहा में हसदेव नदी पर इंटकवेल का निर्माण किया जाएगा।

पीएचई विभाग ने सर्वे का कार्य पूरा करने के बाद इसका प्रपोजल तैयार कर शासन को भेजा है, जिसके अनुसार, नया इंटेकवेल तथा फिल्टर प्लांट का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा फिल्टर प्लांट से लेकर टंकी तक नई पाइप लाइन भी बिछाई जाएगी। साथ ही शहर में भी पाइप लाइन का विस्तार किया जाएगा।

 पीएचई के अधिकारियों ने बताया कि सर्वे का काम पूरा हो गया है। इंटकवेल निर्माण के लिए स्थान चयन भी कर लिया गया है। भू-अर्जन का काम बाकी है। इसके लिए पटवारी को पत्र लिखा गया है।

प्रपोजल के अनुसार इंटेकवेल, पाइप लाइन का नए सिरे से विस्तार और वाटर फिल्टर प्लांट का निर्माण होना है। इस संबंध में बताया जा रहा है कि पूर्व में जिन अदूरदर्शिता पूर्ण निर्णय लेकर इंटकवेल के लिए जगह का चयन किया था, वही अब भी हो रहा है।

 पहले जिस स्थान पर हसदेव नदी में इंटकवेल बनाया गया उस स्थान पर बारहों माह पानी भी नहीं रहता, जिसके कारण भी पानी की आपूर्ति नियमित रूप से नहीं हो पाई। वहीं अब भी जिस स्थान का चयन किया गया है, वह भी स्टापडेम से बहुत दूर है, जहां ग्रीष्मकाल में पानी की किल्लत रहती है।

वर्तमान में शहर के कई वार्डों में पालिका टैंकर के जरिए जल आपूर्ति करवा रही है। बहरहाल, पालिका की नई योजना शहरवासियों के लिए आखिर कितनी कारगर साबित होती है, यह तो काम पूर्ण होने के बाद पता चलेगा।

भुगत रहे शहरवासी
जिला मुख्यालय जांजगीर के वार्डों में जल आपूर्ति की योजना वर्ष 1990 से बन रही है, लेकिन 25 लाख की योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। समय के साथ योजना की लागत बढ़ती गई।

 किसी तरह निर्माण हुआ भी तो वहां अधिकारियों की भ्रष्टाचार नीति ने सब किए कराए पर पानी फेर दिया। एक बार फिर से बनाई गई योजना में भी बहुत सी बातें अनसुलझी है। ऐसे में देखना यह है कि अधिकारियों के दोष को जनता कब तक भुगतती है।

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