४९३ स्कूलों में नहीं फर्नीचर

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Jan, 14 2017 05:31:00 (IST)

Janjgir Champa, Chhattisgarh, India
४९३ स्कूलों में नहीं फर्नीचर

जिले के ५० फीसदी स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। एक हजार मिडिल व हाई स्कूल के छात्रों को जमीन पर बैठकर तालीम लेना पड़ रहा। सबसे बदतर स्थिति आरएसएमए स्कूलों की है।

जांजगीर-चांपा. जिले के ५० फीसदी स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। एक हजार मिडिल व हाई स्कूल के छात्रों को जमीन पर बैठकर तालीम लेना पड़ रहा। सबसे बदतर स्थिति आरएसएमए स्कूलों की है।

इन स्कूलों के बच्चों को बिजली पानी सहित हर तरह की सुविधाओं के लाले होना पड़ रहा।
स्कूल शिक्षा विभाग के सारे तामझाम के बाद भी ५० फीसदी स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है।

सुविधाविहीन स्कूलों में हजारों छात्र स्कूल जाना शुरू कर दिए हैं, लेकिन स्कूलों में अब तक फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

शिक्षा को बढ़ावा देने प्रशासन दिन ब दिन सजग होते दिखाई दे रही है, लेकिन मैदानी स्तर में व्यवस्था वास्तविकता से जुदा है।

स्कूलों में सबसे खराब स्थिति फर्नीचर की है। जिले के ५० फीसदी स्कूलों में फर्नीचर नहीं है। शिक्षा विभाग से मिले आंकड़े के मुताबिक ७९८ मिडिल स्कूलों में केवल ३०५ मिडिल स्कूलों में फर्नीचर की सप्लाई हो पाई है।

बाकी ४९३ स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। बच्चे जमीन पर बैठकर तालीम लेने मजबूर हैं। इसके अलावा सबसे खराब स्थिति आरएसएमए के स्कूलों की है।

जिले के लगभग ५० हाई स्कूलों में  फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। हाईस्कूल के बड़े-बड़े छात्र छात्राएं जमीन पर बैठकर तालीम ले रहे हैं। जमीन भी उखड़े हुए हैं।

जहां बैठने में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों के कपड़े एक दिन में ही खराब हो रहा है। जमीन में बैठने से बारिश के दिनों में कीड़े मकोड़े का भी डर सताते रहता है।
 
सालाना करोड़ो की खरीदी

स्कूल शिक्षा विभाग सालाना करोड़ों रुपए के फर्नीचर की खरीदी करती है। इसके बाद भी स्कूलों से फर्नीचर गायब हो जाता है। दिलचस्प बात यह है कि फर्नीचर की खरीदी राज्य स्तर से होती है

 और प्रदेश भर में सप्लाई की जाती है। इसकी खरीदी मंत्री या उसके करीबी स्कूलों में सप्लाई करते हैं। फर्नीचर की स्थिति इतनी खराब रहती है कि वह चंद दिनों में टूट जाता है।

आखिरकार बच्चों को मजबूरी में जमीन पर बैठकर तालीम लेनी पड़ती है।

२६३ स्कूलों नहीं अहाता
जिले के २६३ मिडिल व हाई स्कूलों में अहाता की सुविधा नहीं है। जबकि सरकार ने इसके लिए फंड अलॉट कर दिया है। फंड स्वीकृत होने के बाद भी   जिम्मेदार अहाता का निर्माण नहीं करा पा रहे हैं।

स्कूलों में अहाता नहीं होने से छात्रों को खेल-कूद के लिए स्वतंत्र वातावरण नहीं मिल पा रहा। स्कूलों में अहाता नहीं होने से मवेशियों का डेरा रहता है।

बड़े स्कूलों में अहाता नहीं होने से खासकर छात्राओं को खेलने कूदने एवं अन्य कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

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