सरस्वती योजना की साइकिल छात्राओं के लिए बनी परेशानी

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Mar, 21 2017 03:25:00 (IST)

Janjgir-Champa, Chhattisgarh, India
सरस्वती योजना की साइकिल छात्राओं के लिए बनी परेशानी

सरस्वती योजना की साइकिल छात्राओं के लिए परेशानी का सबब बन जा रही है। सरकार की ओर से दी जा रही घटिया स्तर की साइकिल के वितरण से छात्राओं को पहले ही दिन परेशानी हो रही है। जमीनी हकीकत की बात की जाए तो जिसे भी साइकिल वितरण की जिम्मेदारी दी गई है, वह छात्राओं के हित और सरकार की साख से अधिक अपनी कमाई की चिंता कर रहा है।

जांजगीर-चांपा. सरस्वती योजना की साइकिल छात्राओं के लिए परेशानी का सबब बन जा रही है। सरकार की ओर से दी जा रही घटिया स्तर की साइकिल के वितरण से छात्राओं को पहले ही दिन परेशानी हो रही है। जमीनी हकीकत की बात की जाए तो जिसे भी साइकिल वितरण की जिम्मेदारी दी गई है, वह छात्राओं के हित और सरकार की साख से अधिक अपनी कमाई की चिंता कर रहा है। उसके द्वारा इतनी घटिया स्तर की साइकिल वितरित की जा रही है, जिसमें किसी साइकिल की चेन टीटी है तो किसी में पायडल ही नहीं है। इतना ही नहीं कई साइकिलों के टायर फटे हुए हैं। अलबत्ता शासन की ओर दी जा रही साइकिल से सकुशल स्कूल पहुंचने की गारंटी छात्राओं को नजर नहीं आ रहा है।

जिले की 12 हजार छात्राओं को सरकार सरस्वती योजना के तहत इन दिनों साइकिल का वितरण कर रही है। शिक्षा सत्र बीत जाने के चार माह बाद छात्राओं को इन दिनों साइकिल वितरण की जा रही है। छात्राओं को जो छात्राएं साइकिल लेने जा भी रहीं हैं उसे घर तक ले जाने के लिए उन्हें पहले उसे साइकिल दुकान ले जाना पड़ रहा है और अपनी जेब से पैसा खर्च कर उसे बनवाना पड़ रहा है। तकरीबन 10 फीसदी साइकिल का टायर ही फटा हुआ है और हवा निकली हुई है।

इससे छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल रास नहीं आ रही है। नवागढ़ की छात्रा सुनीता ने बताया कि जब वह सरस्वती योजना की साइकिल ली तो उस साइकिल की चेन टीटी थी। इसके अलावा साइकिल के टायर पंचर था। पहले दिन साइकिल में स्कूल जाने से पहले साइकिल को रिपेयरिंग करानी पड़ी। इसके एवज में उसे 100 रुपए खर्च करना पड़ा। इसी तरह हाई स्कूल महंत की छात्रा सुमित्रा ने बताया कि उसकी साइकिल में टोकनी ही नहीं थी। टोकनी के लिए उसे 200 रुपए खर्च करना पड़ा। जबकि सभी साइकिल में बस्ता रखने के लिए टोकनी देने का प्रावधान है। इसी तरह अवरीद की छात्रा किरण ने बताया कि उसके साइकिल के मेडगार्ड चिपक गए थे। साइकिल का सीट भी टूटा था। ऐसे में साइकिल की मरम्मत करानी पड़ी। छात्राओं का मानना है कि इससे बेहतर सरकार हमें नगदी ही दे देती। ताकि वे खुद कुछ रुपए वहन कर अच्छी साइकिल खरीद लेते।

हड़बड़ी की वजह से छूट रहे पुर्जे-  सरस्वती योजना की साइकिल देने सरकार भले ही लोक लुभावने नारेबाजी कर रही है, लेकिन साइकिल के स्तर देख छात्राओं के आंखों में आंसू आ रहा। क्यों कि सरकार ने थोक के भाव में साइकिल के पाटर््स को प्रत्येक ब्लाक मुख्यालय में भेज दिया है। जिसे स्थानीय स्तर पर असेंबल कर छात्राओं को वितरित किया जा रहा। समय बीतने के बाद छात्राओं को साइकिल देने हड़बड़ी है। ऐसे समय में मेकेनिक आनन-फानन में असेंबल कर रहा है। इसकी वजह से साइकिल में खामियां रह जा रही।

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