कक्षा नवमीं का अंग्रेजी पेपर लीक, अब चार मार्च को होगा पेपर

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Feb, 16 2017 01:49:00 (IST)

Janjgir-Champa, Chhattisgarh, India
कक्षा नवमीं का अंग्रेजी पेपर लीक, अब चार मार्च को होगा पेपर

चार दिन पहले कक्षा नवमीं का अंग्रेजी पेपर लीक होने की सूचना फैलने के बाद जांच में यह पाया गया है कि पेपर कहीं और से नहीं बल्कि शहर में ही संचालित एक फोटोकापी दुकान से लीक हुआ था। जिसके चलते पेपर कैंशिल करना पड़ा है। यह पेपर अब चार मार्च को होगा।  इस पेपर की वजह से अब जिले के 30 हजार परीक्षार्थियों को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा।

जांजगीर-चांपा. चार दिन पहले कक्षा नवमीं का अंग्रेजी पेपर लीक होने की सूचना फैलने के बाद जांच में यह पाया गया है कि पेपर कहीं और से नहीं बल्कि शहर में ही संचालित एक फोटोकापी दुकान से लीक हुआ था। जिसके चलते पेपर कैंशिल करना पड़ा है। यह पेपर अब चार मार्च को होगा।  इस पेपर की वजह से अब जिले के 30 हजार परीक्षार्थियों को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा। दिलचस्प बात यह है कि इस पेपर की वजह से अब स्कूल संचालकों को खर्च का बोझ बढ़ गया। उन्हें अब प्रश्न पेपर के फोटो कापी करानी होगी। इसके कारण उन्हें दो से तीन हजार रुपए
खर्च आएगा।
नवमीं ग्यारहवीं के होम एग्जाम  बोर्ड की तर्ज पर संचालित करने का दावा किया जा रहा, लेकिन इसकी गोपनीयता तब तार-तार हो रही जब नैला के निजी प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्नपत्र छपवाया जा रहा है। क्योंकि प्रश्न पत्र लीक होने के बाद से ही उक्त प्रिंटिग प्रेस संचालक द्वारा स्कूल संचालकों को नया प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने की बात की जा रही है। जबकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रश्न पत्र दो मार्च को ही इश्यू होने थे। ऐसे में साफ जाहिर होता है कि शिक्षा विभाग के अफसर प्रिंटिग प्रेस संचालकों से मिले हुए हैं।

इस परीक्षा को लेकर बड़ी दिक्कत यह है कि स्कूल संचालकों को अपने स्कूल मद से प्रश्न पत्र खरीदना है। प्रश्न पत्र के लिए प्रत्येक स्कूलों को एक से दो हजार रुपए खर्च आ रहा है। क्योंकि प्रश्न पत्र आठ पेज का है। आठ एक पेज की फोटोकापी दो रुपए है और आठ पेज की कीमत 16 रुपए हो रहा है। यदि एक स्कूल में यदि 50 छात्र भी है तो 800 रुपए हो रहा है। इतने रुपए की भरपाई के लिए स्कूल संचालक छात्रों पर भी दबाव नहीं बना सकते और न ही चंदा कर सकते हैं। स्कूल में इसके लिए अलग से कोई फंड भी नहीं है। अलबत्ता परीक्षा स्कूल संचालकों के लिए मजाक बनकर रह गई है।

यह भी है विकल्प-  परीक्षा के लिए शिक्षा अधिकारी केवल एक प्रश्न पत्र देंगे। जिसकी फोटोकापी खुद करानी पड़ेगी। दूसरा विकल्प यह है कि शिक्षक नैला के एक प्रिटिंग प्रेस से प्रश्न पत्र ले सकते हैं। इससे साफ जाहिर है कि प्रश्न पत्र कहीं और से नहीं बल्कि यहीं से लीक हुआ है। ऐसा अपनों को लाभ देने के लिए किया गया है।

प्रिटिंग प्रेस संचालकों की चांदी- शिक्षा जिला जांजगीर व सक्ती को मिलाकर कक्षा 9वीं में तकरीबन 30 हजार से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। इन छात्रों से शिक्षा विभाग ने एक साल में लगभग चार लाख 80 हजार रुपए फीस लिया है। परीक्षा फीस लिए जाने के बाद भी पर्याप्त प्रश्नपत्र नहीं छपाए गए हैं। अब जिले भर में प्रश्न पत्र में एकरूपता लाने के लिए स्कूल संचालकों को एक पेपर देकर उसका पहले फोटो कॉपी कराने और उसके बाद परीक्षा लेने को कहा गया है।

स्कूल छोड़ प्रिंटिग प्रेस का लगा रहे चक्कर- परीक्षा बोर्ड की तरह जरूर हो रहा, लेकिन प्रश्न पत्र प्रिटिंग प्रेस से उपलब्ध हो रहा। स्कूल के प्राचार्य अपनी स्कूल की पढ़ाई, परीक्षा को छोड़कर नैला के प्रिटिंग प्रेस का चक्कर लगाने मजबूर हैं। क्योंकि कक्षा नवमीं ग्यारहवीं का प्रश्न पत्र यहीं से छप रहा। इन दिनों इस प्रिंटिग प्रेस में शिक्षकों की भीड़ लगी होती है।

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