पाकिस्तानी मशहूर नौहाख्वां: हिंदुस्तान से ज्यादा कहीं नहीं मिलती मुहब्बत, दोस्ती कायम इसलिए मिला वीजा  

Jaunpur, Uttar Pradesh, India
पाकिस्तानी मशहूर नौहाख्वां: हिंदुस्तान से ज्यादा कहीं नहीं मिलती मुहब्बत, दोस्ती कायम इसलिए मिला वीजा  

हिंदुस्तान-पाकिस्तान में अभी भी टिमटिमा रही दोस्ती की शमा पर कुछ लोग चाहते हैं कि दोनों मुल्को में दुश्मनी की तलवारें खिचीं रहें ताकि...  

जौनपुर. विश्व के प्रसिद्ध पकिस्तान के नौहाखा इरफ़ान हैदर ने कहा की हिंदुस्तान पाकिस्तान में अभी भी दोस्ती की शमा टिमटिमा रही है जिसका सुबूत है की हिन्दुस्तान की सरकार ने हमें वीज़ा दिया। कुछ लोग चाहते हैं कि दोनों मुल्को में दुश्मनी की तलवारें खिचीं रहें। ऐसा होने से सिर्फ अवाम का नुक्सान होता है। उन्होंने कहा की हिंदुस्तान से हमारा दिली लगाव है यहां से जितना प्यार मिला उतना कभी किसी और मुल्क से नहीं, इरफ़ान हैदर ने कहा की मोहब्बत देना अगर किसी को सीखना है तो हिंदुस्तान से ज्यादा मोहब्बत कोई और मुल्क के लोग नहीं दे सकते। 

उक्त बाते पकिस्तान के मशहूर नौहाखा इरफ़ान हैदर ने जिले के कलापुर गाव में कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व एम् एल सी सिराज मेहदी द्वारा आयोजित इसाले सवाब की मजलिस में नौहाखानी करने के पहले कहीं। उन्होने कर्बला के शहीदों पर दर्द भरे नौहे पढ़ कर लोगों को ग़मगीन कर दिया । खराब मौसम के बावजूद कलापुर गाव में उमड़े जनसैलाब ने इरफ़ान हैदर के नौहे सुनकर इमाम हुसैन को नजराने अकीदत पेश किया। इरफ़ान हैदर ने पैगामे हुसैनी को आम करते हुए कहा की शमा से शमा जले, सिलसिला जारी रहे, हम रहे या न रहे, ये अज़ादारी रहे। यह नौहे की पंक्ति सुनते ही लोगो की आंखों से बरबस आंसुओ का सैलाब उमड़ पड़ा। मजलिस को उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री मौलाना जावेद आब्दी ने ख़िताब करते हुए कहा की क़ुरआन में कायनात का पूरा इल्म हैं । हक़ हमेशा ज़ालिम पर भारी होता है ए हर तरफ सच्चाईए हक़ का बोलबाला होता हैं ए और जालिमो का मुंह काला होता है।

मौलाना आब्दी ने आगे कहा क़ुरान पे जो जुल्म वही अहलबैत पर ज़ुल्म , हज़रत इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके घर वालो को 1 साल तक कैदखाने में रखा गया । लेकिन सच्चाई हक़ इंसाफ बचाने के लिए हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम अपने बहत्तर साथियों के साथ शहीद हो गए, उनके घर वालो को असीर तक किया , कैद खानो में रखा , लेकिन आज हक़ ज़िंदा हैं, ये मजलिसे ज़ालिम का मुंहकाला करने और मज़लूम का साथ देकर हक़ ज़िंदाबाद कहने का पैगाम देती हैं । अंत में शहीदाने कर्बला के दर्दनाक मसाएब पढ़े जिसे सुनकर अज़ादार फफक कर रो पड़े।

 इस मौके पर पूर्व एम् एल सी सिराज मेहदी , शिया धर्मगुरु मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी , मोहम्मद नकी , सपा नेता जावेद सिद्दीकी , नजमुल हसन नजमी , मिर्ज़ा जावेद सुल्तान , हसन मेहदी , बसपा नेता मोहम्मद हसन तनवीर , नफीस मेहदी , कांग्रेसी नेता आफताब खान , डॉ सादिक रिज़वी , ज़रगाम हैदर सहित हजारो की संख्या में अज़ादार मौजूद रहे ।

   

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