खेती से मुनाफा कमाने की तकनीक बताई

Shruti Agrawal

Publish: Apr, 21 2017 12:31:00 (IST)

Jhabua, Madhya Pradesh, India
खेती से मुनाफा कमाने की तकनीक बताई

गांव-गांव में कृषि महोत्सव क्रांति रथ कर रहा भ्रमण

झाबुआ. जिले में 15 अप्रैल से ग्राम उदय से भारत उदय अंतर्गत कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। जिलें में 12 कृषि क्रांति रथ कृषि वैज्ञानिकों एवं तकनीकी दल के साथ भ्रमण कर गांव-गांव जा कर खेती किसानी की उन्नत तकनीक, हितग्राही मूलक योजनाओं का प्रचार-प्रसार एवं मार्गदर्शन देने के साथ-साथ कृषकों को कृषि उन्नत तकनीक से संबधित पेम्पलेट, साहित्य भी उपलब्ध कराया जा रहा है।


गुरुवार को  झाबुआ विकासखंड के ग्राम अंतरवेलिया, मसूरिया, आमली पठार, बीजलपुर, रामा विकासखंड के ग्राम दूधी, उमरकोट, छापरी कालीदेवी, भूराडावरा, कलमोड़ा, रानापुर विकासखंड के ग्राम रेंतालुंजा, मातासूला, कुशलपुरा, पुवाला, थांदला विकासखंड के ग्राम काकनवानी, छायन, मानपुरा, सेमलपाड़ा, पेटलावद विकासखंड के ग्राम घुघरी, केसरपुरा, कालीघाटी, मांडन, मेघनगर विकासखण्ड के ग्राम गुवाली, चौखवाड़ा, रम्भापुर, हत्यादेली में कृषि क्रांति रथों का भ्रमण एवं कृषि ग्राम संसद का आयोजन किया गया। रथ भ्रमण/किसान सभाओं के दौरान शासन की विभिन्न योजनाओ जैसे- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वस्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई की कृषक बंधुओं को विभागीय अमला द्वारा सलाह दी जाती है। खेती से आय में वृद्धि करने के लिए किसानों को फसलोत्पादन के साथ उद्यानकी खेती, उन्नत नस्ल का पशुपालन एवं मछलीपालन करने तथा फसल नरवाई का उचित प्रबंधन करने की सलाह दी जा रही है। जिले के विभिन्न विकास खंडों के किसानों को किसान सभा के दौरान कम पानी से अधिक क्षेत्र में सिंचाई करने एवं सिंचाई की दक्षता को बढ़ाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई पद्धति जैसे-बूंद बूंद एवं बौछारी सिंचाई पद्धति का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही जिले में विभिन्न फसलों की संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए खरीफ   में अरहर की धारवाड़ एवं धान की श्री पद्धति से खेती एवं आगामी रबी में सरसों व मसूर की खेती को बढ़ावा देने के उद्देेश्य से सफल विविधिकरण की सलाह दी जा रही है। ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करने की सलाह देते हुए बताया कि इसके करने से कीड़े मकोड़े, फफूंद रोग के बीजाणु, खरपतवारों की जडें़ भूमि की सतह पर आते है और तेज धूप में मर जाते हैं। इससे आगामी फसल उक्त समस्याओं से मुक्त रहती है। साथ ही भूमि की जल धारण क्षमता में वृद्धि, रोग व कीटों की संख्यां में कमी, फसलों की जल मांग में कमी होना, फसलों के लिए लंबे समय तक नमी संरक्षित रहना आदि लाभ होते हैं। फसल गहाई के बाद फसल के दानों को अच्छी तरह तेज धूप में सुखाकर ही भंडारित करें। ताकि भंडारित जिंस को भी अधिक समय तक कीटों से सुरक्षित रखा जा सके।
किसान भंडार कोठियों को अच्छी तरह साफ -सफाई एवं भंडारण में उपयोग होने वाले जूटके थैलों को मेलाथियान से उपचारित करने के बाद भंडारण करें। कृषि ग्राम संसद में किसानों को ग्रीष्मकालीन दलहनी फसल मूंग, उड़द एवं कुकुरविटेसी कुल की फसलें जैसे- लौकी, गिलकी, खीरा, ककड़ी, करेला, खरवूज एवं तरबूज की खेती करने के लिए तकनीकी सलाह दी। इन दिनों दलहन के अधिक बाजार भाव होने से इनका ग्रीष्मकालीन उत्पादन करके अधिक लाभ कमाया जा सकता है। शुक्रवार को  ग्राम नवागंाव, नरवालिया, नवापाड़ानवीन, जुलवानिया, गोपालपुरा, डोकरवानी, भूतेड़ी, सागिया,  धामनीनाना, भांडाखेड़ा, समोई, मोरडुंडिया,  छापरी, डुगरीपाड़ा, खांदन, खोखर खांदन, दुलाखेड़ी, गोदडिय़ा, मठमठ, जामली, मदरानी, पीपलखुंटा, अगराल, सजेली सुरजी में कृषि क्रांति रथ पहुंचेगा।

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