अबूझमाड़ की पहाडिय़ों में बिखरी पड़ी हैं वर्षों पुरानी ऐतिहासिक मुर्तियां

deepak dilliwar

Publish: Dec, 01 2016 12:43:00 (IST)

Kanker, Chhattisgarh, India
अबूझमाड़ की पहाडिय़ों में बिखरी पड़ी हैं वर्षों पुरानी ऐतिहासिक मुर्तियां

नक्सलवाद से प्रभावित कोयलीबेड़ा क्षेत्र के गोमे गांव के अबूझमाड़ की पहाडिय़ों में वर्षों पुरानी ऐतिहासिक मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं, लेकिन उसके संबंध में अब तक किसी अधिकारी ने धरोहर के रूप में रखने की पहल नहीं की है

कांकेर. नक्सलवाद से प्रभावित कोयलीबेड़ा क्षेत्र के गोमे गांव के अबूझमाड़ की पहाडिय़ों में वर्षों पुरानी ऐतिहासिक मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं, लेकिन उसके संबंध में अब तक किसी अधिकारी ने धरोहर के रूप में रखने की पहल नहीं की है, जबकि गांव वालों का कहना है कि यह गांव बसने से पहले की मूर्तियां हैं। ये मूर्तियां गांव के बाहर एक पुराने तालाब के किनारे बिखरी पड़ी हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि यह दक्षिण कला संस्कृति और उत्तर भारत की मिश्रित रूप हैं। इसमें अधिकांश देवताओं की मूर्तियां हैं, जो अपने आप में जीवंत दिखती हैं।

ancient time statue

कुछ 




मूर्तियां तो शिव पार्वती के रूप में दिखती हैं, जबकि अन्य मूर्तियों के बारे में स्पष्ट नहीं है। इतना जरूर है कि जंगल के बीच में बसे इस गांव की ऐतिहासिकता बयां करती ये मूर्तियां खुद ही बता रहीं है कि शादियों पहले ही यह क्षेत्र विकसित हो चुका था और जंगल के बीच में लोग रह रहे थे।
इस संबंध में गांव वालों का कहना है कि यहां तालाब के किनारे बैठने से थकान दूर हो जाती है और लोग अपने-आप को तरोताजा महसूस करते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यहां राजा के कार्यकाल में गोपनीय जगह बनाया गया था, जहां राजा आकर रुका करते थे और तालाब के किनारे भव्य मंदिर बना था, जो अब बिखर चुका है। यदि इन मूर्तियों पर भी किसी अधिकारी की निगाह पड़े तो इसकी ऐतिहासिकता का पता चले।

तालाब का कभी नहीं सूखता है पानी
गांव के बाहर बिखरी पड़ी मूर्तियों के बीच अबूझमाड़ की पहाडिय़ों में ही प्राचीन काल का बना तालाब गांव वालों के लिए वरदान है। गांव वालों का कहना है कि इस तालाब का पानी अकाल के समय भी नहीं सूखता है और लोगों के लिए यह वरदान साबित हो रहा है। जब चारों तरफ का पानी सूख जाता है तब भी यहां हमेशा जल स्रोत बना रहता है और लोग यहीं के पानी का प्रयोग करते हैं। इस तालाब को गांव वाले दैवीय वरदान मानते हैं। उनका कहना है कि यदि तालाब नहीं होता तो इधर बसे लोगों को गर्मी के दिनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता।

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