चुनाव प्रक्रिया में प्रशासन मस्त ठंड से असहायों की हालत पस्त

Ruchi Sharma

Publish: Jan, 13 2017 02:23:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
 चुनाव प्रक्रिया में प्रशासन मस्त ठंड से असहायों की हालत पस्त

इस सप्ताह गलन भरी कडाके की ठंड ने लोगों के हांड कंपा दिये है

कानपुर देहात. इस सप्ताह गलन भरी कडाके की ठंड ने लोगों के हांड कंपा दिये है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर दिन की तेज धूप में भी देखने को मिल रहा है। जानलेवा हो चुकी ठंड से जनपद में अब तक 29 लोगों की मौत हो चुकी है। चुनाव प्रक्रिया में मशगूल प्रशासनिक अफसरों द्वारा गरीबों को ठंड से बचाने के दावे फेल हो रहे है। जगह-जगह कस्बों में खुलवाये गये रैन बसेरा सिर्फ कागजों पर संचालित हो रहे है। क्योंकि कस्बा व अस्पतालों में अधिकांश रैन बसेरा मे तालाबंदी है और राहगीर ठंड में ठिठुरते नजर आ रहे है। वहीं अलाव की गर्मी भी गरीबों को नहीं मिल रही है। नगरीय क्षेत्रों में शेल्टर हाउस अनुपयुक्त जगहों पर होने से बेवजह साबित हो रहे है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ पर रहने वाले असहाय व गरीबों को सर्दी से बचाव के लिये रैन बसेरे का इंतजाम करने के निर्देश दिये है। इसके बाद भी जिले में अधिकांश रैन बसेरा सक्रिय नहीं हो पाये है।
 
इन हालात से गुजर रहे रैन बसेरे

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आचार संहिता लागू होने से गरीब व बेसहारा लोगों को कम्बल भी नसीब नहीं हो सके है। वहीं पूंजीपति व स्वयंसेवी संस्थायें भी ऐसे लोगों की मदद के लिये आगे नहीं आ रहे है। अधिकांश जगह रैन बसेरों में न तो पानी है और न ही शौचालय की व्यवस्था है। भीषण ठंड में जमीन पर दरी व गद्दे और कम्बल डालकर खानापूरी की जा रही है। अव्यवस्था के चलते कई रैन बसेरे रेलवे व बस स्टेशनों से दूर एकांत में होने से कोई वहां रुकता नहीं है। कई रैन बसेरों में ताला नजर आता है। राजपुर ब्लाक में एक कमरे में बैनर टांगकर रैन बसेरे की खानापूरी की गयी है। इसी तरह संदलपुर रैन बसेरा कागजो पर संचालित है। पुखराया, अमरौधा व रसूलाबाद में शेल्टर हाउस का कोई पता नहीं है। वहीं झीझक रैन बसेरा रेलवे स्टेशन से दूर नहर के पास बना हुआ है, जहां लोग नहीं पहुंच रहे है।

अस्पतालों में तीमारदारों के लिये कोई ठिकाना नहीं
 
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अस्पतालों में मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों के रुकने के लिये रैन बसेरा बनाये गये है। लेकिन रैन बसेरे में तालाबंदी होने से ऐसी कडाके की ठंड में तीमारदार अस्पताल के बरामदे में लेटने को मजबूर है। इन रैन बसेरों में कहीं तो भंडार कक्ष बन गया है, तो कही रंगाई पुताई का सामान भरा पड़ा है। जिला महिला अस्पताल में बने रैन बसेरे में निर्माण सामग्री रखकर ठेकेदार ने ताला डाल रखा है। जिससे वह अनुपयुक्त साबित हो रहे है। अकबरपुर, पुखरायां, झींझक, रसूलाबाद सीएचसी में तालाबंदी व कम्बल आदि की व्यवस्था न होने से मुंह चिढ़ा रहे है।

सीएमएस डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि रैन बसेरे खाली कराने के लिये कई बार सीएमओ को अवगत कराया जा चुका है। रैन बसेरे के एक कमरे का ताला तुड़वाकर तीमारदारों के ठहरने का इंतजाम कराया गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व अमरपाल सिंह ने बताया कि सभी नगरीय क्षेत्रों में शेल्टर हाउस बनाने के निर्देश पूर्व में दिये जा चुके है। अधिशासी अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करने व सत्यापन कराने के बाद प्रभावी कार्यवाही होगी।

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