कैसे हो उद्धार, अपर आयुक्त ने छात्रा से पूछा तो उसने कहा मैं ब्वाय हूं

Akanksha Singh

Publish: Nov, 29 2016 03:24:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
कैसे हो उद्धार, अपर आयुक्त ने छात्रा से पूछा तो उसने कहा मैं ब्वाय हूं

शासन के दिशा निर्देशों के मुताबिक परिषदीय विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर चलाई जा रही योजनायें दम तोड़ रही हैं।

कानपुर देहात। शासन के दिशा निर्देशों के मुताबिक परिषदीय विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर चलाई जा रही योजनायें दम तोड़ रही हैं। जिसकी हकीकत परखने के लिये जब अपर आयुक्त उर्मिला सोनकर ने अकबरपुर ब्लाक के तीन विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया तो उनकी आंखें खुली की खुली रह गयी। किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र मे हौसला पोषण योजना संचालित नहीं मिली, साथ ही अधिकांश बच्चे भी नदारद मिले। बच्चों के रजिस्टर में फर्जी उपस्थिति देख उनका पारा सातंवे आसमान पर चढ़ गया। उन्होंने दुर्गापुरवा, नरिहा सहित अन्य केंद्रों का निरीक्षण किया जहां गर्भवती महिलाओं व अति कुपोषित बच्चों के लिये चलाई जा रही हौसला पोषण योजना का नामो निशान नहीं दिखा जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई।


क्या है हौसला पोषण योजना
इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को खाने के साथ सप्ताह में तीन दिन बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार को 175 मिली दूध भी दिया जाये। इसके अतिरिक्त सप्ताह के प्रत्येक दिन एक मौसमी फल के साथ आयरन की गोली दी जाये। जिससे गर्भवती महिला के स्वस्थ्य होने के साथ होने वाले बच्चे की सेहत भी दुरुस्त रखी जा सके। इस योजना में सरकार ने अति कुपोषित बच्चों को भी खाना देने की मंशा जाहिर की है। जिसके अंतर्गत 6 माह से 3 वर्ष व 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों को अलग अलग वर्ग में रखा गया है। 3 वर्ष तक के बच्चों को भोजन के साथ ही 20 ग्राम घी व फल दिया जाये। वहीं 3 से 6 वर्ष तक के बच्चो को भोजन के बजाए फल व घी के साथ शाम को नाश्ते के रूप में ग्लुकोज बिस्किट व चना आदि अलग अलग चीजे दी जायें। जिससे स्वस्थ्य बच्चो को कुपोषण से बचाने के साथ कुपोषित बच्चों को इस संकट से उबारा जा सके।


दुर्गापुरवा व नरिहा की भयावह स्थित
जब वह दुर्गापुरवा पहुंची, तो वहां बच्चों की संख्या नगण्य मिली। कार्यकत्री पिंकी पांडेय गैरहाजिर थी। सहायिका ने बताया कि 21 नवम्बर से वह नहीं आयी, जबकि रजिस्टर में उनकी उपस्थिति दर्ज मिली। यहां तक कि रविवार अवकाश के दिन ही भी उनके हस्ताक्षर पाये गये। रजिस्टर में बच्चे शत प्रतिशत उपस्थिति थे, जबकि बच्चे केंद्र पर नदारत थे। यही हाल नरिहा के तीनों केंद्रों का रहा। कार्यकत्रियां अनुपस्थिति मिलीं, बच्चे रजिस्टर में उपस्थित केंद्र में गायब थे। साथ ही केंद्र में कोई भी गर्हवती महिला नहीं मिली।


छात्रा से पूछा तो उसने कहा मैं ब्वाय
अपर आयुक्त ने जब प्राथमिक विद्यालय नरिहा में औचक निरीक्षण किया तो विद्यालय में एक शिक्षिका उपस्थित मिली। जबकि 3 नदारत थी। उन्होंने कक्षा 3 व 4 के बच्चों से डा. भीमराव अम्बेडकर के चित्र की तरफ इशारा करते हुये पूछा ये कौन है तो बच्चो ने सुभाष चंद्र बोस बताया। फिर उन्होंने शिक्षिका से संविधान दिवस मनाने की तिथि पूछी तो वह चुप्पी साध गयीं। इसके बाद उन्होंने कक्षा 4 की छात्रा प्रियंका से पूछा आप गर्ल हो या ब्वाय तो उसने तपाक से कहा कि मैं ब्वाय हूं। जिसके बाद कक्षा में मौजूद सभी बच्चों ने उसे ब्वाय बताया। यह सुनकर वह दंग रह गयी।
अपर आयुक्त उर्मिला सोनकर ने बताया कि निरीक्षण में कहीं भी पोषण योजना संचालित नहीं मिली है। कई तरह के फर्जीवाड़े सामने आये हैं जिनकी रिपोर्ट तैयार करके कार्रवाही के लिये भेजा जायेगा।

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