इस मंत्री के क्षेत्र में लूले-लंगड़े हैंडपंप, पानी की जगह उगल रहे जहर

Ashish Pandey

Publish: Apr, 21 2017 07:18:00 (IST)

Kanpur, Uttar Pradesh, India
इस मंत्री के क्षेत्र में लूले-लंगड़े हैंडपंप, पानी की जगह उगल रहे जहर

घरों में जो पानी आता भी है तो वह पीने लायक नहीं होता है। 

कानपुर। साउथ सिटी के बर्रा पांच, बर्रा चार, बर्रा दो, बर्रा 7, जूही, नौबस्ता समेत आधा दर्जन इलाके के लोग पीने के पानी को लेकर जूझ रहे हैं। इस इलाके के एक बड़े हिस्से में पाइप लाइन सड़ गल चुकी है। जिससे कुछ ही हिस्सों में वाटर सप्लाई का पानी घरों में आता है, जो पानी आता है भी वह गन्दा व बदबूदार है। वहीं क्षेत्र में लगे 75 फीसदी हैंडपंप लूले-लंगड़े हालत में पड़े हुए हैं, जो ठीक भी हैं उनसे केमिकलयुक्त जहरीला पानी निकल रहा है। लोगों का कहना है कि यहां से सत्यदेव पचौरी विधायक चुनकर भेजे गए, योगी सरकार में उन्हें कैबिनेट मिनिस्टर बनाया गया पर उन्होंने इस समस्या से हम लोगों को छुटकारा नहीं दिलाया। 

बर्रा पांच, बर्रा चार, बर्रा दो, बर्रा 7, जूही, नौबस्ता आदि मोहल्लों में करीब 35 हजार लोग रहते हैं। केवल बर्रा पांच में 52 ब्लाक हैं। हर ब्लाक में 12 कॉलोनी है। राजू अटा चक्की से लेकर मकान नम्बर 150 से 315 तक वाटर लाइन का अता-पता नहीं है। इसी तरह बर्रा सात के कई अन्य ब्लाकों में वाटर लाइन सड़-गल चुकी या मकानों के नीचे दब चुकी है। इन्हीं वजहों ज्यादातर घरों में वाटर सप्लाई का पानी नहीं आता है। जहां आता भी है तो अक्सर गन्दा, बदबूदार पानी सप्लाई होता है जो पीने लायक नहीं होता। साफ  और स्वाच्छ पानी की समस्या से जूझ रहे लोगो को हैंडपम्पों पर लाइन लगानी पड़ती है। कुछ लोग समस्या से छुटकारा पाने के लिए घरों में समर्सिबल पम्प लगाने को मजबूर हो गए।

75 फीसदी हैंडपम्प खराब
जलकल विभाग ने पानी की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए 150 से ज्यादा हैंडपम्प लगवाएं पर इनमें से 70 फीसदी से अधिक हैंडपम्प रिबोर की स्थिति में है। कई के तो हैंडिल और अन्य ऊपरी हिस्सा तक गायब हो चुके हैं। 3- 40 हैंडपम्प तो छोटी- मोटी खराबियों के कारण बन्द हैं। लोग पानी की समस्या से परेशान है, पर जलकल के ऑफिसर इन्हें ठीक कराने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इलाकाई लोगों के मुताबिक जो चल रहे हैं, वह आसपास के लोग मिल- जुलकर सही कराते हैं।
52.50 लाख लीटर पानी की डिमांड 
इस इलाके में करीब आबादी लगभग 35 हजार के आसपास है। यहां पर पानी की डिमांड  52.50 लाख लीटर की है, जबकि सप्लाई महज 14.0 लाख लीटर ही हो रही है। इन मोहल्लों में लोगों को 38.50 लाख लीटर पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। बर्रा सात के रहने वाले विकास अवस्थी ने बताया कि हमारे ब्लाक में 10-12 साल से वाटर सप्लाई का पानी नहीं आ रहा है। सार्वजनिक समर्सिबल और हैंडपम्प से पानी भरना मजबूरी है। वही जीशान ने बताया कि वाटर सप्लाई का पानी न आने के कारण घर में समर्सिबल पम्प लगाना पड़ा। 

क्या बोले जिम्मेदार 
पानी की समस्या को लेकर जब गोविन्दनगर के विधायक व कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी से बात करनी चाही तो उनके पीआरओ दीपक कुमार ने बताया कि मंत्री जी बिजी हैं, शाम को बात करिए। वहीं मामले पर स्थानीय पार्षद से इस समस्या के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि पिछले साल पानी की समस्या से क्षेत्र के लोगों को मुक्ति दिला दी गई थी। हैंडपंप खराब पड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द ठीक करा दिया जाएगा। वहीं समाजसेवी अनुपम मिश्रा ने कहा कि शहर में दो दशक से पीने के पानी की समस्या बढ़ गई है। इस विकराल समस्या के निदान के लिए योगी सरकार को नीति बनानी होगी। गंगा के जल की पहले साफ-सफाई के साथ ही मोहल्लों से गुम हो गए तलाबों और कुओं को जीवित करना होगा।

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