EXCLUSIVE - लौकी-पालक खाते हैं देश के अगले राष्ट्रपति, घर में तीन मर्तबा चोरी

Kanpur, Uttar Pradesh, India
EXCLUSIVE - लौकी-पालक खाते हैं देश के अगले राष्ट्रपति, घर में तीन मर्तबा चोरी

Ramnath Kovind को लौकी और पालक की सब्जी बेहद पसंद है, जबकि धोती-कुर्ता और पायजामा-कुर्ता उनका पसंदीदा पहनावा है।

कानपुर . ‘सादगी के राम’.... यह विशेषण अक्सर ही देश के अगले संभावित राष्ट्रपति Ram Nath Kovind के लिए पुकारा जाता है। बेहद निर्धन परिवार में जन्मे रामनाथ सात भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। रामनाथ के पिता पिता मैकूलाल ने परचून की दुकान चलाकर और मंदिर में पुजारी की जिम्मेदारी निभाकर अपनी संतानों को पढ़़ाया और संस्कारित किया। माता-पिता के सद्गुणों और संस्कारों का रामनाथ कोविंद के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। सादा जीवन-सादा भोजन के सिद्धांत पर यकीन करने वाले रामनाथ कोविंद को लौकी और पालक की सब्जी बेहद पसंद है, जबकि धोती-कुर्ता और पायजामा-कुर्ता उनका पसंदीदा पहनावा है। कानपुर के इंदिरानगर में रामनाथ कोविंद के घर में तीन मर्तबा चोरी भी हुई, लेकिन उन्होंने खुले मकान में ही रहना पसंद किया। खास बात यहकि संघ और भाजपा के बड़े पदों पर रहने के साथ-साथ दो मर्तबा राज्यसभा सांसद रहे रामनाथ कोविंद के परिजन बेहद साधारण पृष्ठभूमि से नाता रखते हैं। आज भी भतीजा एक कस्बे में कपड़े की छोटी दुकान चलाता है, जबकि समधी कच्चे घर में रहते हैं। 

सात भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं रामनाथ कोविंद

डेरापुर तहसील के परौंख गांव में 01 अक्टूबर 1945 को अनुसूचित जाति के गरीब किसान मैकूलाल के घर सातवीं संतान के रूप में पैदा हुए रामनाथ कोविंद के बड़े भाइयों के नाम रखे गए मोहनलाल, शिवबालक राम, रामस्वरूप भारती, प्यारेलाल, जबकि बहनों का नाम गोमती और पार्वती। अब इस दुनिया में मोहनलाल और शिवबालक राम नहीं हैं, जबकि दोनों बहनें भी संसार से विदा हो चुकी हैं। शिवबालक राम शिक्षक थे, जबकि बड़े भाई रामस्वरूप भारती मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी करने गए और वहीं बस गए। सात संतानों की परवरिश के लिए मैकूलाल ने छोटी से खेती के साथ-साथ गांव में परचून की दुकान चलाना शुरू कर दिया। इसी के साथ एक मंदिर की देख-रेख की जिम्मेदारी निभाने लगे। 

भोजन में लौकी-पालक की सब्जी और रोटी पसंद है

इंदिरा नगर में रामनाथ कोविंद की पड़ोसी सुमन शुक्ला के मुताबिक उन्हें भोजन में लौकी और पालक की सब्जी तथा रोटी ही पसंद है। मकान बनवाते समय रामनाथ कोविंद अक्सर ही सुमन शुक्ला के घर भोजन करते थे। दोपहर में थोड़ा चावल-दाल खाना पसंद करने वाले रामनाथ कोविंद को दही-बड़े भी ललचाते हैं। सरकारी प्राइमरी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने वाले रामनाथ कोविंद आठवीं क्लास तक पढ़ाई करने के लिए घर से 12 किमी दूर खानपुर डिलवल के जूनियर स्कूल में आते थे। बाद में हाईस्कूल और इंटरमीडियट की पढ़ाई कानपुर के नामचीन स्कूल बीएनएसडी कालेज से करने के बाद डीएवी कालेज से बी.कॉम किया। अंत में डीसी लॉ कॉलेज से वकालत की डिग्री लेने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे।

चोरों ने घर में तीन मर्तबा धावा बोला, मोटर हुई चोरी

रामनाथ कोङ्क्षवद के कानपुर स्थित आवास में चोरों ने तीन मर्तबा धावा बोला। इंदिरानगर की मुख्य सडक़ पर स्थित आवास को चोरों ने तीन मर्तबा निशाना बनाया। बिहार के राज्यपाल बनने के बाद आवास पर सुरक्षा पुख्ता रहती है, लेकिन 2006 से 2015 के दरम्यान तीन बार चोरों ने कोविंद के मकान से सामान पार कर लिया। पड़ोसियों के मुताबिक खुले घर में रहने के शौकीन रामनाथ कोविंद ने बाहरी हिस्से को ओपेन रखा है। चोरों ने इसी रास्ते से घुसपैठ करने के बाद खिडक़ी तोडक़र रसोई गैस सिलेंडर से लेकर शील्ड, बर्तन तथा अन्य सामान समेट लिया था।

भतीजों की कपड़े की दुकान, समधी कच्चे घर में

दो मर्तबा सांसद रहने के बावजूद रामनाथ कोविंद के रिश्तेदार चमक-दमक से दूर हैं। रामनाथ कोविंद के बड़े भाई प्यारेलाल के बेटे पंकज झींझक में कपड़े की दुकान चलाते हैं, जबकि दूसरे भाई मोहनलाल के बेटे सुरेश भी झींझक में कपड़े का कारोबार करते हैं। कानपुर के शिवराजपुर में ग्राम पंचायत गौरीअभयपुर के गांव बृजवासिनापुरवा में रामनाथ कोविंद के भाई शिवबालक की बिटिया अंजली का ब्याह हुआ है। खेती-बाड़ी करने वाले अंजली के ससुराल में बिजली कनेक्शन नहीं है, जबकि मकान भी कच्चा है। कोविंद के समधी लालाराम ने बताया कि मिलनसार स्वभाव के कारण रामनाथ कोविंद को गांव में बेहद सम्मान मिलता है। 

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