EXCLUSIVE : कोविंद के परिवार को मिल गए थे संकेत, चार दिन पहले राजभवन पहुंचे बड़े भाई

Kanpur, Uttar Pradesh, India
EXCLUSIVE : कोविंद के परिवार को मिल गए थे संकेत, चार दिन पहले राजभवन पहुंचे बड़े भाई

पत्रिका से विशेष बातचीत में बोले भाई, माता-पिता के धार्मिक कार्यों का प्रताप आया सामने, Ramnath Kovind के परिवार को 4  दिन पहले ही पता चल गया था...

डॉ.संजीव

कानपुर। घर का सबसे छोटा बेटा देश की सबसे बड़ी कुर्सी संभालने जा रहा है, इस बात के संकेत परिवार को कुछ दिन पहले ही मिल गए थे। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रपति प्रत्याशी रामनाथ कोविंद के बड़े भाई रामस्वरूप भारती चार दिन पहले ही पटना स्थित राजभवन पहुंच गए थे। प्रफुल्लित रामस्वरूप ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कहा कि माता-पिता के धार्मिक कार्यों का प्रताप सामने आया है। वे (Ramnath Kovind) निश्चित रूप से देश व समाज की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

Ramnath Kovind को राष्ट्रपति का प्रत्याशी बनाए जाने से कानपुर ही नहीं मध्य प्रदेश के गुना और बिहार के पटना तक उल्लास छाया है। पांच भाइयों व चार बहनों के भरे पूरे परिवार में सबसे छोटे Ramnath Kovind इस समय बिहार के राज्यपपाल हैं। औपचारिक रूप से तो सोमवार को उनके राष्ट्रपति का प्रत्याशी बनाए जाने की जानकारी सामने आयी है किन्तु उनके परिवार को इसके संकेत कुछ दिन पहले ही मिल गए थे। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के गुना में रहने वाले उनके भाई राम स्वरूप भारती चार दिन पहले ही पटना पहुंच चुके थे। सोमवार को जैसे ही Ramnath Kovind को प्रत्याशी बनाए जाने की बात औपचारिक रूप से सामने आयी रामस्वरूप व उनके रिश्तेदारों में उल्लास व्याप्त हो गया। इस दौरान पत्रिका से बातचीत में रामस्वरूप ने स्वीकार किया कि संकेत मिल रहे थे और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की घोषणा के बाद उसकी पुष्टि हो गयी। अब सब घर वाले जश्न के मोड में हैं।

माता-पिता के यज्ञ हुए सफल

रामस्वरूप यह बताते हुए भावुक हो उठे कि आज उन्हें अपने माता-पिता बहुत याद आ रहे हैं। पिता मैकूलाल व माता फूलमती ने तमाम अभावों के बीच बच्चों की पढ़ाई पर पूरा फोकस किया। Ramnath Kovind ने भी उन्हें कभी निराश नहीं किया। वे खूब पढ़े और खूब बढ़े। माता-पिता गांव में यज्ञ कराया करते थे, खूब पूजा पाठ करते थे और आज जब घर का सबसे छोटा बेटा देश की सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठने जा रहा है, तो उन्हें लगता है कि माता-पिता के यज्ञ सफल हो गए हैं। दरअसल नौ भाई बहनों में रामनाथ सबसे छोटे हैं। चार बहनों व पांच भाइयों वाले इस परिवार में चारों बहनों व दो भाइयों मोहन लाल व शिवबालकराम की मृत्यु हो चुकी है। स्वंय रामस्वरूप तो मध्य प्रदेश के गुना में रहते हैं, दूसरे जीवित भाई प्यारेलाल गांव में ही रहते हैं।

समाज के लिए करेंगे अच्छा

रामस्वरूप ने कहा कि रामनाथ ने गरीबी से लेकर समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों को समझा है। वे राष्ट्रपति बनते हैं तो सिर्फ उनके गांव, कानपुर या यूपी के लिए ही नहीं पूरे समाज के लिए बहुत बड़ी बात होगी। वे वकील के रूप में भी सबका भला करते रहे हैं। जो उनके पास गया, कभी निराश नहीं लौटा। राज्यसभा सदस्य के रूप में भी उन्होंने जनता का हमेशा भला ही सोचा है। उन्हें जो जिम्मेदारी मिली पूरे मन से निभाई है। Ramnath Kovind राज्यपाल बने तो जनता से दूर नहीं रहे। उन्होंने कभी समाज के किसी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया। राष्ट्रपति के रूप में भी देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेंगे, साथ ही समाज के आखिरी छोर तक लोगों को पुनरुद्धार की कोशिश करेंगे। घर वाले भी इसे समाज हित में एक बड़ा मौका मानकर खुश हैं।

राजनाति से सब हैं दूर

इस समय पूरे देश में परिवारवाद और राजनीति एक दूसरे के पर्यायवाची बन गए हैं। रामस्वरूप बताते हैं कि रामनाथ ने अपने परिवार को कभी राजनीति में नहीं घुसने दिया। जब वे दो बार चुनाव लड़े, तब भी परिवार के सदस्य जुटते तो थे किन्तु उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा कभी नहीं जागने दी गयी। Ramnath Kovind एक बेटे प्रशांत व बेटी स्वाति के पिता हैं। दोनों ने एयर इंडिया से अपने करियर की शुरुआत की है। स्वाति अभी एयर इंडिया में काम कर रही, किन्तु बेटा प्रशांत अब एयर इंडिया छोड़ चुका है। प्रशांत ने दिल्ली में पेट्रोल पंप सहित अन्य व्यवसायिक गतिविधियों को संभाल रखा है। इन सबके बावजूद रामनाथ ने अपनी अगली पीढ़ी को भी गांव से सतत जोड़े रखा है और वे सब बीच-बीच में गांव आते रहते हैं।

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