मास्टर, डॉक्टर, कलेक्टर नहीं, इसलिए रामनाथ कोविंद बने एडवोकेट

Ashish Pandey

Publish: Jul, 17 2017 06:25:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
 मास्टर, डॉक्टर, कलेक्टर नहीं, इसलिए रामनाथ कोविंद बने एडवोकेट

कोविंद की बात सुनकर प्रोफेसर सुमन निगम ने अपने साथी टीचर से कहा था कि ये लड़का वकील तो बनेगा पर देश की राजनीति में अहम रोल निभाएगा। 

विनोद निगम   
कानपुर. बारवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वकालत में कॅरियर बनाने का मन रामनाथ कोविंद ने बना लिया था। जब उन्होंने डीएबी लॉ कॉलेज में एडमीशन लिया तो पहले दिन हमने उनका परिचर के साथ ही इस पेशे में आने का मकसद पूछा। जिस पर कोविंद ने जवाब दिया कि इसके जरिए मैं गरीब और लाचार लोगों की लड़ाई लड़कर उन्हें न्याय  दिलवाऊंगा। अगर मैं, मास्टर, डॉक्टर और कलेक्टर की जॉब करता तो सरकारी बाबू बनकर रह जाता और इस तबके की आवाज नहीं बन सकता था। कोविंद की बात सुनकर हमने अपने साथी टीचर से कहा था कि ये लड़का वकील तो बनेगा पर देश की राजनीति में अहम रोल निभाएगा। 
kanpur

























हमारी भविष्यवाणी उस वक्त साबित हो गई, जब इनको बिहार का राज्यपाल बनाया गया और अब वो  देश के प्रेसीडेंट बनने जा रहे हैं, इसके चलते हमें भी खुशी है कि जिस छात्र को हमने शिक्षा दी वो आज देश के प्रथम नागरिक की कुर्सी में बैठने जा रहा है। ये शब्द डीएबी लॉ कॉलेज के रिटायर्ड शिक्षक प्रोफेसर सुमन निगम (85) के हैं, जिन्होंने एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को पढ़ाया था ने पत्रिका से खास बातचीत के दौरान कहे। 

इसके चलते पहना काला कोट  
डीएबी लॉ कॉलेज के  रिटायर्ड  प्रो. सुमन निगम जो कि सिविल लाइंस इलाके में रहते हैं ने बताया कि 1966 की बात है। रामनाथ कोङ्क्षवद  से हमारी पहली  मुलाकाल स्कूल रूम में हुई। सभी स्टूडेंट्स की भांति हम एक-एक से उनका परिचय पूछ रहे थे। कोविंद की जब बारी आई तो उस दिन वो काला पैंट और सफेद शर्ट पहने हुए थे। कोविंद ने अपना नाम बताया और इस पेशे में आने का मकसद। कोविंद ने कहा था  कि गुरू जी अगर मैं सरकारी बाबू बन जाता तो जनता की सेवा नहीं कर पाता।  मैं काला कोट पहनकर गरीबों के लिए लडऩा चाहता हूं।  पैसे के अभाव से बहुत से लोग अपना केस लड़ नहीं पाते या हार जाते हैं। उन्हें सही न्याय मिले, न्यायपालिका में सुधार हो इस लिए हमने  वकालत चुनी।
  
काम के प्रति इमादारी की जीती-जागती मूर्ति
सुमन बताते हैं कि रामनाथ कोविंद काम के प्रति बहुत इमानदार थे। समय पर कॉलेज आते और मन लगाकर पढ़ाई किया करते। दोपहर के  वक्त वो लाइब्रेरी में जाकर भारत के महापुरुषों की किताबें पढ़ा करते थे। प्रोफेसर सुमन कहते हैं कि कोविंद प्रथम साल पहले नंबर से पास हो गए। दूसरा साल था वो लाइब्रेरी में भारत और पाकिस्तान के बटवारे की किताब पढ़ रहे थे। हमने उनसे पूछा रामनाथ तुम अक्सर भारत के बटवारे के बारे में ही क्यों पढते हो और टीचरों से चर्चा किया करते हो। जिस पर कोविंद ने जवाब दिया था कि गुरुजी ये नासूर और दुखद घटना है, जो कभी भुलाई नहीं जा सकती। आने वाले दिनों में ये समस्या देश के लिए भवायह होगी। 

भोले के थे भक्त, कढ़ी और चावल पसंद  
प्रोफेसर सुमन ने बताया कि कोविंद भगवान शिव के भक्त थे और उनके बस्ते में शंकर की तस्वीर हुआ करती थी। वो अपने कुछ मित्रों के  साथ आन्नदेश्वर मंदिर जाया करते थे और शाम के वक्त हमारे घर प्रसाद लेकर आया करते। इस दौरान वो हमसे वकालत के टिप्स लेते। कभी-कभी वकालत पर बात करते-करते सुबह हो जाया करती थी, लेकिन कोविंद के चेहरे में सिकन नहीं दिखती थी। सुमन बताते हैं कि एकबार कोविंद भोजन कर रहे थे, हम भी पहुंच गए तो उन्होंने कहा गुरु जी कढ़ी और भात का मजा लेंगे, बड़ी भाभी ने भिजवाया है। हमने  उनके कहने पर कढ़ी चखी जो बहुत स्वादिष्ट भी।     
सांसद बनने के बाद आए थे घर
सुमन बताते हैं कि कोविंद का झुकाव पढ़ाई के दौरान संघ से था और वो अपनी बहन के घर से रविवार को उनके कार्यालय जाया करते थे।  घाटमपुर से चुनाव हारने के बाद वो हमसे मिलने के लिए आए थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि गुरुजी हार के बाद जीत होती है। इसके बाद वो राज्यसभा के  लिए चुने गए और तब हमसे आर्शीवाद लेने आए थे। बिहार का राज्यपाल बनने के बाद हमने उन्हें फोनकर बधाई दी तो कोविंद ने भी प्रणाम कहकर आर्शीवाद मांगा। कोविंद के प्रेसीडेंट बनने के बाद देश बहुत आगे तक जाएगा। उनके अंदर वो काबलियत है  कि पाकिस्तान जैसा दुश्मन देश और चीन आंख की जगह हाथ मिलाने को मजबूर होंगे। सुलग रहे कश्मीर का अब जल्द इलाज पीएम मोदी और रामनाथ कोविंद करेंगे।  

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